जीवन एक आशीर्वाद है, इसे ‘सौ बरस तक जिओ’. सौ बरस तक जीने का लक्ष्य बना कर जीने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है. सभी अपने लिए बेहतर जिंदगी का सपना देखते हैं.

यदि आप खुद पर विश्वास रखते हैं, अपने जीवन में होने वाली संभावनाओं के प्रति जागरूक और प्रयत्नशील हैं तो खुश रहने की खोज में आप को सफलता जरूर मिलेगी. निम्नलिखित बातें अजीब जरूर लगेंगी किंतु उन पर विचार कर के उन के रहस्य को जानने की कोशिश करें :

– हर सही निर्णय उचित कार्यवाही के अभाव में बेकार है.

– असफलता आप के लिए लाभदायक हो सकती है.

– अपनी सोच के दायरे को विस्तृत और व्यावहारिक बनाएं.

– विचारों पर नियंत्रण रखें, संवेदनशील हों किंतु सीमा के भीतर. मुद्दा बना कर छोटीछोटी बातों में तुनकमिजाजी ठीक नहीं होती है.

– उत्तम भविष्य के निर्माण के लिए व्यवस्था और कार्यप्रणाली सुनिश्चित करें.

– मन की दुविधा को खत्म करना होगा.

– अपने मन को टटोलना होगा और जानना होगा कि वह क्या चाहता है.

– जीवन में संतुलन बना कर चलना जरूरी.

– अपने जीवन के प्रति ईमानदारी बरतें.

– बाहरी लालच, दबाव में न आएं.

– दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दूसरों की नकल करने वाले कभी आगे नहीं बढ़ पाते.

अपनी मानसिकता को परखें और संभालें

यहां उन बातों और विचारों का उल्लेख जरूरी है जो बातें मानसिकता को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करती हैं. अच्छी मानसिकता स्वस्थ शरीर की प्राथमिक आवश्यकता है. जिस शरीर को सारी जिंदगी हमारे साथ रहना है, उसे स्वस्थ रखना हमारा कर्तव्य है.

सही खानपान, कसरत, साफसुथरा जीवन ऐसी बातें हैं जिन की अहमियत किसी से छिपी नहीं है. बुरी आदतें और व्यसन, जैसे तंबाकू व सिगरेट का सेवन, शराब, जरूरत से ज्यादा भोजन या फास्टफूड, ड्रिंक्स आदि ने हमारी दिनचर्या में शामिल हो कर शरीर को खोखला कर दिया है.

शीघ्र ही इन बुरी आदतों को छोड़ कर जीवन को व्यवस्थित करना चाहिए. कहते हैं, ‘शुभस्य शीघ्रम’.

प्रसिद्ध दार्शनिक बर्ट्रेड रसेल का कथन है कि खुशी एक मानसिक स्थिति है. यह बाहरी चीजों से नहीं मिलती है. इसलिए मानसिक स्थिति को स्वस्थ बनाइए.

स्टिमुलस रेसपौंस सिद्धांत

मशहूर प्रबंधन विशेषज्ञ और लेखक हैरोल्ड जे लेविट का मानना है कि व्यवहार इस बात पर आधारित होता है कि आप कैसा स्टिमुलस (प्रेरक तत्त्व) देते हैं चूंकि लोगों की प्रतिक्रिया (रैसपौंस) उस के अनुसार होती है. जैसे आप एक मित्र का स्वागत मुसकरा कर करते हैं तो आप ने अच्छा स्टिमुलस दे कर उसे प्रेरित किया. प्रतिक्रिया भी अच्छी होगी. वह दोगुने उत्साह के साथ आप से मिलेगा. बुझे मन से मिलेंगे तो उस की प्रतिक्रिया भी ठंडी होगी.

इस दृष्टिकोण से मधुर संगीत सुनना, पार्टियों में शामिल होना, खेलकूद में भाग लेना, सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सेदारी, आउटिंग, पिकनिक, सिनेमा आदि खुशनुमा जिंदगी के लिए अहम भूमिका निभाते हैं.

