गरमियों का मौसम खत्म हो चुका था. उस बगीचे में फूलों की भरमार थी. पीले रंग का तुलिप, लाल रंग का गुलाब, डेजी और न जाने क्या क्या. वैसे तो फूलों में खूब दोस्ती थी, लेकिन उन में अपनी सुंदरता को ले कर घमंड भी काफी था.

एक दिन उन में बहस छिड़ गई कि फूलों में सब से सुंदर कौन है. अब इसे ले कर आपस में बहस होने लगी. कोई किसी को कम मानने को तैयार नहीं था.

‘‘देखो, मैं सब से बड़ा हूं. मेरा रंग सभी को अच्छा लगता है, इसलिए मैं सब से सुंदर हूं,’’ तुलिप ने इतराते हुए कहा तो दूसरे फूलों ने चिढ़ कर अपना मुंह फेर लिया.

‘‘अपना यह बड़बोलापन अपने पास ही रखो,’’ मुंह बनाते हुए लाल गुलाब बोला, ‘‘मेरा यह चटक रंग देखो. जब ओस की बूंदें मेरी पंखडि़यों पर पड़ती हैं, तो मेरी खूबसूरती देखते ही बनती है. अब बताओ, अगर तुम सब में सब से सुंदर मैं नहीं, तो और कौन है.’’

‘‘अब तुम सब चुप भी करो. मेरे रंग के सामने तुम सभी फीके हो,’’ डेजी ने कहा, ‘‘मेरी खुशबू और खूबसूरती की हर कोई तारीफ करता है.’’ डेजी ने अपनी बात रखी तो फूलों के बीच बहस और बढ़ गई.

‘‘श…श… सभी चुप हो जाओ. कुछ लोग इस ओर आ रहे हैं, वही बताएंगे कि हम सब में सब से सुंदर कौन है,’’ अपनी गरदन ऊंची करते हुए तुलिप बोला.

अब सब चुप हो गए. सब सुंदर दिखने के लिए मुसकराने लगे. जब लोग आए तो किसी ने गुलाब, किसी ने तुलिप, तो किसी ने डेजी की तारीफ की. अब फूलों की मुश्किलें और बढ़ गईं.

‘‘अब तो हमें माली के आने का इंतजार करना होगा. वही बता पाएगा कि हम में कौन सब से ज्यादा सुंदर है,’’ गुलाब ने मुरझाए स्वर में कहा.

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कुछ देर में माली भी वहां पहुंचा. सभी फूलों की धड़कनें बढ़ गईं. सब एकदूसरे से ज्यादा सुंदर दिखने की कोशिश करने लगे.

माली सब से पहले तुलिप के पास पहुंचा. उस ने तुलिप को तोड़ा तो गुलाब ने कहा, ‘‘तू तो बड़ा डींगें हांक रहा था. लेकिन माली तो तुझे इस बगीचे में रखना ही नहीं चाहता, इसलिए तोड़ कर बाहर कर रहा है. हा… हा…’’

तुलिप का चेहरा लटक गया. माली ने कुछ और तुलिप के फूलों को तोड़ कर अपनी डलिया में डाल लिए. लेकिन गुलाब की खुशी भी बहुत ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी.

अब माली गुलाब के फूलों के पास पहुंचा और उन्हें तोड़ने लगा.

‘‘अब तुम्हारी बारी है,’’ डेजी ने उस की खिल्ली उड़ाई. ‘‘अब सिर्फ मैं ही बच गया हूं.’’ डेजी ने झूमते हुए कहा तो बाकी फूल जलभुन गए.

लेकिन माली वहीं नहीं थमा. उस ने डेजी को तोड़ कर अपनी डलिया में डाल लिया. अब सब हैरान थे कि आखिर यह माली करना क्या चाहता है. उधर डलिया में भी फूल आपस में बातें नहीं कर रहे थे. एकदूसरे को देखते ही मुंह घुमा ले रहे थे.

माली उन्हें ले कर अपनी दुकान में गया. वहां कई गुलदस्ते रखे हुए थे. माली ने पहले तुलिप के कुछ फूल गुलदस्ते में रखे. फिर गुलाब के कुछ गुच्छे रखे और अंत में डेजी को रखा. उस ने गुलदस्ते को रंगबिरंगे कागज और रिबन से सजाया. रंगबिरंगे फूलों से सजे उस गुलदस्ते की खूबसूरती अब देखते ही बन रही थी. अपने गुलदस्ते को देख कर माली फूला न समाया.

‘‘गुलदस्ते में मेरे फूल कितने सुंदर लग रहे हैं. इन में से कोई किसी से कम नहीं है. सभी एकदूसरे से बढ़ कर हैं. लेकिन इन फूलों को मिला कर ही मेरा यह गुलदस्ता तैयार हुआ है,’’ माली ने कहा तो सभी फूलों के चेहरे खिल उठे. अब उन्हें भी समझ आ गया था कि एकसाथ रहने में ही उन की खूबसूरती को चार चांद लग सकते हैं.

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