लालचंद के जवान बेटे नील की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि क्रूर समाज ने सदविधवा बहू अहल्या का नाम उन से जोड़, अफवाहों का चक्रव्यूह रच कर 3 निर्दोष व्यक्तियों की चिता जीतेजी सजा दी थी.
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