कल से नमन क्षितिजा को फोन लगाए जा रहा था, पर न तो वह अपना फोन उठा रही थी और न ही वापस उसे फोन कर रही थी. 
 
लेकिन आज जब उस का फोन बंद आने लगा तो नमन आशंका से भर उठा.
‘‘हैलो आंटी, क्षितिजा कहां है? मैं कल से उसे फोन लगा रहा हूं, पर वह फोन 
 
नहीं उठा रही है और आज तो उस का फोन ही बंद आ रहा है. कहां है क्षितिजा?’’
नमन के कई बार पूछने पर भी जब सुमन ने कोई जवाब नहीं दिया तो 
 
वह बेचैन हो उठा. बोला, ‘‘आंटी, क्या हुआ सब ठीक तो है?’’
‘‘बेटा, वो…वो… क्षितिजा अस्पताल में…’’ इतना बोल कर सुमन सिसक कर रोने 
 
लगीं. ‘‘अस्पताल में?’’ अस्पताल का नाम सुनते ही नमन घबरा गया, ‘‘पर… पर क्या हुआ उसे?’’
फिर सुमन ने जो बताया उसे सुन कर नमन के पैरों तले की जमीन खिसक गई. फिर बोला, ‘‘ठीक है आंटी, आ… आप रोइए मत. मैं कल सुबह की फ्लाइट से ही वहां पहुंच रहा हूं.’’
नमन को देखते ही क्षितिजा के आंसू फूट पड़े. वह उस के सीने से लग कर एक बच्ची की तरह बिलखबिलख कर देर तक रोती रही.
‘‘बस क्षितिजा बस, अब मैं आ गया 
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हूं न… सब ठीक हो जाएगा,’’ उस के आंसू पोंछते हुए नमन बोला. 
मगर डर के मारे वह इसलिए नमन को नहीं छोड़ रही थी कि वह दरिंदा फिर उस के 
 
सामने न आ जाए. हिचकियां लेते हुए कहने लगी, ‘‘नमननमन उ… उस ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा. उस ने धोखे से मेरे साथ… बोलतेबोलते वह बेहोश हो 
 
गई.’’ ‘‘जब से यहां आई हैं ऐसा ही हो रहा है. लगता है डर घुस गया है इन के मन में. देखिए, मैं अब भी यहीं कहूंगा कि आप सब को पुलिस में 
 
शिकायत कर देनी चाहिए. आखिर दोषी को सजा तो मिलनी चाहिए न? वैसे आप सब को जो ठीक लगे,’’ डाक्टर बहुत ही रहम दिल इंसान थे. उन से क्षितिजा की हालत देखी नहीं जा रही थी. उन्होंने सब को समझाते हुए कहा.

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मगर क्षितिजा के मातापिता ऐसा नहीं चाहते थे. वे नहीं चाहते थे कि उन की 
बेटी समाज में बदनाम हो, क्योंकि लड़की का भले
ही कोई दोष न हो पर सुनना हमेशा उसी को पड़ता है.
क्षितिजा की ऐसी हालत और उस के मातापिता के 
 
मन के डर को समझते हुए नमन बोला, ‘‘हमें पुलिस में कोई शिकायत नहीं करनी डाक्टर. बस क्षितिजा जल्दी से स्वस्थ हो जाए, फिर हम उसे यहां से 
 
ले जाएंगे.’’
‘‘ठीक है जैसी आप लोगों की मरजी,’’ कह कर डाक्टर चले गए.
2 दिन बाद. कुछ हिदायतों के साथ डाक्टर ने क्षितिजा को अस्पताल से 
 
छुट्टी दे दी. नमन के पूछने पर कि आखिर ये सब हुआ कैसे, सुमन बताने लगीं, ‘‘जिस दिन तुम औफिस के काम से दुबई जाने के लिए निकले उस के अलगे ही दिन क्षितिजा और मैं सगाई की खरीदारी के लिए निकल गए. समय कम था, इसलिए तुम ने कहा था कि क्षितिजा अपनी पसंद से तुम्हारे लिए भी अंगूठी और शेरवानी ले ले. उस रोज वह इतनी खुश थी कि बस बोले ही जा रही थी कि तुम्हारे ऊपर कैसी और कौन से रंग की शेरवानी अच्छी लगेगी और यह भी कि उसे भी शेरवानी से मैच करता ही लहंगा लेना है ताकि लोग कहें कि वाह भई क्या लग रहे हैं दोनों.
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‘‘सारी खरीदारी बस हो चुकी थी कि उसी वक्त क्षितिजा के बौस का फोन आ गया. कहने लगा कि कोई जरूरी फाइल है जो मिल नहीं रही है तो वह आ कर जरा उस की मदद कर दे.’’
‘‘अब यह क्या तरीका है क्षितिजा? जब उसे पता है कि तुम छुट्टी पर हो तो फिर कैसे… पर मेरी बात को बीच ही में काटते हुए बोली कि मां, कल औडिट होने वाला है न इसलिए उस फाइल की जरूरत होगी और शायद मैं ने वह गलती से अपने लौकर में रख दी होगी. आप चिंता न करो मैं जल्दी आ जाऊंगी. कह 
वह वहीं औफिस के सामने उतर गई और मुझे ड्राइवर के साथ घर भेज दिया.’’ 
‘‘मगर जब 2 घंटे बीत जाने के बाद भी वह घर नहीं आई तब मैं ने 
 
