अहंकार के दायरे: क्या बेटे की खुशियां लौटा सके पिताजी

बाबूजी ने स्वयं को झूठे अहंकार के दायरे में रख कर न केवल अपने जीवन में दुखों का समावेश किया बल्कि अपने बेटे की खुशियां तक ताक पर रख दीं.

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