तू तो नामर्द निकला

अनिल और श्रुति का कई महीने से मिलनाजुलना था. वे दोनों इस रिश्ते को अब शादी में बदलना चाहते थे. एक दिन श्रुति ने उस से कहा कि शादी से पहले वह अनिल के साथ एक बार हमबिस्तर होना चाहती है, लेकिन अनिल शादी से पहले हमबिस्तर होने के पक्ष में नहीं था. दरअसल, श्रुति नहीं चाहती थी कि उसे शादी के बाद सैक्स संबंधों को ले कर किसी तरह की समस्या झेलनी पडे़, लेकिन जब अनिल श्रुति की दलील सुनने को तैयार नहीं हुआ तो श्रुति को अनिल की मर्दानगी पर कुछ शक होने लगा.

अब श्रुति अनिल को परखना चाहती थी. इसलिए उस ने अनिल के साथ एक दिन बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाया और दोनों एक पिकनिक स्पौट पर साथसाथ एक ही कमरे में रुके, जहां श्रुति ने अनिल के साथ छेड़छाड़ शुरू की, लेकिन इस का अनिल पर कोई असर नहीं हुआ. वह अनिल को सैक्स संबंध बनाने के लिए खुला औफर दे रही थी, लेकिन अनिल के सैक्स के नाम पर दूर भागने से उस के मन में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा.

श्रुति ने कहा कि अगर उस ने उस के साथ सैक्स करने से इनकार किया तो वह लोगों से चिल्ला कर कहेगी कि होटल के कमरे में उसे अकेला पा कर उस ने जबरदस्ती करने की कोशिश की है. आखिर अनिल भी श्रुति के सामने अपने कपडे़ उतारने को तैयार हो गया, लेकिन लाख प्रयासों के बाद भी अनिल सैक्स के मामले में फुस्स साबित हुआ तो श्रुति का गुस्सा सातवें आसमान पर था, क्योंकि उसे अनिल के नानुकुर का राज पता चल चुका था. वह बोली कि तुम अपनी नामर्दी की बात जानते हुए भी मुझ से यह बात छिपाते रहे. तुम ने प्यार के नाम पर मेरे साथ धोखा किया है.

नामर्दी छिपाने के लिए की जाती है शादी

नामर्दी के मामले में होने वाली शादियां भी अकसर धोखे से ही की जाती हैं, जिस का बाद में खुलासा होना निश्चित होता है. फिर भी नामर्दी के शिकार लोग कालेज में घंटों लड़कियों का इंतजार करने व उन पर डोरे डालने से बाज नहीं आते और जब बात प्यार व सैक्स तक पहुंचती है तब वे अपने पार्टनर के साथ सैक्स करने में आनाकानी करते हैं, ज्यादातर मामलों में शादी से पहले सैक्स संबंध स्थापित न हो पाने की वजह से उस के होने वाले जीवनसाथी को यह पता ही नहीं चलता कि जो व्यक्ति उस के साथ अपनी मर्दानगी की बड़ीबड़ी बातें कर रहा है वह बिस्तर पर जाने के बाद फुस्स साबित होगा.

रिचा के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ. डाक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही वह अपने सहपाठी से प्रेम कर बैठी और बाद में दोनों ने शादी कर ली, लेकिन जब शादी की पहली रात रिचा के लाख प्रयास के बाद भी उस का पति संबंध नहीं बना पाया तो उस ने पति से कहा कि जब उसे पता था कि वह नामर्द है तो फिर मुझे धोखे में रख कर शादी क्यों की? उस के पति राजेश ने उसे विश्वास दिलाया कि उस की यह नामर्दी अस्थायी है जो कुछ दवाओं से दूर हो सकती है, चूंकि रिचा और राजेश मैडिकल सैक्टर से ही थे, इसलिए उन्होंने इस बात को सावधानी से लिया और राजेश आज अपनी अस्थायी नामर्दी से मुक्ति पा कर सफल वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहा है.

चूंकि रिचा एक डाक्टर थी इसलिए उसे पता था कि नामर्दी क्या होती है और उस का निदान किस तरह से संभव है, लेकिन ज्यादातर नामर्दी के मामलों में समस्या को दूर नहीं किया जाता. ऐसे में स्थिति तलाक तक पहुंच जाती है या फिर महिला के अपने पति के अलावा किसी दूसरे के साथ शारीरिक संबंध स्थापित हो जाते हैं, जो आगे चल कर हत्या या आत्महत्या का कारण भी बन जाता है.

सौम्या के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ. उस ने कालेज लाइफ में एक युवक से प्रेम किया और उस की रजामंदी से शादी भी हो गई, लेकिन शादी की पहली रात जब सौम्या का पति उस से सैक्स संबंध न बना पाया तो सौम्या और उस के पति में तूतू मैंमैं हो गई और वह बोली कि जब तुम नामर्द थे तो तुम ने मुझ से प्रेम क्यों किया और यह बात छिपा कर शादी क्यों की.

शादी के दूसरे दिन ही सौम्या ने अपने सासससुर से कहा कि वह उन के बेटे से तलाक लेना चाहती है, क्योंकि वह नामर्द है.

सौम्या के मामले में उस का पति शादी न कर के अपनी किरकिरी से बच सकता था, लेकिन शादी के लिए उस ने नामर्दी की बात छिपा कर लोगों में अपनी जगहंसाई कराई, जिस की वजह से वह घोर मानसिक निराशा का शिकार हो गया.

इस तरह के तमाम मामले सामने आते हैं, जिस में युवकों द्वारा युवतियों से धोखे से शादी कर ली जाती है और बाद में पता चलता है कि उस के अंग में या तो तनाव ही नहीं आता या फिर वह सैक्स से पहले ही स्खलित हो जाता है.

