पिछला भाग पढ़ने के लिए- चिराग कहां रोशनी कहां भाग-2

सुधा को धरम की यह दलील अच्छी नहीं लगी थी, फिर भी वह चुप रह गई. सुधा के टैस्ट्स की रिपोर्ट आ गई थी. डाक्टर ने बताया कि सुधा के गर्भाशय में कुछ ऐसी बीमारी थी कि वह मां बनने में अक्षम है.’’

सुधा के चेहरे पर घोर निराशा छा गई. डाक्टर ने कहा, ‘‘आप को इतना निराश होने की जरूरत नहीं है. आप दोनों संतान के लिए आधुनिक तरीके अपना सकते हैं.’’

‘‘कौन सा तरीका डाक्टर?’’ सुधा ने जिज्ञासा जाहिर करते हुए कहा.

‘‘अगर आप के पति चाहें तो सैरोगेट मदर की मदद से आप बच्चा पा सकती हैं. आप के पति ने उस समय अपना टैस्ट नहीं कराया था. बस, आप के पति का एक टैस्ट करना होगा. उम्मीद है, नतीजा ठीक ही होगा. तब बच्चा किसी सैरोगेट मदर के गर्भ में पलेगा.’’

‘‘नहीं, मु झे यह तरीका ठीक नहीं लग रहा है.’’

‘‘क्यों?’’ डाक्टर ने पूछा.

‘‘डाक्टर, अभी हम चलते हैं. बाद में ठीक से सोच कर फैसला लेंगे,’’ धरम ने कहा और दोनों डाक्टर के क्लिनिक से निकल पड़े.

रास्ते में धरम ने सुधा से पूछा, ‘‘आखिर सैरोगेट मदर से तुम्हें क्या परेशानी है?’’

‘‘आप का अंश किसी गैर औरत की कोख में पले, मु झ से बरदाश्त नहीं होगा?’’

‘‘यह क्या दकियानूसी की बात हुई. वह औरत हमारी मदद करेगी, हमें तो उस का कृतज्ञ होना चाहिए.’’

‘‘जो भी हो, मु झे तो वह सौतन लगेगी.’’

‘‘क्या पागलपन की बात कर रही हो? मेरा उस से कोई शारीरिक संबंध नहीं होगा.’’

‘‘फिर भी, मु झे मंजूर नहीं है.’’

‘‘तब दूसरा एकमात्र रास्ता है कि हम किसी बच्चे को गोद ले लें,’’ धरम ने थोड़ा नाराज होते हुए कहा.

‘‘हां, इस पर मैं सोच कर बता दूंगी.’’

इधर, जेम्स और इहा दोनों ने मिल कर चेन्नई में अपना एक लैब खोला था. यह लैब शहर में मशहूर हो गया था. कुछ महीने बाद सुधा और धरम दोनों ने एक बच्चा गोद लेने का फैसला लिया. धरम तो मन ही मन खुश था कि अब उसे अपने टैस्ट कराने की जरूरत नहीं रही. वे अनाथालय गए. धरम ने एक बच्चे को देखा और सुधा से पूछा, ‘‘यह ठीक रहेगा न?’’

‘‘मैं तो एक लड़की चाह रही थी.’’

‘‘ठीक है, तुम जैसा कहो वही होगा.’’

अंत में अनाथालय से एक बच्ची को अडौप्ट करने पर दोनों तैयार हुए. उस के लिए उन्होंने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर अनुमति ले ली. उस बच्ची को घर लाने से पहले धरम ने उस का पूरा ब्लड टैस्ट कराने की इच्छा व्यक्त की तो सुधा ने पूछा, ‘‘इस बच्ची का इतने सारे टैस्ट क्यों कराना चाहते हो?’’

‘‘अकसर अनाथालय में लावारिस या नाजायज बच्चे आते हैं, किसी वेश्या का बच्चा भी हो सकता है जिस में बुरे रोग की आशंका होती है.’’

बच्ची का सैंपल जिस लैब में भेजा गया वह इहा की लैब थी. सुधा और धरम दोनों बच्ची की रिपोर्ट लेने लैब गए थे. उन्होंने रिसैप्शन पर बैठी महिला से कहा, ‘‘मु झे अपनी बच्ची के ब्लड टैस्ट की रिपोर्ट चाहिए.’’

‘‘प्लीज, बच्चे का नाम बताएं,’’ रिसैप्शनिस्ट ने पूछा.

‘‘आशा पाठक,’’ सुधा बोली.

