चंपकवन में बहुत शांति थी. पशुपक्षी बहुत आराम से रहते थे. जरूरत पड़ने पर वे एकदूसरे की सहायता भी करते थे.

कुछ दिनों पहले कुछ शिकारी आ कर अपनी बंदूकों से पशुपक्षियों का शिकार करने लगे थे. अपने दोस्तों को खोते देख पशुपक्षी बहुत डर गए. वे एक मुसीबत में फंस गए थे.

सभी ने राजा शेरसिंह से मिलने की योजना बनाई. शेरसिंह ने उन की बात को शांति से सुना और कहा, ‘‘हमें भी तुम्हारी सुरक्षा की चिंता हो रही है. लेकिन इन शिकारियों के पास बंदूकें हैं. मुझे भी बंदूक से डर लगता है. हमें मिल कर इन शिकारियों से लड़ने का कोई रास्ता ढूंढ़ना होगा.’’

हनी हिप्पो बोला, ‘‘महाराज, मेरे पास एक योजना है, जिस के द्वारा इन शिकारियों को वन से भगाया जा सकता है.’’

‘‘तुम्हारी योजना क्या है, हनी?’’ शेरसिंह ने पूछा.

‘‘महाराज, हमें एक साथ मिल कर इन शिकारियों का मुकाबला करना होगा. हमें ‘एकता में बल’ दिखाना होगा,’’ हनी बोला.

‘‘हम एक साथ खड़े रह कर भी उन का मुकाबला नहीं कर सकते. वे हमें बंदूकों से गोली मार सकते हैं,’’ लंबू जिराफ बोला.

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‘‘मैं जानता हूं. हमें कुछ करने से पहले एक अच्छी योजना बनानी होगी. मेरी मोटी चमड़ी में गोली नहीं घुस सकती. मैं उन के सामने जा कर उन का ध्यान भटकाने की कोशिश करूंगा, तुम लोग पीछे से हमला कर देना,’’ हनी बोला.

‘‘यदि मैं घायल हो गया, तो वहां मौजूद डाक्टर डमरू तुरंत गोली निकाल देंगे.’’ हनी ने आगे बताया.

‘‘तुम अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हो. मैं आशा करता हूं कि तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं होगा,’’ राजा शेरसिंह ने कहा.

योजना के अनुसार दूसरे दिन कौए ने जासूसी का काम किया. उस ने शिकारियों का पता लगा कर राजा शेरसिंह को बता दिया. हनी के कहने के मुताबिक सभी जानवर अलगअलग जगहों पर छिप गए थे.

लंबू जिराफ एक पेड़ के पीछे छिप गया था. फैटी हाथी लंबे पेड़ों के झुंड में छिप गया था. जंपी पत्तों के झुरमुट में छिप गया था. चीकू खरगोश झाडि़यों में छिपा बैठा था. शेरसिंह ने खुद को एक टीले के पीछे छिपा रखा था.

शिकारी अपने हाथों में बंदूकें लिए घूम रहे थे. वे हल्की सी आवाज पर भी शूट करने के लिए तैयार थे.

योजना के अनुसार हनी शिकारियों के सामने आया और फिर जिस ओर उस के साथी छिपे थे, उस ओर भागने लगा.

शिकारी उस का पीछा करने लगे, लेकिन जल्दी ही हनी ऊंची घासों के पीछे जा कर गायब हो गया.

एक शिकारी टीले के पास पहुंचा, जहां राजा शेरसिंह छिपा था. शिकारी कुछ देखने के लिए टीले पर चढ़ने लगा. तभी वह फिसला और शेरसिंह के ऊपर जा गिरा. उस के शरीर में डर से कंपन होने लगी. उस ने अपनी बंदूक फेंकी और टीले से लुढ़कने लगा. वह शिकारी किसी तरह वहां से भागा. उस की हालत देख कर शेरसिंह अपनी हंसी नहीं रोक पाए.

अपने दोस्त को भागते देख कर दूसरे शिकारी भी डर गए. अब सारे जानवर छिपी हुई जगहों से बाहर आ गए थे. उन्होंने शिकारियों पर एक साथ हमला कर दिया. शिकारियों ने अपनी बंदूकें फेंकीं और वहां से?भागने लगे. जानवरों ने शिकारियों को वन से बाहर खदेड़ दिया.

जब सभी जानवर वन में वापस आए, तो उन्होंने जमीन पर पड़ी बंदूकें देखीं. जंपी ने सारी बंदूकों को जमा किया. तभी अचानक एक बंदूक से गोली चल गई. सभी जानवर गोली की आवाज सुन कर हैरान थे. शेरसिंह भी एक गड्ढे में कूद गया.

जब सभी जानवरों को बंदूक चलने के कारण का पता चला तो वे हंसने लगे.

लंबू बोला, ‘‘लड़ने के लिए अब हमारे पास भी बंदूकें हैं. अब किसी से डरने की जरूरत नहीं है.’’

लेकिन शेरसिंह चुपचाप था. वह सोच रहा था कि यदि जंपी द्वारा चलाई गई बंदूक से किसी को गोली लग जाती, तो क्या होता.

शेरसिंह बोला, ‘‘हमें ऐसे बंदूकों की आवश्यकता नहीं, जो किसी की जान ले. मैं नहीं चाहता कि हम में से कोई बंदूक की गोली से मरे. ऐसे हालात नहीं बनने चाहिए ताकि कोई भी यह सोचे कि जिस के पास बंदूक है, वह बहुत ताकतवर है. अच्छा होगा कि सभी बंदूकें झील में फेंक दी जाए.’’

शेरसिंह की बातों से सभी सहमत थे. सब ने मिल कर बंदूकों को झील की गहराई में फेंक दिया.

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