मिनल हमेशा अपने दोनों टीनेजर्स बच्चों को कहती रहती है कि घर में बड़ा कोई भी आये, उसके पाँव
छुओ या फिर उनसे बातचीत करों, कई बार तो बच्चे ऐसा करते है, पर कई बार वे इसका विरोध
करने लगते है, जो मिनल को बुरा लगता है.

असल में आज के बच्चों की परवरिश अलग तरीके से होती है, क्योंकि वे एकाकी परिवार में रहते है, जहाँ दादा-दादी या नाना-नानी नहीं होते, या बीच-बीच में वे आते जाते है, ऐसे में उनके साथ गहरा रिश्ता नहीं बन पाता. वे उनकी आदतों या बातों से परिचित नहीं होते. उनके साथ वे किसी भी रूप में सहज नहीं हो पाते. उनके लिए दादा या चाचा एक आम व्यक्ति से अधिक कुछ भी नहीं होता. इसके अलावा कई बार बड़ों का व्यवहार बच्चों को पसंद नहीं होता. बड़े अगर खुद को मेंटर समझने लगे, तो बातें बिगड़ती है.

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