जन्म से दृष्टिहीन परंतु रूप सौंदर्य की धनी सुनयना की सुंदरता पर मोहित हो कर शंकर ने उस से विवाह तो कर लिया था लेकिन उस की दृष्टिहीनता का फायदा उठा कर अपना कैरियर संवारने के लिए उस ने सुनयना को मात्र भोग की वस्तु बना कर रख दिया था.
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