पिछला भाग पढ़ने के लिए- नए साल का दांव भाग-1

कपिल बच्चों पर बिना बात के चिल्लाता रहता. वंदिता की बातबात में इंसल्ट करता. खाने की थाली उठा कर फेंक देता. वंदिता ने दिल्ली में रहने वाले अपने भाई और मां से यह दुख शेयर किया तो उन्होंने फौरन कपिल को छोड़ कर आने की सलाह दी. वे बेहद नाराज हुए. उन्होंने कपिल से बात की तो कपिल ने उन की खूब इंसल्ट करते हुए जवाब दिए. संजय और साक्षी सब जान चुके थे. दोनों ने गुस्से में कपिल से बात करना बंद कर दिया था.

उस दिन वंदिता ने सारी स्थिति पर ठंडे दिमाग से सोचा. हर बात पर बारीकी से ध्यान दिया. उस ने सोचा कपिल को छोड़ कर मायके जाना तो समस्या का हल नहीं है. वह कोई नौकरी तो करती नहीं है… वहां जा कर भाई और मां कितने दिन खुशीखुशी उसे सहारा देंगे और वह स्वयं को इतनी कमजोर, मजबूर क्यों सम झ रही है? कपिल बेवफाई कर गया, इस की सजा वह क्यों परेशान, दुखी रह कर भुगते? वह क्यों अपनी हैल्थ इस धोखेबाज के लिए खराब करे और बच्चे? दोनों सुबह के गए रात को आते हैं. व्यस्त हैं, अपने पैरों पर खड़े हैं. नई जौब है. कपिल से नाराज रह कर उन का काम चल ही रहा है. कपिल अपनी ऐयाशियों में मस्त है, सिर्फ वही क्यों इस पीड़ा का दंश सहे?

वह 12वीं कक्षा तक के बच्चों को मैथ की ट्यूशन पढ़ती थी. पूरी सोसाइटी में उस के जैसी मैथ की टीचर नहीं थी. बच्चों से घिरी इतने रोचक ढंग से पढ़ाती कि बच्चों को मैथ जैसा विषय कभी मुश्किल ही न लगता उन के पेरैंट्स भी बहुत खुश रहते. मैथ की ट्यूशन की फीस भी उसे अच्छी मिलती. दिन के 4 घंटे तो उस के ट्यूशन में ही बीतते थे. अपनी जरूरतों के लिए वह इन पैसों को आराम से खर्च करती. नहीं,

वह रोरो कर तो नहीं जाएगी. यह जीवन बारबार नहीं मिलता. वह छोड़ कर कहीं नहीं जाएगी,

जो गलत काम कर रहा है. वह दुखी रहे. वह खुश रहेगी.

हफ्ते में 2 दिन सुबह 6 बजे वंदिता सोसाइटी में ही चलने वाले जिम में जाती थी, वहां उस का एक अलग ही ग्रुप था. सुबह सब के साथ व्यायाम करना उस के मन को खूब भाता था. शिनी भी उस के साथ रहती थी.

अगले दिन जिम में मिलने पर वंदिता के रिलैक्स्ड चेहरे को देख कर शिनी हंसी, ‘‘वाह, क्या बात है… बड़ी खुश लग रही हो… कपिल से कुछ बात हुई क्या?’’

वंदिता खुल कर हंसी, सुबहसुबह किस का नाम ले दिया? वह तो टूर पर गया है.’’

‘‘तो इतनी रिलैक्स्ड क्यों लग रही हो?’’

‘‘बाद में बताऊंगी. आज अमायरा और सिम्मी नहीं आई हैं.’’

‘‘ठीक है,’’ शिनी बोली.

वंदिता घर आई तो बच्चे औफिस के लिए तैयार हो रहे थे. मां को आज खुश देख साक्षी ने कहा, ‘‘मम्मी, पापा आजकल टूर पर जाते हैं तो अच्छा लगता है न?’’

वंदिता हंस पड़ी, ‘‘हां, बहुत.’’

संजय बोला, ‘‘मेरा मन ही नहीं होता उन से बात करने का. आप कैसे बरदाश्त कर रही हैं, मम्मा?’’

‘‘छोड़ो बच्चो, मैं अब उस पर अपनी ऐनर्जी वेस्ट करने वाली नहीं.

मैं ने सोच लिया है कि मु झे कैसे जीना है. वह चाहे कुछ भी करे, मैं अपना मैंटल पीस खत्म नहीं होने दूंगी.