उसे फोन लगाया तो बोली कि बस मैं निकल ही रही हूं और फिर फोन काट दिया. हम खाने पर उस का इंतजार करते रहे, वह नहीं आई. तब फिर मैं ने उसे फोन लगाया, पर इस बार तो फोन ही नहीं उठा रही थी. क्षितिजा के पापा कहने लगे कि रास्ते में होगी… शायद फोन की आवाज सुनाई नहीं दे रही 

होगी… तुम चिंता न करो आ जाएगी. पर मां का दिल है, चिंता तो होगी ही न? लेकिन जब मेरी बरदाश्त की हद हो गई तब मैं ने उस के बौस को फोन 

लगाया तो वह बोला कि वह तो घर कब की निकल चुकी है. उस की बातें सुन कर मेरी टैंशन और ज्यादा बढ़ गई.
‘‘फिर मैं ने उस के सारे दोस्तों से पूछा कि क्या क्षितिजा उन के घर पर है? पर सब का एक ही जवाब था नहीं. समझ में नहीं आ रहा था कि क्षितिजा कहां जा सकती है और उस ने अपना फोन 
 
क्यों बंद कर रखा है? यह सोचसोच कर मेरा डर के मारे बुरा हाल था. मैं सोच रही थी कि कहीं मेरी बेटी को कुछ हो तो नहीं गया.
‘‘हार कर मैं ने 
 
क्षितिजा के पापा को उस के औफिस तक भेजा और जब उन्होंने वहां ताला लगा देखा तो वे भी घबरा गए. जब वहां के वाचमैन से पूछा तो वह कहने लगा 
 
कि हां क्षितिजा आई तो थी पर फिर बौस के साथ ही
उन की गाड़ी में बैठ कर चली गई. माथा ठनका कि फिर उस के बौस ने झूठ क्यों बोला… रात
के 12 साढ़े 12 बजे तक, जब किसी की जवान बेटी घर से बाहर हो और उस का फोन भी न
लग रहा हो तो जरा सोचिए उन मांबाप पर क्या बीतेगी?
‘‘चिंता के 
 
मारे भूखप्यासनींद सबकुछ हवा हो चुका था हमारा. पूरी रात हम ने आंखों में काट दी. सोचा सुबह होते ही पुलिस में इतला कर देंगे. तभी दरवाजे की घंटी 
 
बजी. मैं ने दौड़ कर दरवाजा खोला और फिर जो देखा, उसे देख कर सन्न रह गई. क्षितिजा के कपड़े अस्तव्यस्त थे और वह दीवार से लग कर खड़ी मुझे 
 
एकटक निहार रही थी.
‘‘मैं पहले उसे अंदर लाई और फिर झट से दरवाजा बंद कर दिया ताकि कोई देख न ले. समझ में तो आ ही गया था मुझे, फिर भी 
 
मैं ने पूछा कि कहां चली गई थी बेटा और तुम्हारा फोन भी नहीं लग रहा था? क्या तुम्हारे बौस को… बौस का नाम सुनते ही वह फूट पड़ी. उस की आंखों 
 
से झरझर कर आंसू बहने लगे.
‘‘मैं ने इसे झंझोड़ कर पूछा कि क्या हुआ बता? किसी ने तेरे साथ… पर कुछ बोलने से पहले ही वह बेहोश हो गई. जल्दी 
 
से हम उसे अस्पताल ले आए. डाक्टर ने जांच कर बताया कि उस के साथ बलात्कार हुआ है. यह सुन कर हमारे पैरों तले की जमीन खिसक गई कि कुछ 
 
दिन बाद सगाई होने  वाली थी…यह उस के साथ क्या हो गया? सदमे से वह बारबार बेहोश हो रही है तो हम उस से पूछते क्या कि किस ने उस के साथ 
 
ऐसी घिनौनी हरकत की? कुछ ठीक होने पर जब मैं ने पूछा कि वह तो अपने बौस को कोईर् फाइल देने गई थी, तो फिर ये सब कैसे हुआ और किस ने 
 
किया?
‘‘तब बताने लगी कि उस के बौस ने ही धोखे से उस के साथ… उस रात अपने बौस के बहुत आग्रह करने पर कि वह डिनर उस के
साथ, उस के 
 
घर पर ही चल कर करे, चाह
कर भी वह मना नहीं कर पाई. वैसे पहले भी
1-2 बार वह उस के घर जा चुकी थी. फिर
यह भी सोचा कि बौस की पत्नी तो 
 
होगी ही
घर पर, लेकिन घर एक नौकर के अलावा और कोई न था. वह भी खाना टेबल पर लगा कर चला गया.
 