ट्रांसैक्शनल एनालिसिस

डा. एरिक बर्न और टौमस ए हैरिस ने यह सिद्धांत व विचार दिया है जिस के अनुसार व्यवहार का विश्लेषण करने के लिए हम 3 मानसिक स्थितियों को जानने का प्रयत्न करें. ये हर मनुष्य में पाई जाने वाली स्थितियां हैं, चाइल्ड ईगो स्टेट, एडल्ट ईगो स्टेट और पेरैंट ईगो स्टेट.

जब कभी कोई आप के संपर्क में आ कर आप से बात करता है, व्यवहार करता है, तो मुख्य रूप से वह इन तीनों में से एक ईगो स्टेट का इस्तेमाल कर रहा होता है. सही व्यवहार से दूसरे व्यक्ति की समझ या प्रतिक्रिया से या तो मतभेद पैदा होता है या अंडरस्टैंडिंग. इसे समानांतर और क्रौस ट्रांसैक्शन कहते हैं.

सही प्रतिक्रिया समानांतर व्यवहार और गलत प्रतिक्रिया क्रौस ट्रांसैक्शन के परिणामस्वरूप होती है. उदाहरण के लिए आप दूसरे व्यक्ति से क्रोध में बात करते हैं तो आप पेरैंट ईगो स्टेट से दूसरे की चाइल्ड ईगो स्टेट से बात कर रहे हैं. वह भी क्रोधित प्रतिक्रिया देता है यानी वह अपनी पेरैंट ईगो स्टेट से आप की चाइल्ड ईगो स्टेट से बात करता है. परिणाम होता है झगड़ा या मिसअंडरस्टैंडिंग. इस सिद्धांत को जानने वाले उचित व्यवहार करने में सक्षम हो जाते हैं.

प्रबंधन विशेषज्ञों के विचार

मशहूर लेखक और प्रबंधन विशेषज्ञ डा. स्टीव कूपर ने अपनी पुस्तकों में पौजिटिव नजरिया अपनाने के लिए निम्नलिखित बातों का उल्लेख किया है :

– यह जरूरी है कि आप लोगों के प्रति  रचनात्मक रवैया रखें और सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करें.

– आप जो बात करें वह काल्पनिक न हो कर, सत्य पर आधारित हो, व्यर्थ की गौसिप न हो.

– बात करने से पहले महत्त्वपूर्ण तथ्यों और जानकारी को इकट्ठा करें और सौहार्द स्थापित करने के उद्देश्य से व्यवहार करें.

– क्रोध पर नियंत्रण रखें. क्रोध उन्नति की राह में बाधक होता है.

– जैसे आप शरीर को आराम देते हैं, मन और मस्तिष्क को भी आराम दें.

– आत्मनिर्भर, खुश और संतुष्ट रहने की आदत डालें.

– आप की बातचीत और व्यवहार का मुख्य उद्देश्य सामंजस्यपूर्ण और अंडरस्टैंडिंग पैदा करना होना चाहिए तभी ये सब बातें अर्थपूर्ण लगेंगी.

– यदि किसी की कोई बात आप को परेशान करती है तो भी पौजिटिव सोच के जरिए अपना मानसिक संतुलन बनाए रखें.

– अपने बारे में स्वस्थ विचार रखिए. दूसरों की नकारात्मकता से इसे प्रभावित न होने दें.

प्रबंधन विशेषज्ञ शिव खेड़ा के अनुसार, ‘‘यह युग ‘सरवाईवल औफ द फिटैस्ट’ का है. जो गुणी और साहसी है वही जीवित रहने के युद्ध में जीतता है.’’

मशहूर चित्रकार विन्सेंट वानगाग के इस कथन को याद रखें, ‘‘अगर हम सच्चे हैं तो हमारे साथ भलाई के सिवा कुछ हो ही नहीं सकता. भले ही हमारे हिस्से में दुख और घनघोर निराशाएं ही क्यों न आएं, जीवन को पूरे जोशोखरोश के साथ निर्बाध रूप से जीने का ही नाम जिंदगी है.’’

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