कारा सारस को उस दिन भी शिकार नहीं मिला. वह घर वापस लौट रहा था. कुछ दिनों से वह मछलियां नहीं पकड़ पा रहा था. वह कई दिनों से भूखा था. इसलिए उस ने क्रौड मगरमच्छ से सहायता लेने की सोची. वह क्रौड से मिलने चला, तो रास्ते में कोको कौआ मिल गया. उस के गले में एक माला थी, जिस में रंगीन मणि वाले पत्थर लगे थे.

‘‘कोको, तुम ने कितनी अच्छी और रंगीन माला पहन रखी है,’’ कारा ने कहा. ‘‘हां, मैं ने यह माला इसलिए पहन रखी है क्योंकि इस किताब में मेरे लिए यही पहनना लिखा है,’’ कोको ने अपने हाथ में पकड़ी हुई किताब की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘इस किताब के अनुसार रंगीन मणि वाले पत्थर पहनने से कभी किसी तरह की परेशानी नहीं आती.’’

‘‘अच्छा, कैसी परेशानी?’’ कारा ने हैरान हो कर पूछा. ‘‘जैसे परीक्षा में पास होना, व्यापार में घाटा होना, दोस्तों से लड़ाईझगड़ा. इस किताब में इन सारी समस्याओं का हल है. इस किताब के बारे में अखबार और पत्रपत्रिकाओं में भी काफी विज्ञापन छपे हैं. क्या तुम ने नहीं देखा?’’ कोको ने पूछा.

‘‘नहीं, मैं ने नहीं देखा. लेकिन क्या यह किताब मुझे ऐसे रत्न बता सकती है, जिस से हमारी समस्या का हल हो?’’ कारा ने पूछा. ‘‘बिलकुल, बल्कि मैं यह भी जानता हूं कि तुम्हारी समस्या क्या है,’’ कह कर कोको ने एक रंगीन रत्न अपनी जेब से निकाला. हाथ में रख कर उस ने कुछ देर अपनी आंखें बंद कीं, जैसे वह कोई मंत्र पढ़ रहा हो, ‘‘इस रत्न ने मुझे कहा है कि तुम कई दिनों से भूखे हो.’’ उस ने धीरेधीरे अपनी आंखें खोलते हुए कहा.

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कारा हैरान था. ‘‘यह सच है. मैं 2 दिनों से मछली पकड़ने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन एक भी मछली नहीं पकड़ पाया हूं. लेकिन तुम्हें कैसे पता चला?’’ कारा ने पूछा. ‘‘यह तो इस रत्न ने मुझे बताया. कोई बात नहीं, तुम चिंता मत करो. यह रत्न तुम्हारी सहायता करेगा. मुझे सौ रुपए दे दो और यह रत्न ले जाओ. सोने से पहले इसे अपने पैरों पर रगड़ लेना. तब देखना, कल क्या होगा,’’ कोको बोला.

भूखे कारा ने किसी भी तरह मछली पकड़ने के चक्कर में कोको को सौ रुपए दे कर वह रत्न ले लिया. उस रात बैड पर जाने से पहले कारा ने वही किया, जो कोको ने कहा था. उस ने रत्न को पैरों से रगड़ा और सोने चला गया.

दूसरे दिन कारा जल्दी से उठ कर झील की ओर गया. वह देखना चाहता था कि वास्तव में रत्न कैसे काम करता है. इधर कोको रात में ही थैले में पड़ोसी वन से ढेर सारी मछलियां खरीद कर ले आया था. फिर ओटो ऊदबिलाव से कह कर सारी मछलियां झील में फिक्स करवा दी थीं.

इन बातों से अनजान जब कारा वहां पहुंचा, तो झील में मछलियां सामने ही दिख गईं. उस ने पूरे दिन में ढेर सारी मछलियां पकड़ लीं. ‘यह तो सचमुच रत्न का ही कमाल है,’ उस ने सोचा, ‘मुझे कोको को धन्यवाद कहना चाहिए और रत्न के चमत्कार के बारे में सब को बताना चाहिए.’

वह अपने घर की ओर जा रहा था कि रास्ते में क्रौड मिल गया. ‘‘हैलो कारा, तुम ने कल मिलने के लिए कहा था, पर तुम आए नहीं?’’ क्रौड ने पूछा.

