सफर रातभर का था. ऋचा का सामीप्य यश को रोमांचित कर रहा था. सफर खत्म हुआ तो दोनों की राहें जुदा हो गईं. हालांकि, यश का मन कुछ और सपने बुनने लगा था.
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