गिट्टी गिलहरी को अपनी दोस्त पिंकी कबूतरी पर बहुत गुस्सा आ रहा था. क्योंकि वह गिट्टी को नहीं मिल रही थी. गिट्टी अकेले ही खेलने लगी. जल्दी ही बोर हो कर वह घर के हर कोने में पिंकी को ढूंढ़ने लगी. उसे न पा कर वह फिर से अपनी जगह पर आ कर खेलने लगी.

पिंकी और गिट्टी शहर के एक बहुत बड़े घर में रहती थीं. रोहित उस घर का मालिक था, जो घर में अकेला ही रहता था. वह सवेरे तैयार हो कर खाना खाता और काम के लिए निकल जाता.

वह अपने नन्हे दोस्तों पिंकी और गिट्टी को बहुत प्यार करता था. जो दिन भर इधरउधर घूमते रहते. वह अपने दोस्तों के लिए ढेर सारा खाना छत पर रख देता. पिंकी, गिट्टी और इन के दोस्त खुशीखुशी इस घर में रहते थे.

जब गिट्टी नईनई इस घर में आई थी, तो उस ने ब्रेड का एक टुकड़ा देखा. उसी समय पिंकी की नजर भी उस टुकड़े पर पड़ी. गिट्टी उस टुकड़े के पास पहले पहुंची, लेकिन पीछे हटते हुए बोली, ‘‘पिंकी, तुम यह खा लो. मैं कुछ और ढूंढ़ लूंगी.’’

‘‘ठीक है, मैं खाऊंगी लेकिन पूरा टुकड़ा नहीं. हम बांट कर खाएंगे,’’ पिंकी बोली.

उस समय से ही दोनों अच्छे दोस्त बन गए. दोनों का खेलना, खानापीना और घर में घूमनाफिरना एक साथ होने लगा. कभीकभी पिंकी उड़ने लगती और गिट्टी को उसे पकड़ने के लिए कहती. गिट्टी उस की ओर दौड़ती, तो पिंकी और ऊपर उड़ने लगती.

जब गिट्टी की बारी आती, तो वह किसी छोटी सी जगह में छिप कर बैठ जाती. पिंकी कहती, ‘‘बाहर आ जाओ गिट्टी, तुम जानती हो मैं वहां नहीं जा सकती.’’

एक दिन अचानक पिंकी उस से दूर हो गई. गिट्टी समझ नहीं पा रही थी कि पिंकी कहां चली गई. उस ने पिंकी को पूरे घर में ढूंढ़ा. फिर छत पर पहुंची तो सीढि़यों के नीचे एक घोंसला देखा, जिस में अंडों के ऊपर पिंकी शांति से बैठी थी. उस ने उसे बुलाया, पर पिंकी ने कोई जवाब नहीं दिया. गिट्टी ने अकेले खाना खाया और सो गई.

कुछ दिनों बाद पिंकी गिट्टी के पास आई और उसे ले कर अपने घोंसले के पास गई. गिट्टी 2 छोटेछोटे कबूतर देख कर हैरान रह गई.

‘‘अच्छा, तो तुम इन की वजह से व्यस्त थी. मैं बहुत खुश हूं. क्या हम इसे छत पर ले जा सकते हैं?’’ गिट्टी बोली.

‘‘अभी नहीं, गिट्टी. वे अभी बहुत पतले और कमजोर हैं. ये अभी उड़ भी नहीं सकते. इसलिए हमें थोड़ी प्रतीक्षा करनी चाहिए ताकि हम इन के साथ खेल सकें. जब ये उड़ना सीख जाएंगे, तो हमारे साथ छत पर आ जाएंगे,’’ पिंकी ने बताया.

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पिंकी बच्चों के लिए अनाज ले आई. गिट्टी भी कुछ अनाज ले कर आई और बच्चों को खिलाने की कोशिश करने लगी, लेकिन बच्चे चुप हो कर पीछे चले गए.??

‘‘लोग सोचते हैं कि बच्चे नासमझ और भोलेभाले होते हैं. वे बड़े स्मार्ट हैं. देखो, वे किस तरह वापस आ गए. वे जानते हैं कि उन की मम्मी कौन है और उसी से खाना लेंगे,’’ पिंकी ने कहा.

‘‘सच में वे बड़े स्मार्ट हैं. तुम उन्हें क्यों नहीं खिलाती हो? मैं सिर्फ उन्हें कुछ दूर से देखूंगी,’’ गिट्टी बोली. पिंकी अपने बच्चों का खयाल रखती और गिट्टी उन्हें बड़ा होते हुए देखती .

जब बच्चों के पंख बढ़े, पिंकी उन्हें बाहर ले जाने लगी और उन्हें उड़ना सिखाने लगी. गिट्टी भी साथ में होती थी. धीरेधीरे बच्चे गिट्टी को जानने लगे थे.

घर का मालिक रोहित उन्हें खाना देता और चाय ले कर छत पर आ कर बैठ जाता. वह सभी कबूतरों, और गिलहरियों को एक साथ खाते और खेलते हुए देखता और आनंद लेता था. कबूतरों के बच्चों को देखते हुए रोहित ने निर्णय किया कि

उसे भी अब शादी कर लेनी चाहिए और घर बसा लेना चाहिए. एक दिन गिट्टी ने पिंकी को बताया, ‘‘पिंकी, मैं सच में तुम्हारे दोनों बच्चों को प्यार करती हूं. उन के साथ खेलने और समय बिताने में बहुत ही अच्छा लगता है.’’

‘‘गिट्टी, तुम्हें हमेशा इस सोच में नहीं रहना चाहिए कि बच्चे हमेशा तुम्हारे साथ खेला करेंगे. जैसे ही वे बड़े हो जाएंगे, वे हमें छोड़ देंगे और दोस्तों की तलाश में कहीं उड़ जाएंगे और तब सिर्फ मैं और तुम खेलने के लिए यहां रह जाएंगे.’’

‘‘लेकिन, यह तो बहुत ही दुख देने वाला होगा. बच्चे जिन की देखभाल तुम इतनी मेहनत से करती हो, बड़े होने पर स्वतंत्र हो कर वे तुम्हें अकेला छोड़ देंगे,’’ गिट्टी ने उदासी से कहा.

पिंकी ने विस्तार से कहा, ‘‘ऐसा इसलिए कि यही प्रकृति का नियम है, गिट्टी. बच्चों के साथ मम्मीपापा भी ज्यादा स्वतंत्र और आत्मविश्वास से भर जाते हैं. वे भी अपना व्यक्तिगत जीवन खुशी से जीते हैं और एकदूसरे से मिलते हैं जब उन की इच्छा होती है. हम एकदूसरे के लिए बोझ नहीं होते हैं. न ही होना चाहिए.’’

‘‘यह तो बहुत ही अच्छी बात है,? पिंकी. बच्चे बड़े ही खूबसूरत उपहार हैं. जब तक वे हमारे साथ हैं, हम उन के हमारे साथ होने का खुशी मनाएंगे. जब वे उड़ जाएंगे, तो हम एकदूसरे के साथ खेला करेंगे,’’ गिट्टी ने कहा.

दिन बीतते गए. कबूतर के बच्चे बड़े होते गए और एक दिन उड़ गए. अब घर में सिर्फ पिंकी और गिट्टी ही चारों ओर खेलने और दौड़नेभागने के लिए रह गए थे. उन्होंने अपने बीते दिनों को याद किया.

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