‘‘हां क्रौड, असल में कुछ दिनों से मैं मछली नहीं पकड़ पा रहा था, इसलिए तुम से मिल कर आइडिया लेना चाहता था. पर माफ करना, मैं आ नहीं सका,’’ कारा ने कहा. क्रौड ने मछलियों से भरी हुई बाल्टी देख कर कहा, ‘‘अब तो लगता नहीं कि तुम्हें हमारी सहायता की आवश्यकता है.’’

‘‘यह सब तो कोको ने किया है. कल मैं तुम्हारे घर ही आ रहा था कि रास्ते में कोको मिल गया. उस ने मेरी समस्या को दूर करने के लिए एक रत्न दिया. ‘‘उस रत्न को सोने से पहले अपने पैरों से रगड़ना था, मैं ने वही किया. अब परिणाम तुम्हारे सामने है,’’ कारा ने विस्तार से बताया.

‘‘यह कैसे हो सकता है? एक रत्न मछली पाने में तुम्हारी सहायता कैसे कर सकता है. इस सूखे मौसम में तुम्हें इतनी मछलियां कैसे मिल गईं,’’ क्रौड ने कारा की बात सुन कर हैरानी से कहा, ‘‘मुझे लगता है कोको तुम्हें बेवकूफ बना रहा है.’’ पर कारा ने उस की बात नहीं सुनी. उसे तो कोको पर ही यकीन था.

दूसरे दिन क्रौड कोको के यहां गया. ‘‘कोको, मैं ने सुना है कि तुम किसी की भी परेशानी दूर कर सकते हो. क्या तुम मेरी सहायता करोगे?’’ क्रौड ने विनती करते हुए कहा.

‘‘क्यों नहीं करूंगा. बताओ, परेशानी क्या है?’’ कोको ने पूछा. ‘‘मैं ने अपने बगीचे में एक आम का पेड़ लगाया था, जिस में अब तक फल आ जाने चाहिए थे. पर अभी तक नहीं आए. मुझे आम बेच कर ही अपना किराया चुकाना था,’’ क्रौड ने कहा.

‘‘चिंता मत करो, क्रौड. यह गले की चेन पहन लो. कल सुबह तक तुम्हारी समस्या का समाधान हो जाएगा. लेकिन इस चेन की कीमत 200 रुपए है,’’ कोको ने कहा. ‘‘कोई बात नहीं,’’ कह कर क्रौड ने रुपए दे दिए और चेन ले ली.

घर लौटते समय उस ने कारा से मिल कर सारी बात बता दी. कारा ने रात में आ कर चेन का चमत्कार देखना स्वीकार कर लिया. रात में क्रौड और कारा बगीचे के पास झाडि़यों में छिप कर बैठ बए. कुछ देर बाद आम के पेड़ के पास से एक छाया उभरी और कुछ आवाजें आने लगीं.

क्रौड ने तेजी से बढ़ कर उस छाया को पकड़ लिया और कारा ने लाइटें जला दीं. ‘‘कोको, तुम यहां क्या कर रहे हो?’’ कारा ने हैरानी से पूछा.

‘‘ऊह… कुछ नहीं… यह तो शौर्टकट से मैं अपने घर जा रहा था,’’ कोको ने घबराते हुए कहा. ‘‘झूठे, तुम सच बोलते हो या पुलिस को बुला कर बताऊं कि तुम मेरे बगीचे में चोरी करने आए थे,’’ क्रौड ने कोको को जोर से हिलाते हुए कहा.

डरे हुए कोको ने तुरंत अपनी गलती मानते हुए कहा, ‘‘मैं यहां आम के पेड़ के ऊपर तथा आसपास कुछ आम रखने आया था, ताकि ऐसा लगे कि आम का पेड़ फलने लगा है और तुम्हें ऐसा लगे कि यह चेन काम कर रही है.’’ क्रौड ने पुलिस को बुलाया और कोको को पुलिस के हाथों सौंप दिया. उस दिन के बाद से कारा ने इस तरह की बातों पर विश्वास करना बंद कर दिया.

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