अंतिम भाग

पूर्व कथा

दिल्ली की सड़कों पर ड्राइविंग करते हुए सात्वत की नजर चेष्टा पर पड़ती है, लेकिन जब तक वह डब्लू.एच.ओ. भवन के गेट के पास पहुंचता है तब तक वह ओझल हो जाती है. रिसेप्शनिष्ट से उस के बारे में पूछता है तो वह कोई भी सूचना देने से इनकार कर देती है. सात्वत वापस कार में आ कर बैठ जाता है और चेष्टा के बारे में सोचने लगता है.

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