क्या हो अगर डेटिंग वाला शादी के समय आ धमके? पता चला कि इधर दुलहन शादी की तैयारियों में मगन, सजधज कर शादी के लिए तैयार है और उधर पुराने मजनूजी दिल हथेली पर लिए लैला की शादी में खलल डालने पधार गए. ऐसी स्थिति लड़कों के साथ भी हो सकती है कि दूल्हे मियां साफा बांध कर शादी करने चले और पुरानी गर्लफ्रैंड आ धमके रंग में भंग डालने.

ऐसे माहौल में रिश्तेदारों की प्रतिक्रिया अलग होगी. कुछ को शायद मजा आए, कुछ तरस खाएं, लेकिन खुद शादी वाले लड़के/लड़की का क्या हाल होगा, कैसे निबटेंगे वे इस परिस्थिति से, आइए जानते हैं:

जब ऐक्स को बनाया बुद्धू

कुछ ऐसी ही मजेदार किस्सा बताती हुई शीतल कहती हैं, ‘‘मेरी शादी के समय कालेज का बौयफ्रैंड आ पहुंचा. पता नहीं उसे कहां से पता चल गया कि मेरी शादी हो रही है. हालांकि उस से मेरा ब्रैकअप हुए 3 साल हो चुके थे. पर उस को इस बात की तसल्ली थी कि मैं उस की नहीं तो और किसी की भी नहीं हुई हूं. थोड़ा चिपकू किस्म का था. मेरी पूछताछ करता रहता था. घर में किसी को भी उस के बारे में पता नहीं था. पूछो मत क्या हाल हुआ.’’

फिर तो शीतल ने अपनी प्रिय सहेली रति का सहारा लिया. शीतल कहती हैं, ‘‘रति ने मुझे बचाने के लिए मजनू के साथ झूठा स्वांग रचाया ताकि वह मुझ से ध्यान हटाए. वह बेवकूफ मुझे जलाने की सोच कर रति के आगेपीछे घूमता रहा. पर बात प्रपोज करने तक पहुंची उस से पहले ही मेरी बिदाई हो गई और रति सिर पर पैर रख वापस विदेश लौट गई.’’

बीवी ने लिया समझदारी से काम

‘‘मेरी ऐक्स गर्लफ्रैंड ने जैसे ठान लिया था कि मेरी होने वाली पत्नी के मन में शक का बीज बो कर रहेगी,’’ यह कहना है सिद्धार्थ का. वे आगे बताते हैं, ‘‘मुझे हमेशा लगता था कि वह एक बचकानी लड़की है और मेरी शादी पर अचानक टपक कर उस ने मुझे सही साबित कर दिया. एक तो बिनबुलाए आ पहुंची, ऊपर से हर फंक्शन में मेरे आसपास ऐसे मटक रही थी कि सब को संदेह होना लाजमी था. वह तो अच्छा हुआ कि मेरी पत्नी समझदार थी. उस के विश्वास के कारण मैं ने निस्संकोच दोनों का परिचय करा दिया. तब जा कर मेरी ऐक्स शांत हुई और मेरी शादी आराम से हो पाई.’’

मां ने बचाया शर्मिंदगी से

निशा की मां को उस के ऐक्स बौयफ्रैंड के बारे में जानकारी थी. जब शादी के ऐन वक्त वह हाथ में गुलदस्ता लिए आ पहुंचा तो मां ने ही मोरचा संभाला. झट उस के हाथों से गुलदस्ता लिया और उस का हाथ थामे उसे स्टेज पर अपने संग ले गई. आननफानन में नए जोड़े के साथ उस की फोटो खिंचवाई और उस को रवाना किया.

निशा थोड़ी गंभीर हो कर कहती हैं, ‘‘उस शाम यदि मां ने चौकसी न बरती होती तो क्या पता वह मेरे पति से मिल कर क्या कह देता.’’