शादी से पहले सैक्स संबंध

भारत में शादी से पहले सैक्स संबंध बनाना गलत माना जाता है. ऐसे में जब शादी हो जाए और बिस्तर पर जाने के बाद यह पता चले कि जिस मर्द के साथ उस की शादी हुई है वह नामर्द है तो शादी से पहले संजोए गए उस के सारे सपनों पर न केवल पानी फिर जाता है बल्कि वैवाहिक जीवन भी बरबाद हो जाता है. ऐसे में अगर युवती ने अपने होने वाले पति के साथ शादी से पहले सैक्स संबंध बनाए हैं तो निश्चित ही उस का वैवाहिक जीवन सुखमय बीतेगा, क्योंकि उसे यह पता होता है कि वह जिस के साथ शादी करने जा रही है उस के साथ सैक्स संबंध सफल होंगे या नहीं.

कालेज लाइफ के दौरान प्यार हो जाना आम बात है और ज्यादातर मामलों में प्यार शादी में बदल जाता है. ऐसे में प्यार करने वाले युवकयुवती में शादी से पहले सैक्स संबंध बन जाना आम बात है. इसे आमतौर पर अच्छा भी माना जा सकता है, क्योंकि इस तरह से शादी करने में धोखे की आशंका एकदम समाप्त हो जाती है.

शादी से पहले अपने होने वाले पति के सैक्स की जानकारी रखना हर महिला का अधिकार होना चाहिए और यह बिना सैक्स संबंध बनाए संभव नहीं है. इसलिए पुराने दकियानूसी खयालों से निकल कर युवाओं को इस की पहल करनी होगी.

नपुंसकता के कारण

सैक्स संबंध में संतुष्टि के मानदंडों का आकलन करना कठिन है, लेकिन शादी से पहले युवती व उस के परिवार वालों को चाहिए कि जिस युवक के साथ उस की बेटी की शादी होने जा रही है वे इस मसले पर उस से खुल कर बात करें और अगर कहीं शक की गुजाइंश हो तो उस युवक से दूरी बना लेनी चाहिए.

यह भी जरूरी नहीं कि पुरुष जिसे नामर्दी समझ रहा है वह असल में हो. यह उस का भ्रम भी हो सकता है, क्योंकि उस के अंग में तनाव न आना किन्हीं दूसरे कारणों की वजह हो सकता है. ऐसे में पुरुष को भी चाहिए कि एक बार सैक्स स्पैशलिस्ट से सलाह जरूर ले.

नामर्दी के ज्यादातर मामले स्थायी नहीं होते. अंग में तनाव न आना, कुछ ही क्षणों में हमबिस्तरी के दौरान पस्त हो जाना, अस्थायी नामर्दी में गिना जाता है. जिस का इलाज संभव है. अगर इस में उस की महिला मित्र द्वारा समझदारी और संयम दिखाया जाए तो पति की इस समस्या से नजात दिलाने में वह मदद कर सकती है.

सैक्स विशेषज्ञ डा. मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि नामर्दी के मामले में यह देखा गया है कि या तो पुरुष के अंग में तनाव आता ही नहीं है और किसी तरह तनाव आता भी है तो वह सैक्स संबंध बनाने से पहले ही पस्त हो जाता है. इस का मतलब जरूरी नहीं कि वह नामर्द हो. हो सकता है कि वह अस्थायी नामर्दी का शिकार हो. इस अस्थायी नामर्दी के तमाम कारण हो सकते हैं, जिन में मानसिक अवसाद, नशा, धूम्रपान, मधुमेह, हृदय रोग, हाई ब्लडप्रैशर और दवा की अत्यधिक डोज लेना भी शामिल हैं. नामर्दी का कारण अंग में चोट लगने की वजह भी होता है, जिसे समय से इलाज कर दूर किया जा सकता है. इसलिए अगर कोई अस्थायी नपुंसकता का शिकार है तो उसे किसी योग्य डाक्टर को दिखाना चाहिए.

ज्यादा उम्र के शख्स से शादी करने से बचें

आप यदि अपनी उम्र से दोगुनी उम्र के बड़े व्यक्ति से शादी का विचार मन में ला रही हैं तो इस खयाल को मन से निकाल दीजिए, क्योंकि ज्यादातर मामलों में पति की उम्र में ज्यादा अंतर होने से सैक्स ताकत जल्दी खत्म हो जाती है फिर पत्नी को या तो सैक्स के बिना तड़पते हुए बाकी जीवन काटने पर मजबूर होना पड़ता है या तो किसी गैर मर्द से संबंध स्थापित करना पड़ता है, जो ठीक नहीं है.

दूर हो सकती है नामर्दी

पुरुषों की तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियां भी नामर्दी का कारण बन सकती हैं. अगर इन समस्याओं से नजात पा ली जाए तो निश्चय ही नामर्दी की समस्या से छुटकारा मिल सकता है. डा. अकमलुद्दीन के अनुसार अगर पुरुष को लगता है कि उस के अंग में तनाव नहीं आ रहा है तो उसे डाक्टर से परामर्श लेना नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि नामर्दी के 75त्न मामलों में नामर्दी से छुटकारा पाया जा सकता है.

पुरुष की नामर्दी को दूर करने में महिला पार्टनर भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. उसे कोशिश करनी चाहिए कि पार्टनर के साथ संयम और प्यार से पेश आए और उस में मानसिक तनाव और निराशा की भावना को न उपजने दे.

यदि पति की दिनचर्या अनियंत्रित है तो उस में भी सुधार करने के प्रयास करने चाहिए, पति के अच्छे खानपान व नियंत्रित लाइफस्टाइल को बढ़ावा देना चाहिए. इन उपायों को अपना कर कुछ हद तक नामर्दी की समस्या से नजात पाई जा सकती है.

