मिंटी मैना जैसे ही अपने घोंसले से बाहर निकली, उस ने बिजी बाज को आकाश में घूमते हुए देखा. उसे देख कर मिंटी दूसरी तरफ चली गई. थोड़ी दूर तक उड़ने के बाद उसे लगा कि कोई उस का पीछा कर रहा है. शायद वह बिजी है, मिंटी समझ गई थी. मिंटी ने अपना रास्ता बदल लिया. अब वह गांव की ओर जाने के बजाय उलटी दिशा में उड़ने लगी. उस ने अपनी गति भी बढ़ा दी थी. उस ने अपना साहस नहीं खोया, बल्कि और तेजी से उड़ने लगी.

बिजी ने कुछ देर तक तो उस का पीछा किया, लेकिन जब मिंटी बंजर इलाके की ओर चली गई, तो उस ने पीछा करना छोड़ दिया. बिजी को पता था कि बंजर इलाकों के खुले आकाश में उड़ना उस के लिए मुश्किल है इसलिए वह वापस हो गया. मिंटी उड़ती रही. उस ने पीछे देखा नहीं कि बिजी उस के पीछे आ रहा है कि नहीं. कुछ देर बाद उस की शक्ति जवाब दे गई. वह गिर गई.

मिंटी बहुत देर तक बेहोशी की हालत में पड़ी रही. जब उसे होश आया तो उस ने खुद को एक बंजर पर्वत पर पाया. वहां कहीं पेड़पौधे का नामोनिशान नहीं था. सिर्फ इधरउधर सूखे घास दिखाई दे रहे थे. उस का गला सूख रहा था, उसे जोरों की प्यास लगी थी. किसी तरह वह उठी. उस के पंखों में दर्द था. वह उड़ नहीं सकती थी. किसी तरह वह घिसट कर एक चट्टान की छाया में पहुंची. चट्टान के नीचे थोड़ी देर आराम करने के बाद उसे राहत महसूस हुई. वह बड़बड़ाई, ‘‘यह कौन सी जगह है?’’

‘‘यह सूखा पर्वत है.’’ एक आवाज आई. उस ने चारों ओर देखा, पर कोई दिखाई नहीं दिया.

‘‘कौन है?’’ उस ने पूछा. ‘‘मैं सूखा पर्वत बोल रहा हूं,’’ जवाब आया. ‘‘एक जिंदा जीव बहुत दिनों बाद यहां आया है. बताओ, मैं तुम्हारी क्या सहायता कर सकता हूं.’’

‘‘मुझे थोड़ा पानी दे दो. मैं बहुत प्यासी हूं,’’ मिंटी बोली.

‘‘इस पर्वत पर तो पानी नहीं है,’’ पर्वत बोला. ‘‘ओह, तुम सचमुच सूखे हो,’’ मिंटी बोली.

‘‘मैं जानता हूं. लेकिन मैं शुरू से ऐसा नहीं था,’’ सूखे पर्वत ने उदास होते हुए कहा. ‘‘सचमुच?’’ मिंटी हैरान थी.

‘‘मैं तुम्हें सचाई बताता हूं. यहां चारों ओर सुंदरसुंदर पेड़ थे और हरियाली थी. पक्षी पेड़ों पर गाना गाते थे और नदी में पानी बहते थे,’’ पर्वत बोला. ‘‘तुम्हें देख कर तो यकीन नहीं होता,’’ मिंटी ने कहा.

‘‘तुम ही नहीं, कोई भी इस बात पर यकीन नहीं करेगा. लेकिन आज के ये हालात मेरी सुंदरता की वजह से है,’’ पर्वत बोला.

‘‘कैसे?’’ मिंटी ने पूछा. ‘‘अलगअलग जगहों से लोग आ कर यहां रहने लगे थे. धीरेधीरे यहां की जनसंख्या बहुत अधिक हो गई. लोगों ने अपनी जरूरतों और जगह बनाने के लिए पेड़ों को काटना शुरू कर दिया. बहुत अधिक पेड़ों के कट जाने से यहां बाढ़ आ गई,’’ पर्वत बोला.

‘‘उस के बाद क्या हुआ?’’ मिंटी ने पूछा. ‘‘जब तक हरियाली रही, लोग यहां रुके रहे. लेकिन बिना पानी और पेड़पौधों के मैं सूखने लगा और सभी लोग धीरेधीरे यहां से चले गए. मेरी जमीन बंजर हो गई. अब न तो पेड़पौधे हैं, न ही झाडि़यां. अब बस कहींकहीं सूखी घास है,’’ पर्वत ने दुखी होते हुए कहा.

‘‘मैं तुम्हारी हालत देख कर बहुत दुखी हूं, तुम ने अपनी बरबादी अपनी आंखों से देखी है. मैं अपनी जिंदगी बचाने इधर आया था. मुझे नहीं पता था कि मैं किधर जा रही हूं,’’ मिंटी बोली. ‘‘तुम अपनेआप को किस से बचा रही थी?’’ पर्वत ने पूछा.

