हमारा समाज सदियों से पुरुषप्रधान रहा है. इस प्रधानता की देन के लिए केवल समाज ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि कुदरत ने भी औरत की शारीरिक संरचना ऐसी की है कि वह पुरुष की अपेक्षाकृत कमजोर है. अत: यह स्पष्ट है कि स्त्री को सुरक्षा के लिए पुरुष के सहारे की आवश्यकता है और बेहतर संरक्षक ही सुरक्षा दे सकता है, इसलिए पुरुष का स्त्री से हर क्षेत्र में बेहतर होना आवश्यक है, यह सर्वविदित है. लेकिन पुरुष कई बार संरक्षक के स्थान पर भक्षक का रूप भी ले लेता है. यह बात दीगर है कि उस के लिए खास तरह के व्यायाम कर के या ट्रेनिंग ले कर उस से औरत मुकाबला कर सकती है, लेकिन यह अपवाद है. इसीलिए पैदा होने के बाद पहले पिता के, फिर भाई के, फिर पति के और बुढ़ापे में बेटे के संरक्षण में रह कर वह स्वयं को सुरक्षित रखती है.

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