ईंटों से भरा एक ट्रक सड़क पर तेजी से दौड़ता जा रहा था. सभी ईंटें इस यात्रा का मजा ले रही थीं. वे सभी गर्व महसूस कर रही थीं क्योंकि उन्हें शहर में नई बिल्डिंग बनाने के लिए चुना गया था. तभी ट्रक किसी चीज से टकराया और एक ईंट

उछल कर बाहर सड़क पर जा गिरी. ट्रक उस ईंट को छोड़ कर आगे बढ़ गया. वह ईंट लुढ़कते हुए रोड से नीचे आ गई. एक बड़ा पत्थर पहले से वहां पड़ा था. वह ईंट उम्मीद कर रही थी कि कोई आ

कर उसे बिल्डिंग बनाने के लिए ले जाएगा, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. बहुत देर हो जाने के बाद वह उदास हो गई. सामने के कचरे के ढेर से बहुत बदबू आ रही थी. पत्थर ने ईंट को उदास देख कर पूछा, ‘‘क्या हुआ दोस्त, तुम कुछ परेशान दिख रही हो.’’

‘‘मुझे यह जगह पसंद नहीं है,’’ ईंट ने कहा. ‘‘क्यों, इस जगह में क्या दिक्कत है?’’

पत्थर ने पूछा. ‘‘यहां क्या सही है? एक ओर सड़क की धूल है तो दूसरी ओर कचरे की बदबू,’’ ईंट ने कहा.

‘‘ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि तुम इन जगहों पर कभी रही नहीं. तुम इस से पहले कहां रहती थी?’’ पत्थर ने पूछा. ‘‘मैं यहां से बहुत दूर ईंटों के भट्ठे में रहती थी. वह बहुत ही साफसुथरी जगह थी,’’ ईंट ने कहा.

‘‘चिंता मत करो, दोस्त. तुम्हें जल्दी ही यहां की आदत हो जाएगी,’’ पत्थर ने आश्वस्त किया. ‘‘देखते हैं क्या होता है. मैं ट्रक में नाचतेगाते कितनी खुश थी. पता नहीं मैं बाहर कैसे गिर गई,’’ ईंट सुबकते हुए बोली.

‘‘तुम कहां जा रही थी?’’ पत्थर ने पूछा. ‘‘शहर में एक बड़ी बिल्डिंग बनाने के लिए मुझे ले जाया जा रहा था,’’ ईंट ने कहा.

‘‘क्या वह जगह तुम्हारे लिए अच्छी होती?’’ पत्थर ने पूछा. ‘‘क्या तुम मेरा मजाक उड़ा रही हो?’’ ईंट ने अपने चेहरे पर हाथ रख कर पूछा.

‘‘नहीं, मैं तुम्हें सचाई बता रहा हूं,’’ पत्थर बोला. ‘‘तुम यहां कितने दिनों से हो?’’

‘‘मुझे याद नहीं. शायद बहुत दिनों से.’’ ‘‘क्या तुम्हारे लिए यहां कोई नहीं आया?’’

ईंट ने पूछा. ‘‘हम तो इस सड़क के पत्थर हैं. हमें धैर्य से रखा जाता है,’’ पत्थर ने कहा.

‘‘मैं अच्छी तरह समझ सकती हूं. लेकिन मैं तुम्हारी तरह यहां लंबे समय तक नहीं रह सकती,’’ ईंट ने कहा.

‘‘अब जब तुम यहां हो, तो या तो खुशीखुशी रह सकती हो या फिर दुखी हो कर,’’ पत्थर बोला. ‘‘तुम्हारा क्या मतलब है?’’ ईंट ने पूछा.

‘‘तुम अपनेआप तो यह जगह छोड़ कर जा नहीं सकती. फिर गुस्से में रह कर क्या करोगी?’’ पत्थर ने कहा. ‘‘मैं तुम्हारी तरह बिना आकार का पत्थर नहीं हूं. मैं बहुत सुंदर हूं. कोई भी मुझे देख कर आकर्षित हो सकता है और मुझे उठा कर अपने साथ ले जा सकता है,’’ ईंट ने घमंड से कहा.

‘‘तुम सही कह रही हो. लेकिन सुंदर होने का मतलब यह नहीं कि कोई भी आ कर तुम्हें ले जाए,’’ पत्थर बोला.

‘‘तुम मेरी सुंदरता से जलते हो,’’ कह कर ईंट चुप हो गई. वह पत्थर से बात नहीं करना चाहती थी. उसे अपनी सभी दोस्त याद आ रही थीं, जो उस से बिछड़ गई थीं. शाम हो रही थी, वह दिन भर किसी के आने का इंतजार करती रही, जो उसे यहां से ले जाए. लेकिन किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया. वह उदास वहां पड़ी थी, लेकिन कुछ कर नहीं सकती थी.