नामर्दी से छुटकारा दिलाने वाली कई दवाएं भी बाजार में उपलब्ध हैं जिन का सेवन करने से अंग में पर्याप्त तनाव आ जाता है, लेकिन दवाओं का उपयोग बिना डाक्टर के परामर्श के नहीं करना चाहिए. यह जानलेवा भी साबित हो सकता है.

नार्मदी दूर करने में वैक्यूम पंप कारगर साबित हुआ है. रक्त कोशिका संबंधित समस्या या रक्त विकार से पीडि़त पुरुषों के लिए यह उपयोगी साबित हुआ है. यह एक तरह का वैक्यूम पंप होता है जिस को पुरुष अपने अंग में डाल कर पंप करता है. इस से उस के अंग में तनाव आ जाता है और वह सैक्स के लिए तैयार हो जाता है. इस पंप का उपयोग बिना डाक्टरी सलाह के नहीं किया जाना चाहिए. सैक्स से पहले फोरप्ले व आफ्टर प्ले भी कारगर उपाय हैं. इस से जोश में वृद्धि होती है जिस से अंग में रक्त संचार बढ़ने से तनाव आ सकता है.

स्थायी नामर्दी की दशा में पुरुष को शादीविवाह जैसे पचडे़ से दूर रहना चाहिए, क्योंकि न तो यह शादी सफल हो सकती है और न ही उस का विवाहित जीवन.

अगर मातापिता की तरफ से अरेंज मैरिज का दबाव बनाया जाए तो नामर्दी के शिकार युवक को खुल कर अपनी समस्या उन्हें बतानी चाहिए, ताकि सोचसमझ कर फैसला लिया जा सके और शादी के बाद होने वाली किल्लत और जिल्लत दोनों से बच सकें.

सैक्स : भ्रम से निकलें युवा

अकसर युवा सैक्स को ले कर कई तरह की भ्रांतियों से घिरे रहते हैं. अपनी गर्लफ्रैंड से सैक्स को ले कर अपने इमैच्योर फ्रैंड्स से उलटीसीधी ऐडवाइज लेते हैं और जब उस ऐडवाइज का सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ता है तो शर्मिंदगी से किसी से बताने में संकोच करते हैं. यहां युवाओं को यह बात समझनी जरूरी है कि सैक्स से सिर्फ मजा ही नहीं आता बल्कि इस से सेहत का भी बड़ा गहरा संबंध है.

सैक्स और सेहत को ले कर कम उम्र के युवकों और युवतियों में ज्यादातर नकारात्मक भ्रांतियां फैली हैं. स्वास्थ्य के लिए सैक्स कितना अच्छा है, यह बात न इन्हें स्कूल और कोचिंग सैंटर्स में पढ़ाई जाती है और न ही पैरेंट्स सैक्स ऐजुकेशन को ले कर इतने जागरूक हैं कि अपने युवा बच्चों को सैक्स और सेहत के बीच के सही तालमेल और पोजिटिवनैगेटिव फैक्टर्स से रूबरू करा सकें.

आएदिन देशदुनिया में कहीं न कहीं सैक्स और सेहत को ले कर रिसर्च होती रहती है जिस से अंदाजा लगाना आसान होता है कि सैक्स कोई बीमारी नहीं बल्कि आप की सेहत के लिए बहुत आवश्यक है बशर्तें इस के बाबत आप को सही गाइडैंस मिली हो.

सैक्स, सेहत और भ्रांतियां

सैक्स के बाद युवतियों के हिप्स और ब्रैस्ट का वजन बढ़ जाता है. सैक्स करने से कमजोरी आती है. सैक्स करने से शरीर में खून की कमी होती है. सैक्स के दौरान भयानक पीड़ा से गुजरना पड़ता है. सैक्स करने से पढ़ाई में मन नहीं लगता. ज्यादा सैक्स करने से वजन कम हो जाता है. सैक्स करने से लड़की तुरंत प्रैग्नैंट हो जाती है. सैक्स तनाव का बड़ा कारण है, सैक्स करने से हार्टअटैक का खतरा बढ़ जाता है. सैक्स का याद्दाश्त पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, सैक्स करने से ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहता है… वगैरावगैरा.

यह तमाम भ्रांतियां आजकल के युवकयुवतियों के दिमाग में घर कर गई हैं. इन के चलते सैक्स को ले कर जो रवैया युवाओं में होना चाहिए, वह नहीं दिखता.

हर मिथक और गलतफहमी के वैज्ञानिक और मैडिकल तथ्य हैं जो इन को सिरे से खारिज करते हैं. मसलन, वजन बढ़ने वाली बात की जाए, तो सैक्सुअल रिलेशन की शुरुआत होते ही युवतियों के हिप्स और ब्रैस्ट का वजन नहीं बढ़ता है. एक तर्क यह है कि युवतियों और महिलाओं के खून में स्पर्म आत्मसात हो जाता है और वह बाहर नहीं निकल पाता, लेकिन समझने वाली बात यह है कि 2-3 मिलीलिटर स्पर्म से मात्र 15 कैलोरी बढ़ती हैं. इसलिए सैक्स को मनोवैज्ञानिक रूप से वजन बढ़ने का सही तथ्य नहीं माना गया है.

विल्किस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक और एक अन्य अमेरिकन शोध बताते हैं कि  सप्ताह में एक या दो बार सैक्स करने से इम्युनोग्लोबुलिन नाम के ऐंटीबौडी में बढ़ोतरी होती है. इसलिए रैगुलर ऐक्सरसाइज करें और हैल्दी डाइट से वजन मैंटेन करें न कि सैक्स न करने से. शोध में यह बात भी सामने आई है कि यह हार्ट के लिए बेहद फायदेमंद है. वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया कि सप्ताह में 2 बार या इस से ज्यादा बार सैक्स करने वाले पुरुषों में दिल की बीमारी होने की आशंका 45 फीसदी तक कम होती है. इतना ही नहीं सैक्स करना आप के ब्लडप्रैशर और हृदयगति के लिए भी अच्छा है. सैक्स के दौरान जितना ज्यादा स्खलन होगा उस से प्रोस्टैट कैंसर होने की आशंका उतनी ही कम होगी.

