बचपन से ही शुचिता के मन में अंधविश्वास की जड़ें जमा दी थीं उस की दादी ने और युवा होतेहोते ये जड़ें और गहरी हो गई थीं, जिस का फायदा उठाया उस के अपनों ने.
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