मोंटी बंदर अपने घर में अकेला सोया था. मम्मी ने उसे घर का ध्यान रखने के लिए कहा था. लेकिन वह आराम से सो रहा था. जब उस की आंखें खुलीं तो वह थकावट महसूस कर रहा था. उसे तेज भूख भी लगी थी. वह भोजन की तलाश में पेड़ से नीचे उतर गया.

‘‘कैसे हो, मोंटी. आज तो तेज धूप है.’’ कीचड़ में खेल रहे चून्नू घोंघे ने कहा. ‘‘मैं ठीक हूं चुन्नू, मुझे बहुत तेज भूख लगी है. मैं कुछ खाने के लिए ढूंढ़ रहा हूं,’’ मोंटी ने इधरउधर देखते हुए कहा.

‘‘अच्छा, तो ठीक है. यह कीचड़ बहुत ही कोमल है. तुम जितना चाहो, खा सकते हो,’’ चुन्नू ने कीचड़ की ओर इशारा करते हुए कहा. ‘‘कीचड़? अरे, मैं बंदर हूं. मैं कीचड़ कैसे खा सकता हूं?’’

‘‘तुम्हें नहीं खाना है, तो मत खाओ. कम से कम हमारे खाने की तो बेइज्जती मत करो,’’ चुन्नू ने गुस्से में कहा. ‘‘माफ करना, मेरा यह मतलब नहीं था,’’ कह कर मोंटी वहां से चला गया.

थोड़ी ही दूरी पर? एक तालाब था, जिस में कई मछलियां खेल रही थीं. मोंटी को उधर से गुजरते देख मछलियां किनारे आ गईं. ‘‘मोंटी, तुम यहां क्यों आए हो?’’ गोल्ड मछली ने पूछा. ‘‘दरअसल, मुझे बहुत भूख लगी है. इसलिए मैं भोजन की तलाश में हूं,’’ मोंटी ने शांति से कहा.

‘‘मेरे पास तो ढेर सारा भोजन है. तुम जितना चाहो, खा सकते हो. रुको, मैं तुम्हारे लिए कुछ लाती हूं,’’ सिल्वर मछली ने कहा और पानी के अंदर चली गई. थोड़ी देर बाद वह कुछ केंचुए ले कर आई. यह देख कर मोंटी मुंह बनाता हुआ बोला, ‘‘मैं केंचुए नहीं खाता. मैं बंदर हूं.’’ वह मछली को समझाने की कोशिश कर रहा था.

‘‘फिर तुम ने भोजन के लिए क्यों कहा?’’ कह कर गुस्से से सिल्वर मछली तैरती हुई चली गई. मोंटी भी वहां से चल पड़ा.

‘‘मुझे लगता है आज मैं भूखा ही रहूंगा. मुझे अभी तक खाने के लिए कुछ भी नहीं मिला,’’ मोंटी अपने पेट पर हाथ फेरते हुए बोलता जा रहा था. वह बहुत थक गया था फिर भी भोजन की तलाश में चलता जा रहा था. अचानक उसे एक शेर दिखाई दिया. वह रुक गया. वह शेर की गुर्राहट और उस के तेज दांतों को देख कर कांपने लगा.

‘‘क्या बात है? तुम यहां क्या कर रहे हो?’’ शेर ने गुर्राते हुए पूछा. ‘‘शेर अंकल, मैं बहुत भूखा हूं इसलिए भोजन की तलाश में हूं,’’ मोंटी धीरेधीरे चलते हुए बोला.

‘‘तुम यहां आ ही गए हो, तो आओ, खा कर चले जाना. मैं ने अभीअभी एक हिरण का शिकार किया है. यदि तुम चाहो तो थोड़ा सा ले सकते हो,’’ शेर ने झाडि़यों के पास पड़े हिरण को उसे दिखाते हुए कहा. यह सुनते ही मोंटी को चक्कर आ गया. ‘‘नहीं, नहीं, मैं बंदर हूं. मैं हिरण का मांस नहीं खा सकता,’’ मोंटी बोला.

‘‘यदि तुम मांस नहीं खा सकते, तो फिर मुझे भोजन के लिए क्यों कहा? मेरे पास और कुछ भी नहीं है.’’ शेर गुस्से में बोला. ‘‘धन्यवाद, शेर अंकल,’’ कह कर मोंटी जितनी तेजी से भाग सकता था, वहां से भाग खड़ा हुआ.

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‘‘आज मैं बच गया. यदि उस शेर को मेरे ऊपर गुस्सा आ जाता तो मेरी मौत निश्चित थी,’’ मोंटी बड़बड़ाया.

अब वह एली हाथी के घर के सामने खड़ा था. एली अपने बगीचे के पौधों में पानी दे रहा था. ‘‘मोंटी, आज इधर कैसे आना हुआ?’’ एली ने मोंटी को देख कर पूछा.

‘‘एली अंकल, मैं बहुत भूखा हूं. लेकिन मुझे खाने को कुछ भी नहीं मिल रहा,’’ मोंटी ने दुखी होते हुए कहा.

‘‘कोई बात नहीं. मैं तुम्हें खाने की चीजें दूंगा. यहां बैठो,’’ एली ने कहा. मोंटी नहीं जानता था कि अब क्या होगा. उस ने सोचा कि एली भी ऐसी चीजें खाने के लिए देगा, जो वह नहीं खा पाएगा.

‘‘यह लो.’’ कह कर एली ने मोंटी के सामने एक बास्केट रख दिया. ‘‘धन्यवाद अंकल, लेकिन मैं इतना नहीं खा सकता,’’ मोंटी ने बास्केट की ओर बिना देखे ही कहा. ‘‘तुम क्या कह रहे हो, तुम इतना नहीं खा सकते? मुझे पता है बंदर केवल फल ही खाते हैं.’’ एली ने हैरानी से कहा.

फल की बात सुन कर मोंटी ने बास्केट की ओर देखा. पूरा बास्केट आम, केले, अमरूद और खजूर से भरा हुआ?था. ‘‘अरे, वाह.’’ कह कर मोंटी उस बास्केट पर टूट पड़ा. ‘‘आप को कैसे पता चला कि ये मेरे पसंदीदा फल हैं?’’ मोंटी ने पूछा.

‘‘तुम बंदर हो और बंदरों को फल पसंद हैं.’’ एली ने मुसकराते हुए कहा. मोंटी ने फल खा कर अपनी भूख मिटाई. वह बहुत खुश था.

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