रिसर्च से यह सच भी सामने आया कि जो लोग ज्यादा तनाव में रहते हैं वे ज्यादा सैक्स करते हैं. ऐसा करने से तनाव दूर हो जाता है. यह शोध मैसाच्यूसैट्स स्थित न्यू इंगलैंड इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने किया है.

परफैक्ट टाइमिंग है जरूरी

सैक्स के दौरान अगर सेहत को भी अनुकूल रखना चाहते हैं तो युवाओं को सैक्स का समय, माहौल और मानसिक दशा पर सतर्कता बरतने की जरूरत होती है. मान लीजिए आप सैक्स रात को ढाई बजे कर रहे हैं. उस समय एक सैक्स पार्टनर को हलकीहलकी नींद आ रही है. ऐसे में जाहिर है सैक्स का भरपूर आनंद तो मिलेगा नहीं, मानसिक तनाव ही बढे़गा. सैक्स सर्वे भी स्पष्ट करते हैं कि मौर्निंग सैक्स करने वाले ज्यादा खुश रहते हैं और हैल्दी भी यानी सैक्स के साथ टाइमिंग की बड़ी भूमिका है. स्कूल या औफिस से लौट कर सैक्स करने में जो आनंद और शरीर को रिलैक्स मिलेगा उस का अनुपात सुबहसुबह तरोताजा मूड में सैक्स करने वाले कपल से अलग होगा. इस का एक कारण यह भी है कि मोर्निंग सैक्स करने वालों के शरीर में एक ऐसे तत्त्व का रिसाव होता है जो पूरे दिन प्यार बनाए रखने में लाभदायक सिद्ध होता है. हफ्ते में तीन बार सुबहसुबह सैक्स करने वालों को हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा भी कम हो जाता है.

इसी तरह अगर किसी से झगड़ा हुआ है किसी नुकसान के चलते मन अस्थिर है, तो ऐसे समय सैक्स करने से न तो शारीरिक संतुष्टि मिलती है और न सैक्स का मजा, उलटा यह गलती बारबार दोहराने में सैक्स के प्रति मन भी उचटने लगता है और उदासीनता सैक्स लाइफ के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं है.

सैक्स से रहें हैल्दी

सैक्स का सेहत से कितना गहरा रिश्ता है इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते साल  स्वीडिश सरकार ने अपने देश के नागरिकों की सैक्स लाइफ से चिंतित हो कर व्यापक पैमाने पर एक स्टडी शुरू की. 2019 में पूरी होनी वाली यह स्टडी इसलिए करवाई गई क्योंकि लोगों का सैक्स के प्रति झुकाव कम हो रहा था. वहां के हैल्थ मिनिस्टर के मुताबिक यदि स्वीडिश नागरिकों की सैक्स लाइफ तनाव और अन्य हैल्थ समस्याओं के कारण प्रभावित हो रही है तब भी यह एक राजनीतिक समस्या है.

सैक्स स्टडी कर रहे शोधकर्ताओं के मुताबिक, ‘‘सैक्स से लोगों की सेहत पर व्यापक असर होता है. जो लोग हफ्ते में कम से कम एक बार सैक्स करते हैं वे सैक्स न करने वालों की तुलना में ज्यादा खुश और प्रोडक्टिव रहते हैं.’’

सैक्स के दौरान न सिर्फ इम्यून सिस्टम बेहतर होता है बल्कि शरीर की फुरती में भी इजाफा होता है. इतना ही नहीं सही मूड, अवस्था और जगह में किए गए सैक्स से बालों, स्किन और नाखूनों को भी बेहतर बनाने में मदद मिलती है. सैक्स करने से हड्डियां और मसल्स भी मजबूत होते हैं. जो सैक्स को ले कर उदासीन रहते हैं उन्हें मीनोपोज के बाद आस्टियोपोरोसिस की समस्या का खतरा रहता है. नियमित सैक्स से एस्ट्रोजन हारमोंस का रिसाव ज्यादा होता है जो सेहत के लिए फायदेमंद होता है. सैक्स ऐक्सपर्ट मानते हैं कि युवाओं में अकसर सैक्स के दौरान एनर्जी लैवल और ऐक्ससाइटमैंट की कमी के चलते तनाव रहता है. ऐसे में वे सुझाव देते हैं कि ऐरोबिक्स शरीर को फिट रखने के लिए सब से बेहतरीन और शानदार वर्कआउट है. इस को करने से शरीर में हमेशा उत्तेजना और फुरती बनी रहेगी. ऐरोबिक्स एनर्जी लैवल को हमेशा बढ़ाए रखता है.

सैक्स, नुकसान और समाधान

जीवनयापन के लिए खाना, पानी, हवा की तरह सैक्स भी एक शारीरिक जरूरत है और इसे सक्रिय रखना युवा रहने के लिए बेहद जरूरी है. एक तरफ जहां सैक्स न करने के कई नुकसान हैं वहीं कुछ हमारी बिगड़ी आदतें ऐसी होती हैं जो हमें सेहत और सैक्स के मोरचे पर कमजोर कर देती हैं.