क्यों होता है ऐसा

मनोचिकित्सक, डा. श्याम भट्ट कहते हैं, ‘‘पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में डेटिंग करना एक नूतन प्रक्रिया है. 15-20 वर्ष इस की मौजूदगी इतनी नहीं थी जितनी उग्रता व तीव्रता से यह आज हर ओर दिखाई देती है. जब इतने युवा डेटिंग करेंगे तो लाखों के दिल भी टूटेंगे.

‘‘ब्रैकअप के कई कारण हो सकते हैं जैसे जातिधर्म की दीवार, आर्थिक स्थिति, आपसी मनमुटाव, परिवार वालों की असहमति, किसी एक का चीटिंग करना, लौंग डिस्टैंस रिलेशनशिप, शादी में रुचि न होना, कोई बेहतर साथ मिल जाना, व्यक्तित्व में असमानता आदि.’’

मनोविज्ञानी के. वर्षा के अनुसार, ‘‘कई बार बचपन का प्यार परिपक्व होने पर दोस्ती या खयाल रखने तक सीमित रह जाता है. एक बार ब्रैकअप होने के बाद मूव औन करने में ही दोनों पक्षों की समझदारी और भलाई है.’’

ताकि शादी में कन्फ्यूजन न हो जाए

बेहतर यही होगा कि ब्रैकअप के समय भावनात्मक झगड़ों से बचें और सही तर्कों के अंतर्गत अलग हों ताकि भविष्य में कहीं टकरा जाने की स्थिति में एकदूसरे का सामना करना आसान रहे. पूर्व प्रेमी का शादी में शामिल होने से कई कोण सामने आ सकते हैं. जैसे:

पूर्व प्रेमी का पहले से भी अधिक आकर्षक लगना: अब आप आगे बढ़ चुकी हैं इसलिए पीछे मुड़ने से खुद को रोकना होगा.

पूर्व प्रेमी को सामने पा अंतरंग क्षणों की याद आ जाना: अपनी आंखों और चेहरे को सामान्य बनाए रखें ताकि देखने वाले भांप न लें कि आप के मन में क्या चल रहा है.

रिश्तेदारी में कानाफूसी: अपने अंदर आत्मविश्वास रखें. आप का आत्मविश्वास देख कर रिश्तेदार एकदूसरे के कानों में चुगली भले ही करें, पर कुछ भी जोर से बोलने या शादी का माहौल खराब करने की हिम्मत कोई नहीं कर पाएगा.

ऐक्स द्वारा कोई गलत हरकत करना: किसी अपने का सहारा लें, चाहे बहन हो या सहेली. उस की मदद से अपने ऐक्स को स्वयं तक पहुंचने से रोकें.

मैरिज काउंसलर, राबर्ट पारस्ले कहते हैं कि शादी का स्थान डेटिंग से कहीं ऊंचा है. डेटिंग वाले के चक्कर में वर्तमान शादी खराब नहीं करनी चाहिए.

मुंबई की काउंसलिंग साइकोलौजिस्ट, जंखाना जोशी का कहना है कि ब्रैकअप के बाद दिल टूटने की पीड़ा उतनी ही गहरी होती है जितनी किसी रिश्ते की मौत की. मस्तिष्क के एमआरआई से पता चलता है कि टूटे हुए दिल में उतना ही दर्द होता है जैसा शारीरिक चोट में होता है.

शोध बताते हैं कि इस के लक्षण ड्रग्स के समान होते हैं. इसलिए समझदारी इसी में है कि ब्रैकअप के समय परिपक्वता से काम लें. जिस से डेटिंग कर रही हैं, जरूरी नहीं कि उसी से आप की शादी हो. यह बात पहले ही साफ कर दें. अपनी अपेक्षाएं बता कर आगे बढ़ें ताकि रिश्ता तोड़ते समय सामने वाले को धोखा न लगे. यदि आप ने ब्रैकअप सफाई से किया होगा तो डेटिंग वाले का आप की शादी में आ धमकने से भी आप को नुकसान का खतरा कम होगा.

Tags:
COMMENT