डा. मनीषा गांधी

दो शब्दों में सिमटी दुनिया मेरी क्या कहूं, क्या लिखूं समझ नहीं आ रहा. शुक्रिया शब्द तो बहुत छोटा है आपकी दी हुई परवरिश और संस्कार के सामने. पिता और बेटी का रिश्ता बड़ा अनोखा होता हैं. दोनों लड़ते भी बहुत है और प्यार भी असीमित होता है. मुझे याद है पापा जब मैं आपसे गुस्सा हो जाती थी तो खाना नहीं खाती थी और मम्मी कहती थी मत खाने दो, लेकिन आप जब तक मुझे कुछ खिला नहीं देते थे सोते नहीं थे. मम्मी कहती बहुत सिर चढ़ा रखा है इसको.

आपसे से सीखा खुद पर भरोसा करना...

आप से मैंने सीखा कैसे रिश्तों मे प्यार और अपनापन बना कर रखा जाये. आपसे सीखा विपरीत परिस्थितियों में भी कैसे हंसकर जिया जा सकता है. हमारी जिदंगी में भी एक तूफान आया था ना पापा लेकिन आपने कभी भी भगवान के ऊपर से अपना विश्वास नहीं उठने दिया और शायद इसी भरोसे की वजह से आज हम उस तूफान से निकलकर किनारे पर आ गये. उन विपरीत परिस्थितियों में भी आप सकारात्मक रहे ये बहुत बडी बात थी. आपके जैसे ही मजबूत बनाना चाहती हूं मैं पापा.

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पूरी की भाई की लव-स्टोरी...

आपने कभी भी हमें किसी तरह की कोई कमी नहीं रहने दी चाहे खुद कैसे भी रहे और हां एक बात और मुझे तो भाई की शादी के दस साल बाद पता चला की आपने भाभी की कुंडली भाई की कुंडली से मिलाने के लिए पंडित को मनाया था क्योंकि अगर कुंडली नहीं मिलती तो माताजी मना कर देती और उन दोनों की लव स्टोरी अधूरी रह जाती. पर अब तो मम्मी को भी पता है और इस बात पर मम्मी को भी बहुत हंसी आती हैं. पर वाकई भाभी है बहुत अच्छी सबको साथ लेकर चलने वाली. थैंक्स पापा हर एक कदम पर हम सभी का साथ देने के लिए. और मेरी प्यारी सी मम्मी का हमेशा ध्यान रखने के लिए.

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