पहले बात करते हैं सैक्स से जुड़े नफेनुकसानों की. सैक्स न करने वाले हमेशा तनाव में डूबे रहते हैं और यह तनाव हमारे जीवन की सभी जरूरी चीजों को बुरी तरह से प्रभावित करता है. काम, पढ़ाई और निजी संबंधों में तनाव जहर का काम करता है.

जहां सैक्स के कई फायदे हैं वहीं कुछ नुकसान भी हैं. कहते हैं न कि अति हर चीज की बुरी होती है. सैक्स के मामले में यह बात लागू होती है. दिन में 2-3 बार सैक्स करना उसी को सूट करता है जिस का स्टेमिना बेहद अच्छा हो वरना इस से दिल के रोगियों के लिए मुश्किलें भी पैदा हो सकती हैं. इसी तरह जो युवा हस्तमैथुन के आदी हो जाते हैं, उन के लिए भी यह अनहैल्दी हो सकता है. गर्लफ्रैंड नहीं हो जिस की वजह से जो युवा पोर्न का सहारा लेते हैं, धीरेधीरे वे पोर्न के भी इतने आदी हो जाते हैं कि हर पल उन के दिमाग में वही चलता रहता है. इस एडिक्शन के चलते असली सैक्स के दौरान वह उत्तेजना नहीं आती जो पोर्न देखने के दौरान आती है. कई बार युवा अपने साथी दोस्तों, उन की गर्लफ्रैंड और सैक्स लाइफ के किस्से सुन कर कौंप्लैक्स के शिकार हो जाते हैं और चिड़चिडे़ और गुस्सैल होने लगते हैं. यह चीज आप के बोलचाल और व्यव्हार में भी दिखती है.

स्मोकिंग करने से भी सैक्स लाइफ बुरी तरह से बिगड़ जाती है. आजकल के युवा स्मोकिंग को फैशन और लाइफस्टाइल का हिस्सा मान कर कूल और टशन के नाम पर स्मोकिंग करते हैं. इस से सैक्स और्गन के सिकुड़ने से ले कर नपुंसक होने तक का खतरा रहता है.

मोटापा, अनियमित जीवनशैली और मानसिक तनाव जैसे कई तत्त्व सैक्स का खेल बिगाड़ सकते हैं. युवाओं को इन्ही कमियों को दूर करना होगा तभी वे युवावस्था का आनंद ले सकेंगे. याद रखें जिन युवाओं की सैक्सुअल जरूरतें समय से पूरी हो जाती हैं उन का स्वास्थ्य ऐसा न कर पाने वालों की तुलना में अच्छा होता है. इसलिए सैक्स से सेहत के तालमेल को सही बैठा कर बिंदास जिंदगी जीने के लिए कमर कस लीजिए, क्योंकि न तो जवानी बारबार आती है और न आप चिर युवा रह सकते हैं.

बुरा नहीं लाइफ पार्टनर से लड़ना

रिलेशनशिप में पार्टनर्स के बीच झगड़ा होना आम बात है लेकिन झगड़ा होने के बाद आप दोनों का ही मन उदास हो जाता है. साथ ही यह भी जरुरी है कि आप किस तरह से इस झगड़ें को सुलझाते हैं और वापस अपने रिश्ते को खुशमिजाज बनाते हैं. हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं. अच्छी और बुरी परिस्थितियों का असर आपके रिश्तों पर भी पड़ता है. लेकिन उस समय गलती चाहें किसी की भी हो झगड़ा खत्म होने के बाद आप और आपके पार्टनर सुलह कर ही लेते हैं और यही रिश्ते को मजबूत बनाता है. हालांकि अगर हम कहें कि पार्टनर से झगड़ा होना अच्छी बात है तो क्या आप मानेंगी? हम जानते हैं कि आपका जवाब ना ही होगा. लेकिन हम बता दें कि ऐसा हम नहीं कह रहे. यह दावा एक रिसर्च ने किया है. आइए जानते हैं क्या है मामला.

हाल ही में आए एक शोध में पता चला है कि किसी रिश्ते में होने पर लोग जब झगड़ा करते हैं तो उन्हें अपने मन की सभी नाराजगी को जाहिर कर देना चाहिए. अगर वो नाराजगी और गुस्से को मन में दबाकर रखते हैं इससे उनका स्वास्थ्य खराब हो सकता है साथ ही वो तनाव में रहते हैं.

शोध में कहा गया है कि जो लोग विवाद के दौरान पार्टनर से अपने गुस्से को बयां कर देते हैं वो लोग कम बीमार होते हैं. हालांकि रिसर्चर का कहना है कि इसके लिए जरुरी है कि आप विवाद से समान रूप से निपटें.

यह रिसर्च एरिजोना यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने किया है. शोध में यह भी कहा गया है कि जो लोग पार्टनर से झगड़े के बाद अपने गुस्से को दबा लेते हैं उनमें बीमारियां होने का खतरा अधिक होता है साथ ही इसके जोखिम जानलेवा तक हो सकते हैं.

इस शोध के लिए 192 कपल्स के रिश्तों पर 32 साल से अधिक समय के लिए विश्लेषण किया गया था. विश्लेषण के दौरान शोधकर्ताओं ने इस बात पर ध्यान दिया कि झगड़े के दौरान अपने गुस्से को जाहिर करने या दबाव कर रखने से पार्टनर की जिंदगी पर क्या असर होता है.

शोध के अनुसार, अगर दंपति में से पुरुष अपने गुस्से को जाहिर नहीं करते हैं और महिलाएं अपने गुस्से को जाहिर करती हैं तो पुरुषों में मौत की संभावनाएं 51 प्रतिशत और महिलाओं में मौत की संभावनाएं 36 प्रतिशत बढ़ जाती हैं. इसलिए अगली बार जब आप पार्टनर से झगड़ा करें तो बा करके सुलझाएं नाकि चुप रहें.

