अपना अपना मापदंड: क्या था शुभा का रिश्तों का नजरिया

रिश्तों को मापने का नजरिया हर इनसान का अलगअलग होता है. जरूरी नहीं कि यह नजरिया औरों के अनुकूल भी हो. रिश्तों को ले कर ऐसा ही कुछ अलग नजरिया था शुभा का, जिस ने रिश्तों को सिर्फ ढोया ही था, उन्हें कभी जीया ही नहीं.

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