पिछला भाग पढ़ने के लिए- सैलिब्रेशन: भाग 3

रसिका नतमस्तक थी. बोली, ‘‘गुरूजी, अब आप ही मुझे बचाइए... वैभव दूसरी स्त्री के चक्कर में न पड़े.’’

‘‘बच्चा, मैं ने दिव्य दृष्टि से देख लिया है. वह रोशनी तुम्हारी जिंदगी में अंधेरा करना चाहती है.

‘‘यह भभूत ले जाओ... वैभव को खिलाती रहना. वह रोशनी की ओर अपनी नजरें भी नहीं उठाएगा.’’

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