‘‘मैम, आप को तो 2 बजे के बाद बुलाया गया था, अभी तो 12 बजे हैं. टैस्ट्स हो चुके हैं. रिपोर्ट भी तैयार है. इंचार्ज के पास सिग्नेचर के लिए भेजा हुआ है. कुछ समय लगेगा आने में. अभी वे अपने बेटे के साथ व्यस्त हैं.’’

‘‘क्या उन का बेटा भी यहीं काम करता है?’’

‘‘नो, वह तो 15-16 साल का होगा. उस ने स्कूल बोर्ड की परीक्षा में पूरे स्टेट में टौप किया है. उन का चैंबर सैकंड फ्लोर पर है.’’

‘‘आप इंचार्ज से मेरी बात कराएं. मैं उन्हें बधाई भी दे दूंगा और शायद वे साइन कर चुकी होंगी या जल्दी साइन कर दें. हम लोग काफी दूर से आए हैं.’’

रिसैप्शनिस्ट ने लैब इंचार्ज से फोन पर पूछा, ‘‘मैम, आशा पाठक की रिपोर्ट के लिए उस के पेरैंट्स आए हैं. अगर साइन हो गए हों, तो मैं आ कर ले लेती हूं?’’

‘‘नहीं, तुम्हें आने की जरूरत नहीं है. मैं ने अभीअभी साइन कर दिया है. खुद ले कर आती हूं. डैनी को घर भी ड्रौप कर दूंगी.’’

कुछ मिनटों बाद सीढि़यों से उतरती हुई इहा रिसैप्शन के पास आई. उस का बेटा डैनी भी साथ में था. उन्हें आते देख कर रिसैप्शनिस्ट बोली, ‘‘लीजिए, आप की रिपोर्ट ले कर खुद मैम आ गईं.’’

धरम ने इहा की ओर देखा तो वह आश्चर्य से देखता रहा. उस के पीछे उस का बेटा डैनी था, उसे देख कर सुधा को काफी ताज्जुब हुआ. डैनी की शक्ल धरम से मिलती थी. इहा को देख कर धरम बोला, ‘‘व्हाट ए सरप्राइज, तुम यहां?’’

‘‘हां, मेरा ही लैब है तो मैं यहां रहूंगी ही. इस में सरप्राइज की क्या बात है़’’

‘‘आप इन्हें जानते हैं?’’ सुधा ने धरम से पूछा.

‘‘हां, कभी हम साथ पढ़ते थे और अच्छे दोस्त भी थे.’’

डैनी का चेहरा अलबम में धरम की बचपन की तसवीर से हूबहू मिलता था, जिसे सुधा बारबार देख चुकी थी. उसे देख कर सुधा बोली, ‘‘इन के बच्चे का चेहरा तुम से काफी मिलता है.’’

‘‘यह मात्र संयोग है. कहा जाता है कि एक चेहरे जैसे दुनिया में कम से कम 2 इंसान होते हैं,’’ इहा ने कहा.

रिपोर्ट दे कर इहा ने बेटे से कहा, ‘‘चल, तेरे पापा इंतजार कर रहे होंगे.’’ और वह अपने बेटे के साथ चली गई.

उस के जाने के बाद सुधा ने रिसैप्शनिस्ट से पूछा, ‘‘क्या डैनी आप की मैम का सगा बेटा है?’’

‘‘हां, उन का अपना बेटा है. मेरी मां और इन की मौसी एक ही हौस्पिटल में नर्स थीं और अच्छी सहेली भी. डैनी बाबा की डिलीवरी मेरी मां ने ही कराई थी और यह भी कहा था कि इन के बौयफ्रैंड ने धोखा दिया था.’’

‘‘चलो, हमें अब देर हो रही है,’’ धरम ने कहा.

धरम और सुधा दोनों कार से जा रहे थे. सुधा के मन में रहरह कर रिसैप्शनिस्ट की बात याद आ रही थी, किसी ने इहा को चीट किया है, डैनी का चेहरा धरम से मिलना और धरम का अपने टैस्ट से इनकार करना. क्या सभी महज इत्तफाक ही है. उधर धरम भी मन में सोच रहा था, ‘डैनी मेरा बेटा होते हुए भी जेम्स का बेटा कहलाता है और उस का नाम रौशन कर रहा है. काश, मैं ने उसे अपनाया होता तो मु झे किसी अन्य बच्चे को गोद लेने की नौबत नहीं आती और डैनी आज मेरा नाम रौशन कर रहा होता.’

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