कहीं आपने भी तो नहीं चुन लिया गलत पार्टनर, यहां जानें

कई बार आपको लगता है कि आपका पार्टनर आपके लिए बेस्ट है, लेकिन वाकई ऐसा हो यह जरूरी नहीं है. हो सकता है कि आपका प्यार उनके लिए इतना अधिक है कि आप समझ ही नहीं पाती हैं कि वो इंसान आपके लिए सही है या नहीं या फिर आप उनके साथ अपनी पूरी जिंदगी बिता पाएंगी या नहीं. अपने पार्टनर के साथ अपनी जिंदगी आगे बढ़ाने से पहले आपको इस बात को जरूर समझ लेना चाहिए कि क्या वह इंसान आपके लिए एक बेहतर लाइफ पार्टनर है ? अगर आप इस दुविधा में हैं कि कैसे जानें कि आपने गलत पार्टनर चुन लिया है तो पढिए हमारा यह लेख.

जब पार्टनर करे किसी और की तारीफ

यदि आपका पार्टनर आपके सामने हमेशा किसी और की तारीफ करता रहता है तो उसके मन में आपके लिए कोई भावनाएं नहीं हैं. इस बात से आपको इतना समझ आ जाना चाहिए कि आपके पार्टनर को आपमे कोई खास दिलचस्पी नहीं है और आपको उनसे दूरी बना लेनी चाहिए.

भावनात्मक रूप से साथ ना देना

क्या आपका पार्टनर आपके बुरे समय में आपका साथ नहीं देता है या फिर आपको भावनात्मक रूप से सपोर्ट नहीं करता है तो इसका मतलब यह है कि वो आपसे प्यार नहीं करता है और आप अपना समय व्यर्थ कर रही हैं.

आपकी बातें भूल जाना

कई बार ऐसा होता है कि आपको आपके पार्टनर कि हर बात याद रहती है, लेकिन आपका पार्टनर आपकी बातों को याद रखने की बजाय भूल जाता है. ऐसा होना भी एक संकेत है कि आपका पार्टनर आपके लिए सही नहीं है और आपको उनसे दूरी बना लेनी चाहिए.

पार्टनर के साथ खुश ना होना

यदि आप अपने पार्टनर के साथ रहने के बावजूद हमेशा दुखी रहती हैं या फिर उनकी कोई भी बात आपको किसी प्रकार की खुशी नहीं देती तो आपके लिए यह एक संकेत है कि आप अपने पार्टनर के साथ खुश नहीं हैं और वो आपके लिए एक सही इंसान नहीं है.

खास इवेंट पर नहीं बुलाना

क्या आपका पार्टनर आपको अपने खास मौकों पर नहीं बुलाता है, जैसे- हाउस पार्टी, बर्थ डे पार्टी या डिनर पर. यदि आप ऐसा कुछ महसूस कर रही हैं तो आपको समझ जाना चाहिए कि आपको वह अब अपनी जिंदगी का हिस्सा नहीं समझते हैं और आपका उनकी जिंदगी में कोई महत्व नही है. इसलिए आपको उनके साथ अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने से पहले सोचना चाहिए.

अपने साथी को खुश करने के लिए कहें ये बातें

हर किसी को अपने बारे में अच्छा सुनना काफी अच्छा लगता है और अगर आपका साथी आपको कौम्प्लीमेंट दे तो आपका दिन बन जाता है. रिलेशनशिप को मजबूत बनाने और एक-दूसरे के लिए अपना प्यार जाहिर करने के लिए कौम्प्लीमेंट देते रहना चाहिए. तो आइए आज आपको कुछ कौम्प्लीमेंट के बारे में बताते हैं जो आप अपने पार्टनर को देकर और अपना संबंध ज्यादा गहरा कर सकती हैं.

तुम स्मार्ट हो – अपने पार्टनर की तारीफ करने से उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है. जिससे उन्हें बहुत ही स्पेशल महसूस होता है. व्यक्ति अपने साथी को आई लव यू तो कई बार कहता है लेकिन उसके काम, इमोशन के बारे में तारीफ कम करता है.

तुमने बहुत अच्छा काम किया – जब आप कोई अच्छा काम करती हैं तो इससे आपके पार्टनर का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है. कुछ अच्छा काम करने के बाद अपने साथी को जरुर बताएं. इससे वह आपके टैलेंट के बारे में जान पाएंगे. आपके साथी के अच्छा काम करने के बाद उनकी तारीफ करना ना भूलें.

तुम दयालु हो – आपके साथी को यह बात जानकर बहुत खुशी होती है कि आप उनकी दया और उदारता की भावना पर ध्यान देती हैं और उनको उस बात को लेकर कौम्प्लीमेंट भी देते हैं, जिससे उनको खुशी महसूस होती है.

थैंक यू – अपने पार्टनर की महत्व को हमेशा समझें. कौम्प्लीमेंट देने के साथ अपने पार्टनर की प्रशंसा करना जरुरी होता है. इससे आपके रिश्ते में एक-दूसरे के लिए सम्मान बढ़ता है. अपने साथी की किसी भी क्वालिटी या कोई और बात पर थैंक यू कहना ना भूलें. इससे आपके पार्टनर को ज्यादा अच्छा महसूस होगा.

बच्चों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं खिलौने

याद करिए वो दिन जब आप बच्चे थे और आपके वो दिन अलगअलग भूमिका निभाने में ही बीतते थे. लेकिन वो पुराने दिन सिर्फ मस्ती तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उससे भी कहीं ज्यादा.

आपको बता दें कि रोल प्ले करना बच्चों के विकास का मुख्य चरण माना जाता है, क्योंकि इससे बच्चा क्रिएटिव सोंचना, समस्याओं को सुलझाना, व्यावहारिक समझ, घुलनामिलना व बात करना सीखता है. यहां तक कि वह नए रोल निभाने की भी कोशिश करता है और दुनिया को अपने नजरिए से देखने लगता है. उसमें सहानुभूति व कल्पनाशीलता का भी विकास होता है.

