अपने जैसे लोग: नीरज के मन में कैसी थी शंका

जब जब मैं कोठियों में रहने वाले अमीर पड़ोसियों को नजदीक से समझने की कोशिश करती, तभी नीरज एक नई शंका जता बैठता.

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