टीनू बाघ बहुत डरपोक था. अगर उसे कोई घूरते हुए देखता तो भी वह डर जाता. टीनू की मम्मी उस के बारे में सोच कर चिंतित हो जाती थी. मम्मी ने उस का आत्मविश्वास बढ़ाने वाली कई कहानियां सुनाईं. साथ में यह भी समझाने की कोशिश की कि उसे डरना नहीं चा?िहए. इस के बाद भी टीनू का भय दूर नहीं हुआ.

एक दिन जब टीनू स्कूल से आया तो बहुत शांत था. ‘‘क्या हुआ, टीनू? तुम इतने शांत क्यों हो?’’ मम्मी ने पूछा.

‘‘मम्मी, मैं स्कूल नहीं जाना चाहता. पिंकू बंदर मुझे बहुत परेशान करता है. उस ने मेरी पूंछ खींच ली और मुझ पर हंसने लगा,’’

टीनू बोला. मम्मी ने प्यार से उस के बाल सहलाते हुए कहा, ‘‘बेटा, तुम एक बाघ हो. तुम्हें इन छोटी बातों से नही डरना चाहिए. तुम पिंकू से बात करो, उसे बताओ कि उस के ऐसे व्यवहार से तुम्हें परेशानी होती है. उसे ऐसा नहीं करना चाहिए.’’

जब टीनू कुछ नहीं बोला, तो मम्मी ने कहा, ‘‘यदि वह तुम्हें परेशान करना बंद नहीं करे तो अपने क्लास टीचर से उस के व्यवहार के बारे में बात करो.’’ मम्मी की बात सुन कर टीनू बोला, ‘‘यदि मैं उस की शिकायत करूंगा, तो वह मुझे और परेशान करेगा.’’

‘‘यदि तुम इन छोटी बातों से डरते रहे तो भविष्य में तुम क्या करोगे? तुम अपने लिए खड़ा होना सीखो, बेटे,’’ मम्मी ने कहा. टीनू ने सहमति में अपना सिर तो हिला दिया. लेकिन उस की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे.

दूसरे दिन स्कूल के सारे बच्चे पिकनिक के लिए गए. टीनू को अपनी मम्मी की बात याद थी कि बहादुर बन के रहना है. बस में चढ़ने के बाद टीनू खिड़की के बगल में बैठ गया और बाहर के दृश्यों का मजा लेने लगा. कुछ बच्चे बस में सो गए थे.

अचानक बस तेज आवाज करती हुई रुक गई. ‘‘अरे, अचानक बस क्यों रुक गई?’’ चिल्लाते हुए बच्चे उठ गए.

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‘‘सड़क के बीचोबीच पत्थर का एक बहुत बड़ा टुकड़ा रखा है,’’ बस ड्राइवर मोती कुत्ते ने कहा, ‘‘यह रोड के बीच में कैसे आ गया? कल तो यहां नहीं था.’’ अभी कोई कुछ समझ पाता उस से पहले मोटू भेडि़या और कालू भालू बस के अंदर आ गए. दोनों वन के खतरनाक अपराधी थे. एक तो ड्राइवर के ठीक पीछे खड़ा हो गया और दूसरे ने दरवाजे को जोर से बंद कर दिया.

‘‘कोई बच्चा नहीं हिलेगा. तुम सभी का अपहरण कर लिया गया है,’’ मोटू बोला. ‘‘हमारे पास हथियार हैं. इसलिए जैसा कह रहा हूं, वैसा ही करो, नहीं तो अच्छा नहीं होगा.’’

सभी बच्चे बुरी तरह डर गए थे. कुछ तो जोरजोर से रोने लगे. ‘‘बस को पुराने हिल रोड की तरफ ले चलो. आज तुम सभी हमारी कस्टडी में रहोगे,’’ कालू बोला.

‘‘हम तुम्हें तब छोड़ेंगे जब तुम्हारे मातापिता से रुपए मिल जाएंगे. जिस के मातापिता रुपए नहीं देंगे उसे हम मार देंगे.’’ मोटू ने हंसते हुए कहा. ‘‘अरे, यह बंदर तो फोन करने की कोशिश कर रहा है,’’ कालू बोला.

सभी पिंकू की ओर देखने लगे, जिस के हाथ में मोबाइल था. ‘‘तुम ने ऐसी हिम्मत कैसे की?’’ कालू गुस्से से चिल्लाया और उस के गाल पर जोरदार थप्पड़ मारा. पिंकू के गाल से खून बहने लगा. सभी बच्चे डर से चुपचाप बैठ गए. ‘‘इस बस में एक बाघ का बच्चा भी है लेकिन वह तो चूहे से भी अधिक डरा हुआ है,’’ कालू टीनू की ओर देखते हुए बोला. टीनू अपने डर को छिपाते हुए बोला, ‘‘कृपया मुझे मत मारो. मुझे बहुत डर लग रहा है.’’

‘‘हा…हा… मैं ने कहा था न कि यह डरपोक बाघ है,’’ कालू हंसते हुए बोला. ‘‘हम अपनी जगह पर पहुंच गए हैं. सभी शांतिपूर्वक बस से उतर जाओ और पुरानी पहाड़ी की तरफ बढ़ो. यदि किसी ने भागने की कोशिश की, तो अच्छा नहीं होगा.’’ कालू ने चेतावनी देते हुए कहा.

सभी बच्चे बस से उतर गए और क्यू में पुरानी पहाड़ी की ओर बढ़ने लगे. ‘‘बाघ के बच्चे, तुम मेरे साथ आओ. कालू, तुम इन के साथ चलो. और हां, बंदूक मुझे दो,’’ मोटू बोला.

वह बच्चों की ओर देखते हुए बोला, ‘‘ये बच्चे इतने डरपोक हैं कि हमें हथियार की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.’’ कालू भी मुसकराने लगा. उस ने अपनी बंदूक मोटू को दे दी. टीनू मोटू को गौर से देख रहा था. जैसे ही मोटू ने पहाड़ी पर चढ़ना शुरू किया, टीनू ने उस पर पीछे से हमला कर दिया. उस ने अपने तेज पंजे गड़ा दिए. मोटू को बचने का कोई मौका नहीं मिला.

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सभी बच्चे टीनू की हिम्मत देख कर हैरान रह गए. वे भी आत्मविश्वास से भर गए और उन्होंने कालू पर हमला कर दिया. थोड़ी ही देर में दोनों बदमाशों ने हाथ खड़े कर दिए.

‘‘शाबाश टीनू,’’ टीचर रोमा गिलहरी ने उस की पीठ थपथपाते हुए कहा, ‘‘यदि तुम ने हिम्मत नहीं दिखाई होती तो हम एक बड़ी समस्या में फंस गए होते.’’ ‘‘बहादुर टीनू, तुम ने तो कमाल कर दिया,’’ पिंकू बोला.

सभी बच्चे टीनू की प्रशंसा करते हुए कह रहे थे, ‘‘हम तुम्हारा मजाक उड़ाते थे, इस के लिए हमें माफ कर देना. यदि आज तुम नहीं होते, तो मोटू और कालू हमें मार ही देते.’’ उस दिन के बाद डरपोक टीनू सब का हीरो बन गया.

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