क्या आप पूरे दिन में 15-16 घंटे फोन के साथ बिताते हैं? क्या आप सुबह होते ही व्हाट्सऐप या फेसबुक चैक करने लग जाते हैं? अकसर आप को अपने फोन की घंटी बजती हुई सुनाई पड़ती है, लेकिन जब आप फोन चैक करते हैं तो ऐसा कुछ भी नहीं होता. अगर आप की ऐसी आदत है तो उसे जल्द से जल्द बदल लीजिए, क्योंकि अगर आप इसी तरह सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर समय बिताते रहे तो आप गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं. मसलन, अगर आप फेसबुक, ट्विटर या व्हाट्सऐप पर सारा दिन समय खराब करते हैं, तो आप को डिप्रैशन, बैक प्रौब्लम, आंखों में परेशानी की समस्या से जूझना पड़ सकता है.

आइए, आप को सोशल नैटवर्किंग के फायदे और नुकसान से रूबरू करवाते हैं. शुरुआत फायदे से करते हैं:

हर चीज आसान

फेसबुक हो या फिर व्हाट्सऐप इस ने लोगों को एकदूसरे के काफी करीब ला दिया है. अगर आप का कोई दोस्त या फिर रिश्तेदार सात समंदर पार रहता है तो आप फेसबुक या फिर दूसरे नैटवर्किंग साइट्स के जरीए उस से बातचीत कर सकते हैं, हालचाल पूछ सकते हैं. आप फ्री में विदेश में रहने वालों से बात करते हैं. जरा याद कीजिए वह समय जब विदेश में रहने वाले किसी रिश्तेदार से आप को बात करने के लिए 40 से 50 रुपए प्रति मिनट खर्च करने पड़ते थे. लेकिन अब सोशल नैटवर्किंग से हर चीज आसान हो गई है.

बिजनैस का अड्डा हैं नैटवर्किंग साइट्स

आजकल यह ट्रैंड काफी देखने को मिल रहा है. बिजनैसमैन अपने प्रोडक्ट की डिटेल फेसबुक पर डाल देते हैं या फेसबुक पर अपना पेज बना लेते हैं. अगर किसी को प्रोडक्ट पसंद आता है तो वह उसे खरीद लेता है, जिस का फायदा बिजनैसमैन को मिलता है. अगर सोशल नैटवर्किंग साइट्स को यूज सोचसमझ कर अपने फायदे के लिए किया जाए तो इस से काफी प्रौफिट भी हो सकता है. बड़ीबड़ी कंपनियां आजकल फेसबुक या फिर ट्विटर पर ऐड के जरीए काफी पैसा कमा रही हैं.

जानकारी साझा करने का बेहतर प्लेटफौर्म

अगर आप किसी तरह की जानकारी या फिर कोई बात लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं तो सोशल नैटवर्किंग आप के लिए बेहतर प्लेटफौर्म हो सकता है. आजकल लोग किसी तरह की परेशानी या फिर कोई बात लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं तो सोशल नैटवर्किंग साइट पर डाल देते हैं, जिस से बात तुरंत जंगल की आग की तरह फैल जाती है और उन्हें लोगों से तुरंत प्रतिक्रियाएं भी मिल जाती हैं.

सिर्फ फायदों से भरपूर नहीं हैं नैटवर्किंग साइट्स. इन के कुछ नुकसान भी हैं. आइए, अब आप को सोशल नैटवर्किंग साइट्स से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताते हैं.

नहीं रह जाती कोई प्राइवेसी

अकसर लोग सुबह उठते ही फोन का चेहरा देखते हैं. दिन भर फोन पर बतियाने के बावजूद रात को भी फोन पर लगे रहते हैं. कभी फेसबुक चैक करते हैं तो कभी व्हाट्सऐप. सोशल नैटवर्किंग साइट पर कभी स्टेटस डालते हैं तो कभी अपनी कोई जानकारी अथवा फोटो, जिस से सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर हमारी कोई प्राइवेसी नहीं रह जाती. कोई भी, कभी भी हमारे बारे में सर्च कर सकता है. जैसे, हम क्या करते हैं? कहां रहते हैं? कौनकौन हमारे करीब है? क्या यह सही है? खुद सोचिए और तय कीजिए, क्या नैटवर्किंग साइट्स पर इतनी जानकारी डालना उचित है?

बीमारियों को न्योता

एक रिसर्च के मुताबिक सोशल नैटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल करने वाले कम से कम 16-17 घंटे उसी में बिताते हैं. रात के अंधेरे में फोन पर चैट करते हैं. हर वक्त औनलाइन रहते हैं. कम से कम हर 10-15 मिनट में अपना फोन बारबार चैक करते रहते हैं, जिस से आंखें खराब हो सकती हैं. अंधेरे में जब फोन का इस्तेमाल करते हैं तो हमारे देखने की क्षमता कम हो जाती है. पूरा दिन सिस्टम पर फेसबुक खोल कर बैठे रहने या स्काइप पर वीडियो चैट करते रहने से रीढ़ की हड्डी पर फर्क पड़ता है. लगातार फोन का इस्तेमाल कर के डिप्रैशन के शिकार भी हो सकते हैं.

वक्त की बरबादी

कई बार हम अपना जरूरी काम छोड़ कर फोन पर मैसेज चैक करने लग जाते हैं. मैसेज चैक करतेकरते कब लंबी चैट हो जाती है, इस का पता भी नहीं चलता. इस से सिर्फ वक्त की बरबादी होती है. लिहाजा फोन को कम वक्त दें.

बिगड़ रहे हैं बच्चे

पहले बच्चे दादादादी के साथ वक्त गुजारते थे. अपने फ्रैंड्स के साथ शाम को खेलते थे. लेकिन अब बच्चे अपने में सिमट रहे हैं. उन के पास किसी के लिए वक्त ही नहीं है. इस की सब से बड़ी वजह है मांबाप, जो वक्त से पहले ही बच्चे को सारी चीजें मुहैया करा देते हैं.

लैपटौप, महंगे फोन मिलने से बच्चे पूरा दिन उन्हीं में लगे रहते हैं. फोन या लैपटौप पर पोर्न मूवीज देखने लगते हैं, जिस के दुष्परिणाम जल्द ही मांबाप के सामने आने लगते हैं.

कैसे करें सही इस्तेमाल

– कम से कम करें फोन इस्तेमाल.

– हर वक्त न रहें औन लाइन.

– पहले जरूरी काम निबटाएं.

– अपनों को वक्त दें, बजाय काल्पनिक दोस्तों के साथ बतियाने में समय बरबाद करने के.

– हर चीज फेसबुक पर न डालें.

– निजी चीजों को सोशल नैटवर्किंग साइट से दूर ही रखें.

– बारबार फोन चैक न करें.

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