कोई ‘सी’ हो या ‘ही’ अपने गुस्से को काबू में रखना सबको आना चाहिए.क्योंकि  जिस तरह अपवाद के लिए ही सही,दुनिया में अब तक एक भी ऐसा इंसान नहीं हुआ,जो कभी मरा न हो. ठीक उसी तरह से धरती में आज तक कोई एक भी महिला या पुरुष ऐसा नहीं हुआ,जिसे जीवन में कभी गुस्सा न आता हो.जी हां,दुर्गुण होते हुए भी गुस्से का यह गुण सबमें होता है.फिर भी मनोविदों से लेकर डॉक्टरों तक की राय यही है कि इससे हर हाल में बचना चाहिए क्योंकि –

-गुस्सा हमारी परफोर्मेंस को 70%तक घटा देता है.

-हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के एक शोध अध्ययन के मुताबिक़ गुस्सैल स्वभाव के चलते प्रमोशन की  50% संभावनाएं कम हो जाती हैं.

-गुस्सा हमारी शब्दावली को बेहद जहरीली बना देता है.यह हमारी तमाम खूबियों और उपलब्धियों को बेमानी बना देता है.

-गुस्सा किसी अच्छेखासे समझदार शख्स की इमेज को भी मिनटों में ध्वस्त कर देता है.

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-कुछ देर भर के गुस्से से सालों पुराने मजबूत समझे जाने वाले संबंध भी टूट जाते हैं.

-ज़रा जरा सी बात पर गुस्सा आ जाना हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी होती है.क्योंकि इससे हम अपना प्रभावी व्यक्तित्व खो देते हैं.

-तमाम वार स्टडी बताती हैं कि गुस्सा हमारे मनोबल को ही नहीं निर्णय लेने की क्षमता को भी कम करता है.

-गुस्सा किसी की भी नजरों में हमारे सम्मान को कम कर देता है.

गुस्से को काबू में कैसे करें ?

जब लगे कि न चाहते हुए भी गुस्से के  चक्रव्यूह में फंसते जा रहे हैं तो खूब पानी पीएं.संभव हो तो एक लंबी वाक पर चले जाएं. अगर कर सकते हों तो कोई भी समय हो कसरत करना शुरू कर दें .बिना मन लगे भी सकारात्मक और क्रिएटिव काम करने लगें.कुछ देर तो बहुत बेचैनी होगी लेकिन फिर धीरे धीरे आप कूल डाउन होने लगते हैं. अगर आपको कोई म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट बजाना आता है तो बिना कुछ सोचे बजाने लगें,भले मन न लगे पर जल्द ही आपका गुस्सा कम होना शुरू हो जाएगा.छात्र हैं या अकेले रहते हैं तो अपना कमरा साफ करने लगें.दफ्तर में हों तो अपनी डेस्क साफ करने की कोशिश करें.पिक्चर देखने जाएं.किसी दोस्त को फोन घुमा दें.कोई पसंदीदा चैनल देखने लगें.मजाक और चुटकुले भी तनाव दूर करने के तरीके हैं.योगा,मेडिटेशन और कांगनेटिव तकनीक भी तनाव और गुस्से को दूर करने में कारगर होती हैं,इन्हें भी आजमाएं.

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– अमेरिकन फिजियोलॉजिकल एसोसिएशसन के मुताबिक़ ‘गुस्सा विपरीत परिस्थितियों की अभिव्यक्ति है.

– हारवर्ड में मनोविज्ञान के एक प्रोफेसर जेरोम कगान के मुताबिक़ हर व्यक्ति में अपना पैदायशी स्वभाव होता है.

– गुस्सा कई किस्म की मेडिकल समस्या का नाम है मसलन-सोशल एनग्जाइटी, फोबिया, ऑब्सेसिव-कम्पलसिव, पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस और सबसे ऊपर एनग्जाइटी डिसॉर्डर .

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