यही नहीं इससे बच्चा विभिन्न परिस्थितियों व समस्याओं से जूझना सीखता है जिसको लेकर अकसर हम चिंतित रहते हैं. जैसे बच्चा अपनी गुडि़या को इंजैक्शन लगाते समय उसे यह एहसास कराता है कि ‘इससे तुम्हें दर्द नहीं होगा.’ जो बच्चे के डाक्टर के पास जाने के डर को दूर करता है.

इतना ही नहीं बच्चों में खेलों के जरिए रोजाना बदलाव आने के साथ वे नई चीजें जानने के साथ कुछ नया करने की कोशिश करते हैं. कल्पनाशीलता उन्हें समर्थ बनाती है जो उनके जीवन की नई दिशा देने का काम करती है.

इसी दिशा में अमेरिका की मल्टीनैशनल टोए कंपनी मेटल काफी वर्षों से प्रयासरत है ताकि वे बच्चों को क्रिएटिव बनाने की दिशा में अहम रोल अदा कर सकें.

रोल प्ले गेम्स जैसे चैटर टेलीफोन, एल ऐंड एल स्मार्ट स्टेजिस स्मार्ट फोन, ग्रे स्वीट मैनर टी सैट, मैडिकल किट न सिर्फ दिखने में स्मार्ट है बल्कि बच्चों के विकास में इनका अहम योगदान है.

जीवन एक कला है, करते रहें कुछ नया

कुशलता से कोई भी किया गया कार्य सफलता का मूलमंत्र होता है. हम और हमारा मन दोनों एक हो जाते हैं, तब जो कार्य होता है वह गुणात्मक दृष्टि से बेहतर होता है. यह तभी संभव हो पाता है जब हम अपने प्रति वफादार होते हैं. सिगरेट के पैकेट पर लिखा होता है, धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, हम उसे पढ़ते हैं, फिर भी सिगरेट जला लेते हैं. सूचना का भंडार ज्ञान नहीं होता है. ज्ञान का जन्म अनुभव की जमीन पर होता है. यह तभी संभव हो पाता है जब हम अपनेआप से प्यार नहीं करते हैं. अपनेआप के प्रति, अपने शरीर के प्रति, अपने मन के प्रति जिम्मेदार नहीं होते हैं. शरीर के प्रति सजगता ही सकारात्मक सोच के प्रति उत्साह जगाती है.

अब तक जाना गया है-अपनेआप को दुखी बनाए रखें या प्रसन्न रहें, यह आप के ही हाथ में है. मेरी प्रसन्नता जब तक बाहरी दुनिया के हाथों में होगी, मैं दुखी ही रहूंगा. बाहर जो घटता है वह निरंतर बदल रहा है. कभी मेरे अनुकूल घटता है, तो कभी मेरे प्रतिकूल. कभी मैं खुश हो जाता हूं तो कभी दुखी. हर घटना मेरी अपेक्षा के अनुसार नहीं घटती, उसे जैसे घटना था वैसे ही घटता है. मेरा सारा प्रयास बाहर जो घट रहा है, उसे बदलने के लिए होता है. ‘तो क्या मैं प्रयास करना छोड़ दूं?’ ‘नहीं, मैं जो प्रयास कर रहा हूं उस के अनुकूल कुछ होगा, प्रतिकूल भी घट सकता है या तीसरा कुछ भी घट सकता है.’ मुझे हर परिस्थितिका सामना करने के लिए तैयार रहना होगा. काम तो करना ही है. जब तक शरीर है, उसे क्रियाशील रखना है.

लेकिन यह संभव नहीं हो पाता है. अवसाद तो चौबीसों घंटे बना रहता है. जो अप्रिय है वह काले बादल की तरह आता है और चेतना पर छा जाता है. बाहर कितना भी प्रिय घट जाए, पर भीतर अगर नकारात्मक सोच का दंश रखा है तो वह उसे भी गंदा कर देगा. याद रखिए, एक क्विंटल दूध को एक कटोरी दही फाड़ देता है. नकारात्मकता की शक्ति ज्यादा घनी होती है. जब हम सही होते हैं, हमारी दृष्टि में उत्साह जगता है. तब बाहर का कांटों से भरा पथ भी हमें चलने योग्य लगता है, क्यों? ‘उत्साह बाहर से नहीं आता, वह भीतर की आंतरिक शक्ति है.’ हम जितना अधक सोचेंगे उतने ही नकारात्मक होते चले जाएंगे, उतने ही दुखी व अशांत. मैं ने यह जाना है, यह पाया है, अनावश्यक विचारणा ही अभिशाप है और उस से बचने का एक ही उपाय है, निरंतर कार्यरत रहें, और मन को पूरी तरह उसी काम में लगाएं. जानता हूं, यह कठिन है, पर असंभव नहीं है. यह तभी संभव हो पाता है जब हम इस के खतरे से सावधान हो जाते हैं.

यह संभव हो पाता है, जब :

जो उंगली बाहर उठती है वह भीतर की ओर भी जाने लगती है. हम बाहर से इतने प्रभावित हैं कि अपने भीतर झांक ही नहीं पाते हैं.

दूसरों से तुलना करना, असंगत कार्य है.

कुछ मिला है, वह आप के प्रयास से मिला है, आप की मेहनत से मिला है. आप ने छोटा मकान बनाया है, सोने के लिए तख्त भी ले आए हैं. छोटी बाइक भी है. बच्चा स्कूल जा रहा है. आप खुश तो हैं. पर नहीं, इधर मकान का उद्घाटन हुआ, अगले दिन से ही विचार खड़ा हो जाता है, आप के सहयोगी ने आप से बड़ा फ्लैट ले लिया है, वह छोटी कार भी ले आया है. उस ने महंगा वाला डबल बैड खरीदा है.

