नए बच्चे के आगमन के साथ पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ जाती है. मातापिता के लिए अपने बच्चे की मुसकान से अधिक कुछ नहीं होता. यह मुसकान कायम रहे, इस के लिए जरूरी है बच्चे का स्वस्थ रहना. शिशु जब 9 माह तक मां के गर्भ में सुरक्षित रह कर बाहर आता है तो एक नई दुनिया से उस का सामना होता है, जहां पर हर पल कीटाणुओं के संक्रमण के खतरों से उस के नाजुक शरीर को जू झना पड़ता है. ऐसे में जरूरी है, उस के खानपान और रखरखाव में पूरी तरह हाईजीन का खयाल रखना.

स्नान

डा. बी.एल. कपूर मेमोरियल हास्पिटल की चाइल्ड स्पेशलिस्ट डा. शिखा महाजन बताती हैं, ‘‘नवजात शिशु को शुरुआत में स्पंज बाथ कराना चाहिए, खासकर तब तक जब तक नाभिनाल गिर न जाए. आमतौर पर 4 से 10 दिनों में नाभिनाल सूख कर गिर जाती है. इस से पूर्व उसे नहलाएं नहीं, हलके गरम पानी में तौलिया भिगो कर पूरे शरीर को पोंछें. नाभिनाल को दिन में 2 बार डाक्टरों द्वारा बताए गए स्प्रिट से साफ करें. जहां तक हो सके, उस जगह को सूखा रखें. पाउडर, घी या तेल न लगाएं. ध्यान रखें कि इस में इन्फेक्शन या दर्द न हो. यदि आप को खून, लाली या पस दिखे तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें.’’

बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाए तो उसे प्लास्टिक के बाथटब में नहला सकती हैं. नहलाते वक्त त्वचा की सलवटों (स्किन क्रीजेज), अंडरआर्म्स, गले, उंगलियोें के बीच, घुटनों के नीचे और यूरिनरी पार्ट्स की अच्छी तरह से सफाई करें, पर साबुन का ज्यादा प्रयोग न करें. सिर और पौटी वाली जगह पर ही साबुन लगाएं. बच्चों को आम साबुन या शैंपू से न नहलाएं बल्कि बेबीसोप व शैंपू से नहलाएं. घर का बना उबटन व कच्चे दूध से भी बच्चे को नहला सकती हैं. पर इस बात का ध्यान रखें कि उबटन, साबुन या दूध के कण बच्चे के शरीर पर लगे न रहें. नहला कर उसे वार्मरूम में ले जाएं और सौफ्ट टौवल से धीरेधीरे पोंछते हुए पूरा शरीर सुखा दें.

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