अंधविश्वास की कट्टर विरोधी अमृता पाखंडी गुरुजी की मीठी- मीठी बातों के जाल में ऐसी फंसी कि उस ने संन्यासिन बनने का फैसला कर लिया जबकि दादा उस की दूसरी शादी कर गृहस्थी बसाना चाहते थे. जिंदगी के दोराहे पर खड़ी अमृता ने आखिर कौन सा रास्ता अख्तियार किया?
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