आप अपने घर का, अपनी वस्तुओं का सुख नहीं ले पाते हैं, फिर एक असंतोष की आग भी आप के भीतर जग जाती है. अरे, इतनी मेहनत से आप यहां तक आए हैं, क्या खुश नहीं हैं? अगर नहीं हैं तो आप को कोई भी खुशी नहीं दे सकता है. याद रखिए, दूसरों से कभी तुलना नहीं करें. आप जो कल थे, उस से आज बेहतर हैं. तुलना हमेशा अपनी, अपनेआप से ही करें. कल से स्वास्थ्य आज अच्छा है, आज खाना अच्छा खाया है, आज नींद अच्छी आई.

हर छोटी खुशी, बेहतर स्वास्थ्य और बेहतर खुशी देती जाती है.

सारसार सब ले लिया

यह आवश्यक नहीं है कि हम हमेशा सही ही हों. गलती हर इंसान से होती है. पर समझदारी इसी में है कि आप अपना मूल्यांकन खुद ही करें. हम जब दूसरों से बात करते हैं, सलाह लेते हैं, या वे स्वयं देने चले आते हैं तो हम उन्हें सुनें और विवेक की धरती पर उस का मूल्यांकन करें. हर सलाह को मानना भी उचित नहीं है और नकारना भी गलत है. तब मूल्यांकन अनवरत हो, पर अपनी सक्रियता को रोकना, स्थगन करना उचित नहीं है. जीवन में हर दिन यही क्रम रहता है. हमारे समाज में सलाह देने की बीमारी है. पर बहस न करें, मात्र सुन लें, काम तो आप को ही है. जो राह सही है, उसी पर चलते रहें.

इस से दूसरे की प्रतिक्रिया से आप बचे रहेंगे. आप सब को खुश नहीं रख सकते हैं पर बिना बहस के उस अवांछित की सुनें. इस से आप उन की प्रियता को बनाए रख सकते हैं. इस से आप की ऊर्जा बढ़ेगी, कार्यकुशलता बढ़ेगी. बहस तो कहीं पर भूल कर भी नहीं करना है. बोलें कम, सुनें ज्यादा, क्योंकि वे जो सलाह दे रहे हैं, ये उन के अनुभव हैं, जो स्मृति से निकल कर आए हैं. आज की समस्या नई है. इस का समाधान अतीत की जानकारी में असंभव है. सो, बहस की बहुत संभावना है. पर यहां बचना है. इसलिए विचार का स्वागत करें, विवेक पर कसें अपने सोच को, निर्णय का हमेशा मूल्यांकन करते रहें. तब निराशा की संभावना कम होती चली जाती है.

क्या लागे मेरा

सक्रिय जीवन जीने के लिए यह धारणा आवश्यक है. मैं ने पाया है, मैं जहां भी गया हूं, नकारात्मक भावनाओं की अनुगूंज सुबह से शाम तक सुनाई पड़ती है. कभी भी कोई भी काम शुरू किया, पहला उत्तर यही मिला-जिन्होंने किया उन्हें क्या मिला? असफलता की कहानियां सुनाई जाती हैं. हम इतने भयभीत क्यों हैं? हर काम शुरू करने के पहले ही हमें दूसरे की असफलता का उदाहरण दे कर डरा दिया जाता है. कहने का अभिप्राय यह है कि कुछ भी करने के लिए मन बनाने से पहले ही हमें डरा दिया जाता है.

इस नकारात्मक सोच ने हमारी मानसिक ऊर्जा को सोख लिया है. हम एक पक्षी की तरह हैं, जो नकारात्मक आकाश में उड़ रहे हैं, जिन के लिए कहीं ठिकाना नहीं है. हम इस से बचें, ऐसे लोगों से बचें. हम भूतप्रेतों से बहुत डरते हैं. सवाल होते हैं, भूत होते हैं या नहीं? पर जो निरंतर अतीत में है, दुखद स्मृतियों में है, निराशा में है, वह भूत ही तो है.

उन से बचें. वे सारी मानसिक ऊर्जा को सोख लेते हैं. मन का और पानी का स्वभाव एक जैसा होता है. दोनों नीचे की ओर बहते हैं. ऊपर उठाने के लिए जोर लगाना पड़ता है. बल लगता है. इसलिए हर प्रयास के लिए प्रयास करने से पहले, जो नैगेटिव होता है, जो नैगेटिव ऊर्जा है, उस से दूर रहा जाए. समाचारपत्रों को, टीवी न्यूज को, जहां नकारात्मकता का भंडार जमा है, उन से सुबह और रात को दूर रहा जाए. ‘हौरर शो’, ब्रैकिंग न्यूज आदि सब नकारात्मक सोच के भंडार हैं, इन से बचें. ज्योतिषियों से बचें. सुबहसुबह पंचांग देखना बंद करें. जो भविष्य वक्ता हैं, वे नकारात्मकता के व्यवसायी हैं, वे सकारात्मक खुद के लिए होते हैं, आप को अंधेरे में धकेल कर खुद उजाले में दौलत और शोहरत बटोरते हैं. दुनिया का कोई ज्योतिषी न तो अपनी न किसी अन्य की आयु का एक भी पल बढ़ा सकता है. हां, चिकित्सक अवश्य प्रयास करता है.

ये सब नकारात्मक लहरें हैं जो आप को एक कदम चलने से रोक देती हैं. प्रयत्नविमुख कर देती हैं. इन से बचाव मात्र वर्तमान में निरंतर करना है.

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