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‘‘एक बाज मेरा पीछा कर रहा था. मैं इधर इसलिए आई क्योंकि मैं जानती थी कि बिजी बाज इधर नहीं आएगा.’’

‘‘क्यों?’’ पर्वत ने पूछा. ‘‘क्योंकि इधर पेड़ नहीं हैं और वह जानता था कि इतनी दूर तक बिना पेड़ पर बैठे मेरा लगातार पीछा नहीं कर सकता. इसलिए उस ने मेरा पीछा करना छोड़ दिया. यदि यहां कोई पेड़ होता, तो शायद मैं जिंदा नहीं बचती,’’ मिंटी ने बताया.

‘‘अच्छी बात है. इतने दिनों बाद हम किसी के काम तो आए,’’ पर्वत बोला. ‘‘ऐसा मत कहो. तुम आज भी बहुत काम के हो,’’ मिंटी बोली.

‘‘मैं आज तुम्हारे कारण जिंदा हूं इसलिए मैं तुम्हारे लिए जरूर कुछ करूंगी,’’ मिंटी बोली. ‘‘गरमी खत्म होने के बाद मैं अपने दोस्तों के साथ यहां आऊंगी,’’ वह बोली.

‘‘उस से क्या होगा?’’ पर्वत ने पूछा. ‘‘थोड़ी प्रतीक्षा करो और देखो. मैं कुछ करूंगी,

यह मेरा तुम से वादा है,’’ कह कर मिंटी ने पूरा जोर लगाया और पर्वत से विदा ले कर वहां से उड़ गई.

थोड़ी दूरी पर एक नदी थी. उस ने पेट भर कर पानी पिया. सूखा पर्वत मिंटी से बात कर बहुत खुश था. गरमी को समाप्त होने में अभी 2 महीने थे. पर्वत हर दिन मिंटी की कही बातों को याद करता. वह उस की बेचैनी से प्रतीक्षा कर रहा था.

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गरमी के खत्म होते ही बरसात का मौसम आ गया. सूखे पर्वत को गरमी से राहत मिल गई. एक दिन उस ने देखा कि मैनाओं का एक झुंड उस के ऊपर उड़ रहा है. पर्वत बहुत खुश हुआ. ‘‘हैलो, क्या तुम ने मुझे पहचाना?’’ मिंटी ने पर्वत के पास पहुंच कर पूछा.

‘‘हां, बिल्कुल. मैं तो हर दिन तुम्हें याद करता था,’’ पर्वत बोला. ‘‘मैं बारिश का इंतजार कर रही थी. बरसात के शुरू होते ही मैं यहां आ गई,’’ मिंटी बोली.

मिंटी और उस की दोस्तों ने अपने साथ लाए बीजों को पर्वत पर चारों ओर बिखेर दिए. ‘‘तुम क्या कर रही हो?’’ सूखे पर्वत ने पूछा.

‘‘हम यहां बीज डालने आए हैं. बरसात में बीज अंकुरित होंगे और जल्दी ही पेड़ बन जाएंगे.’’ ‘‘क्या ऐसा सचमुच होगा?’’ पर्वत ने पूछा.

‘‘हां, बारिश से इन बीजों को अंकुरित होने का मौका मिलेगा. हम फिर आएंगे और कुछ बीज और ले कर आएंगे. एक दिन तुम फिर से हरेभरे हो जाओगे और तुम सूखे पर्वत नहीं रह जाओगे. ढेर सारे जीवजंतु आ कर यहां रहने लगेंगे.’’ मिंटी ने वादा किया. अब मिंटी को जब भी मौका मिलता, वह अपने साथ कुछ बीज ले कर सूखे पर्वत पर पहुंच जाती.

बरसात अच्छी हुई और कई बीज अंकुरित हो गए. वे धीरेधीरे बढ़ने लगे. मिंटी ने कई प्रकार के बीज बिखेरे थे. जिन में झाडि़यां भी थीं, घास भी और फूल भी थे. मिंटी सूखे पर्वत पर अकसर जाती थी. उस ने वहां हरियाली को आते हुए देखा. सूखा पर्वत धीरेधीरे हराभरा पर्वत हो गया था. पहले वहां छोटेछोटे जीवजंतु आए. फिर बड़ेबड़े आने लगे.

मिंटी की मेहनत ने सूखे पर्वत को नई जिंदगी दी थी.?

एक दिन मिंटी अपने बच्चों के साथ वहां पहुंची. ‘‘ये मेरे बच्चे हैं. मैं इन पौधों को पेड़ बनते शायद न देख सकूं. इसलिए मैं अपने बच्चों को तुम से मिलाने लाई हूं. इस इलाके को वन बनने में थोड़ा समय लगेगा. जब ऐसा हो जाएगा, तो मेरे बच्चे और उस के बच्चे यहां आ कर रहेंगे. वादा करो कि तुम इन का ध्यान रखोगे,’’ मिंटी बोली.

‘‘मैं वादा करता हूं कि मैं इन का ध्यान रखूंगा,’’ पर्वत ने धीमी आवाज में कहा. एक छोटी मैना ने एक सूखे पर्वत को हरे पर्वत में बदल दिया था.

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