लेकिन अचानक उसके कानो में अविनाश की आवाज़ पड़ी.वो कह रहा था ,” अरे हम लोग रास्ते मे जब रुकेंगे तब तुम लोगों को जो खाना है खा लेना, मुझे भी यहां खाने में मजा नहीं आया ,रोटियां तक गर्म नहीं थी “.

अब तक तो रिया सब बर्दास्त कर रही थी लेकिन जब उसने अपने होने वाले पति के मुंह से यह शब्द सुना तो जो रिया गाड़ी में बैठने जा रही थी ,वो वापस मुड़ी .............. गाड़ी के दरवाजे को जोर से बंद किया और घूंघट हटा कर अपने पापा के पास पहुंची .

उसने अपने पापा का हाथ अपने हाथ में लिया और बोली पापा ,”मैं इनके साथ पूरी जिंदगी नहीं बिता सकती . मैं ससुराल नहीं जा रही हूं. मुझे यह शादी मंजूर नहीं है. यह शब्द उसने इतनी जोर से कहे कि सब लोग हक्के बक्के रह गए .सब उसके नजदीक आ गए. रिया के ससुराल वालों पर तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा. मामला क्या था किसी को समझ में नहीं आ रहा था?

तभी रिया के ससुर राधेश्याम जी ने आगे बढ़कर रिया से पूछा,” लेकिन बात क्या है बहू? शादी हो गई है विदाई का समय है अचानक क्या हुआ क्यों तुम शादी को नामंजूर कर रही हो ?
अविनाश भी हक्का-बक्का रह गया उसने रिया के पास आकर कहा कि अब तक तो सही था अब तुम ऐसे क्यों कह रही हो , आखिरी वक्त पर ऐसा क्या हुआ कि तुम ससुराल जाने को मना कर रही हूं?
रिया ने अपने पिता का हाथ पकड़ रखा था. रिया ने अपने ससुर से कहा ,” पिताजी मेरे पापा ने अपने सपनों को मारकर हम दोनों भाई –बहन को पढ़ाया लिखाया व काबिल बनाया है. आप जानते हैं कि एक पिता के लिए एक बेटी क्या मायने रखती है.हो सकता आप ये ण समझ सके क्योंकि आपकी कोई बेटी नहीं है.

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