रात गुजर गई. सुबह हो गई. ईंट को उम्मीद थी कि आज कोई न कोई जरूर आएगा. पक्षी अपने भोजन की तलाश में निकले थे. एक जोड़ी पक्षी वहां से गुजरे तो नई ईंट देख कर उस पर बैठ गए. एक की चोंच में एक ब्रैड का टुकड़ा था.

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‘‘कितनी सुंदर ईंट है. यह सड़क के किनारे कैसे आ गई,’’ एक पक्षी ने कहा. ‘‘जरूर इसे यहां कोई फेंक कर गया होगा,’’ दूसरे ने कहा.

दोनों साथसाथ उस ब्रैड को खा रहे थे. ब्रैड के कुछ टुकड़े ईंट पर भी गिरा रहे थे. दोनों ने उस ईंट पर गंदगी भी कर दी. ईंट को गुस्सा तो बहुत आ रहा था, लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी. उस की आंखों में आंसू आ गए. पक्षियों के वहां से जाने के बाद पत्थर ने ईंट से कहा, ‘‘दुखी मत हो, मेरे दोस्त.’’

‘‘मेरे साथ ऐसा होगा मैं ने कभी सोचा भी नहीं था,’’ ईंट ने दुखी होते हुए कहा. ‘‘कई बातें हमारी कल्पना से बाहर होती हैं.

तुम इसे जल्दी छोड़ सकती हो,’’ पत्थर ने सांत्वना देते हुए कहा. ‘‘मेरे पास तुम्हारे जितना धैर्य नहीं है, मेरे दोस्त,’’ दुखी होते हुए ईंट बोली.

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‘‘समय के साथ तुम्हें भी धैर्य आ जाएगा,’’ पत्थर ने कहा. ईंट शांत थी. लेकिन पत्थर की बातों से उसे कुछ राहत पहुंची थी. समय गुजरता गया. अब ईंट और पत्थर दोस्त बन गए थे. एक सप्ताह गुजर गया लेकिन सड़क के किनारे पड़ी उस ईंट पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. प्रत्येक दिन उस पर धूल और गंदगी पड़ती. समय गुजरता गया और अब ईंट ने सारी उम्मीदें छोड़ दीं. लेकिन पत्थर उसे अभी भी आश्वस्त करता रहता.

एक दिन उस सड़क से एक स्कूल बस जा रही थी. अचानक उस का पिछला टायर पंक्चर हो गया. ड्राइवर ने बस को किनारे में खड़ा कर लिया. वह बस से उतर कर चारों ओर देखने लगा. उस ने एक छात्र से सामने पड़ी ईंट उठा कर पिछले पहिए के नीचे लगाने को कहा, ताकि बस चलने न लगे. ड्राइवर ने बस का पहिया बदल लिया. बच्चे खुशी से झूम उठे. एक छात्र उस ईंट को उठा कर उसी जगह पर रख आया, जहां वह पहले से थी. ईंट अपनी पुरानी जगह पर आ कर खुश थी. वह खुश थी कि उस ने किसी की सहायता की. उस ने पत्थर की ओर देखा. वह भी मुसकरा रहा था.

कुछ दिनों बाद एक दिन 2 बच्चे हाथों में बैलून लिए उस सड़क से गुजर रहे थे. बैलून में गैस भरे थे. बच्चों ने मजबूती से धागे को पकड़ रखा था. तेज धूप में चलते हुए दोनों बहुत थक गए थे. वहां उन्हें ईंट दिख गई. वे पास गए. बैलून को ईंट से बांध दिया और बगल में बैठ गए. ईंट बैलून्स को पकड़ कर बहुत खुश थी. कुछ देर बाद बच्चे अपनेअपने बैलून ले कर वहां से चल पड़े. उन्हें खुश देख कर पत्थर ने ईंट से कहा, ‘‘मैं ने तुम से कहा था न कि एक दिन तुम दूसरों की मदद करोगी.’’

‘‘हां, तुम ने सही कहा था, मेरे दोस्त. रोड के किनारे होने के बाबजूद मुझे लग रहा है कि हम बेकार नहीं हैं. हम दूसरों की मदद कर सकते हैं,’’ ईंट ने जवाब दिया.

‘‘तुम्हें यह दिन देखने को इसलिए मिला क्योंकि तुम ने धैर्य रखा,’’ पत्थर ने कहा. दोनों वहां बैठ कर मस्ती करने लगे और वहीं अपने लिए कुछ अच्छा करने की सोचने लगे.

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