जोश, जूनून और होश की अगर कहीं मिशाल होगी तो विश्व में दो नाम सबसे पहले लिए जाएंगे. एक, चे गुएरा और दूसरा, भगत सिंह. दोनों ने अपने अपने समय में वो कर के दिखाया जो आज की भावी पीढ़ी मन ही मन सोच कर प्रेरित तो होती है लेकिन उस राह चलने पर पावं फटने लगते है. लेकिन बात यहाँ न तो भगत सिंह की है, न चे ग्वेरा की. यह कहानी है प्रवासी मजदूर महेश जेना की. जिस की उम्र मात्र 20 साल की है. एक ऐसा माइग्रेंट मजदूर जिस ने 1700 किलोमीटर की लम्बी यात्रा एक साइकिल में महज 7 दिन में पूरी की.

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