सीमा शाही सिंह, लखनऊ

पहली बार मां बनने के बाद जब बेटे को लेकर मैके आयी तो माता पिता की ख़ुशी का ठिकाना न था. अब नाती घर आया तो नानी मालिश का अवसर क्यूं गंवाती. बैठ गयीं सुबह सुबह सरसों का उबटन और तेल लेके. मालिश के बाद दूध पीते ही बेटा तो सो गया पर मां उसका एक एक अंग ध्यान से देखने लगीं. जैसे जब नया नया खाना बनाना सीखा था और थाली मां के आगे परोसते ही वो सबसे पहले जांच करतीं कि टेबल पर धूल तो नहीं , फिर थाली में दाल की कटोरी और सब्जी बायीं तरफ है या नहीं वगैरह वगैरह सब ठीक है तो अब खाने की विवेचना की जाए.

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वैसी ही कुछ जांच-परख मां ने शुरू किया , पहले कान , फिर नाक को उंगलियों से उठा के आकार देने की कोशिश की , फिर भौंहें , ललाट पर से बालों को रगड़ के पीछे किया , बंद मुट्ठी खोल के उंगलियों को सीधा करके देखा , अब पैर …….. मुझसे रहा न गया पूछ ही लिया ,’ मां क्या चेक कर रही हैं ?’

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मां ने गंभीर मुद्रा में मेरी तरफ देखा और बोली ,’ देखो सीमा अब पहली बार मां बनी हो तो ध्यान रखना , एक सृजन भगवान करता है , तो दूसरा सृजन मां करती है. बच्चा जब गोद में सो जाए तो उसके शरीर को ठीक से देखो कि कहीं कोई विकृति तो नहीं है. कान, नाक, सर,गर्दन, उंगलियों को मालिश के समय सही आकार दो’ कहकर मां बेटा गोद में देकर चली गयी. बड़े बुज़ुर्ग कई बार बातों बातों में कितनी बड़ी बात बोल जाते हैं. सच ही है ‘एक सृजन भगवान करता है तो दूसरा मां’

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