प्यारकरना तो आसान है मगर उसे निभाना और कायम रखना बहुत मुश्किल होता है. प्यार तभी सफल हो पाता है जब दोनों एकदूसरे को अच्छी तरह समझनेजानने लगते हैं. एकदूसरे के प्रति पूरा विश्वास बना कर रखते हैं और छोटीछोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं. प्यार जब गहरा होने लगे तो कुछ बातों का खयाल जरूर रखें.

सीक्रेट करें जाहिर

जब आप एकदूसरे के साथ गहराई से जुड़ जाते हैं तब आप दोनों के बीच कोई राज नहीं रहना चाहिए. आप वास्तव में किसी के करीब हैं तो अपनी खूबियों के साथसाथ अपने व्यक्तित्व के नकारात्मक पहलू को उजागर करने से न घबराएं. भले ही एकसाथ अपनी सारी नैगेटिव बातें न बताएं मगर धीरेधीरे हर राज खोलने शुरू करें. शुरुआत में आप इस बात पर भी गौर करें कि जब आप अपने साथी को अपनी कुछ नैगेटिव बातें बताते हैं तो उस का क्या रिऐक्शन होता है. यदि वह आप से सचमुच प्यार करता होगा तो आप के  व्यक्तित्व के अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं को स्वीकार करेगा और उस के प्यार में कोई कमी नहीं आएगी.

दिल की बातें

कई बार जिसे हम चाहते हैं, उस से अपनी अपेक्षाओं और मन में चल रही उलझन को शेयर नहीं कर पाते. संभव है कि आप का पार्टनर कुछ समय से आप को औफिस के बाद फोन नहीं कर रहा है, जबकि पहले वह हरदिन एक घंटे बात करता था. ऐसे में आप महसूस करेंगी कि जैसे अब उस का प्यार कम हो गया है. वह आप से बोर हो गया है और आप इस रिश्ते को ले कर इनसिक्योर फील करती हैं. यह सोच गलत है. आप साफतौर पर उसे अपनी इच्छा से अवगत कराएं कि औफिस के बाद आप उस के फोन का इंतजार करती हैं. हो सकता है कि वह अपने किसी प्रोजैक्ट में व्यस्त होने से ऐसा नहीं कर पा रहा. इस तरह बेवजह दूरी बनाने से अच्छा है कि बात स्पष्ट रूप से कर ली जाए.

पार्टनर पर हक न जताएं

अकसर हम सोचते हैं कि जिसे हम प्यार करते हैं उस का सारा वक्त सिर्फ हमारे लिए है, पर ऐसा नहीं होता. यह समझना बहुत जरूरी है कि आप का पार्टनर भी इंसान है और उस की अपनी अलग जिंदगी है. अपनी पसंद, अपने शौक और रिश्तेनाते भी हैं. हर समय अपने पल्लू से बांध कर रखने या अपनी इच्छानुसार उसे चलाने के बजाय उसे भी थोड़ी स्वतंत्रता और स्पेस दें, ताकि वह खुद को बंधा महसूस न करे और खुल कर आप के साथ एंजौय करे.

झगड़ा प्यार से सुलझाएं

रिश्ते की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि आप उस झगड़े को कैसे सुलझाते हैं. यह नियम बनाएं कि जब भी झगड़ा हो, दोनों में से एक शांत रहे, चुप हो जाए. कुछ देर के लिए एकदूसरे से दूर हो जाएं. 24 घंटे के अंदर उस मुद्दे पर फिर दोबारा डिस्कशन जरूर करें. क्रोध के समय झगड़ा सुलझाने का प्रयास उलटा असर दिखाता है, इसलिए कुछ घंटे बाद जब दोनों का दिमाग शांत हो जाए तब उस बात पर विचार करें.

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