मैं ने कुछ गलत नहीं किया न, फिर दुखी मैं क्यों रहूं?’’

बच्चों ने उसे गले लगा लिया, ‘‘प्राउड औफ यू मम्मी.’’ उस दिन बढि़या

वर्कआउट करने के बाद चारों सहेलियां क्लब हाउस के एक कोने में बैठ गई. सिम्मी ने कहा, ‘‘यार, तू कुछ बदलीबदली सी अच्छी लग रही है.’’

‘‘हां, मैं अब कपिल में उल झ कर दुखी नहीं रहने वाली और भी बहु कुछ है मेरी लाइफ में जिसे मैं ऐंजौय कर सकती हूं… अब बैठ कर एक बेवफा के लिए तो हरगिज नहीं रोऊंगी. जितना रोना था रो ली, अब नहीं. अब तक उस पर मेरे रोने का न असर हुआ है न होगा, उलटा वह धोखेबाज इंसान मु झे रोते देख मेरा मजाक उड़ाता है.’’

अमायरा ने खुश हो कर कहा, ‘‘प्राउड औफ यू यार, आज मोहना का लैंडलौर्ड सुधीर सुबह आया था. कुछ गुस्से में दिख रहा था. कुछ तेज आवाजें आ रही थीं,’’ अमायरा मोहना के फ्लोर के सामने वाले फ्लोर पर रहती थी.

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शिनी चौंकी, ‘‘अच्छा?’’

‘‘हां, कुछ ऐसा सुना कि किराया टाइम पर नहीं दिया गया है.’’

सिम्मी ने कहा, ‘‘मु झे अभीअभी आइडिया आया है. यह मोहना ही इस सोसाइटी से चली जाए तो अच्छा रहेगा न? इसे ही भगाते हैं. अमायरा. तुम इस के लैंडलौर्ड को जानती हो?’’

‘‘हां, मोहना को फ्लैट देने के समय काम करवाने कई बार यहां आता था. हमारी उम्र का ही होगा. मेरे पति नितिन से आमनासामना होने पर अच्छी जानपहचान हो गई है. भला इंसान है.’’

‘‘उस का फोन नंबर है?’’

‘‘हां, नितिन के पास है. मेरे सामने ही उस ने अपना नंबर दिया था.’’

फिर चारों सिर जोड़े बहुत देर तक प्लानिंग करतीं रहीं. उस के बाद संतुष्ट हो कर अपनेअपने घर चली गई.

उसी रात सुधीर को नितिन ने फोन किया. दोस्ताना लहजे में हालचाल पूछा  फिर कहा, ‘‘तुम्हारा फ्लैट तो मशहूर हो गया.’’

‘‘कैसे?’’

नितिन ने उसे सब बता दिया कि मोहना का सोसाइटी के ही किसी पुरुष से संबंध हैं

और वह पुरुष रातदिन खूब आताजाता है और मोहना के फ्लैट से काफी डिस्टरबैंस सी रहने लगी हैं.

सुधीर बहुत सभ्य आदमी था, वह आजकल वैसे ही किराया समय पर न मिलने से परेशान था. विनय उस का फोन उठाता नहीं था. 2 महीने का किराया इकट्ठा हो चुका था. नितिन ने यह भी बताया कि विनय का कोई काम है ही नहीं. हर समय शराब में डूबा रहता है. मोहना ही पैसा ऐंठने का काम करती है, किसी से भी. वह तो अच्छा था, सुधीर ने ऐडवांस में डिपौजिट लिया हुआ था. सारी बात सुन कर सुधीर ने एक फैसला ले लिया.

अगले दिन सुबह ही सुधीर को घर आया देख विनय और मोहना हड़बड़ा गए. सुधीर ने कहा, ‘‘1 हफ्ते के अंदर मु झे अपना फ्लैट खाली चाहिए.’’

मोहना गुर्राई, ‘‘यह कोई रूल नहीं है… ऐडवांस नोटिस क्यों नहीं दिया?’’

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‘‘रूल की बात तो करना मत तुम लोग… गैर के साथ रातदिन रंगरलियां मनाने वाली रूल की बात करेगी? विनय, आप अपने नशे में इन बातों से आंखें बचा सकते हैं, बिल्डिंग में रहने वाले इन चीजों को बरदाश्त नहीं करेंगे और मु झे इतना भी शरीफ मत सम झ लेना… 1 हफ्ते में फ्लैट खाली नहीं किया तो सामान उठवा कर बाहर फिंकवा दूंगा.’’

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