क्षितिजा के पूछने पर कि उस की पत्नी और 
 
बच्चे कहां हैं तो 
कोल्डड्रिंक्स का गिलास उस के हाथ में पकड़ाते हुए उस का बौस नरेश कहने लगा कि खाने का सारा अरैंजमैंट उस की पत्नी ने ही किया है, 
 
पर अचानक से उस के किसी दूर के रिश्तेदार, जो इसी शहर में रहते थे उन की मौत हो गई तो उसे फौरन वहां जाना पड़ा. वह बस आती ही होगी.
‘क्षितिजा यह सोच कर धीरेधीरे कोल्डड्रिंक्स के घूंट भरने लगी कि जब उस की पत्नी आ जाएगी तब सब साथ में ही खाना खाएंगे. मगर उसे इस बात की 
 
चिंता भी हो रही थी कि मां उस के लिए परेशान हो रही होंगी. अपने फोन की बैटरी लो होने के कारण, जब वह बौस के फोन से मुझे फोन लगाने लगी तो 
 
यह कह कर नरेश ने उस के हाथ से फोन ले लिया कि अब वह कोई छोटी बच्ची नहीं रही जो हर बात की खबर अपनी मां को देती रही.
‘‘अरे, अब तो वह शादी कर के अपने पिया के घर चली जाएगी तो क्या फिर भी मां को हर बात की जानकारी देती रहेगी? उस की बातों पर क्षितिजा भी मुसकरा पड़ी. 
 
लेकिन उसे एहसास होने लगा कि उस की आंखें बोझिल होने लगी हैं. कुछ समझबोल पाती, उस से पहले ही वह वहीं सोफे पर लुढ़क गई.
‘‘सुबह जब उस की आंखें खुलीं तो उस ने खुद को एक बड़े से बैड पर पाया. उस का पूरा बदन दर्द के मारे टूट रहा था. लग रहा था जैसे किसी ने उस के शरीर को मचोड़ कर रख दिया हो. मगर हैरान तो वह तब रह गई जब उस ने अपने को बिलकुल वस्त्रहीन पाया. फिर अचानक उसे मेरा खयाल आया और जैसे ही वह बैड 
 
पर से उठने की कोशिश करने लगी. नरेश सामने आ कर खड़ा हो गया. उस के हाथ में शराब से भरा गिलास था.’’
‘‘एक बड़ा सा घूट भरते हुए वह बोला कि आराम से… आराम से… वैसे ठीक तो हो न?’’ वह कुछ समझबूझ पाती नरेश उसे घूरते हुए बोला बहुत मजा आया सच में… तुम ने मेरी रात रंगीन कर दी. इस रात को मैं हमेशा याद रखूंगा. बोल कर वह जोर से हंसा और फिर शराब से भरा गिलास एक बार में ही गटक गया.
‘‘नरेश को इस रूप में देख और उस की बातें सुन कर क्षितिजा की आंखें हैरानी से फैल गई. उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि नरेश ने उस के साथ ये सब कुछ किया? चादर से ही अपने नंगे बदन को किसी प्रकार ढकती हुई बोली कि तो तुम ने मेरे साथ…धोखे से अपने घर बुला कर तुम ने मेरा बलात्कार किया? और वहां मेरी मां…
 
‘क्षितिजा की बातों पर वह जोर से हंसा और फिर बोला कि तो क्या अपनी मरजी से तुम मेरे साथ सोने के लिए राजी हो जाती? और मां… हा…हा…हा… 
 
कर वह ठहाके लगाने लगा.’’
‘‘उस की बेशर्मी देख गुस्से से क्षितिजा की आंखें लाल हो गईं. ललकारते हुए बोली कि ठीक है अब देखो मैं क्या करती हूं. 
 
कहीं का नहीं छोडूंगी मैं तुम्हें. सब बताऊंगी पुलिस को कि किस तरह से तुम ने मुझे धोखे से अपने घर बुलाया और फिर कैसे मेरी बेहोशी का फायदा उठाया. बोल कर वह कमरे से निकलने लगी कि नरेश ने यह बोल कर उस का मुंह बंद कर दिया कि अगर उस ने ऐसा सोचा भी तो वह उस का न्यूड वीडियो जो उस ने बना लिया है उसे वायरल कर देगा. इसलिए उस की भलाई इसी में है कि अपना मुंह बंद रखे.’’ 
 
सारी बात सुन कर नमन का खून खौल उठा. मन तो किया उस का कि अभी जा कर उस नरेश का खून कर दे, पर उस ने अपने गुस्से पर कंट्रोल कर लिया और सोचने लगा कि अगर उस शख्स के खिलाफ पुलिस में शिकायत करे तो वह खबर तुरंत अखबारों और टीवी की सुर्खियां बन जाएगी और तब शायद क्षितिजा और अवसाद में चली जाएगी, हो सकता है बदनामी के डर से वह खुद को ही खत्म कर ले.
लेकिन अगर दोषी को सजा नहीं मिलती है तो भी खौफ में वह जी नहीं पाएगी.
क्या शादी के बाद बलात्कार को याद कर वह अपना वैवाहिक जीवन अच्छी तरह जी पाएगी कभी? ‘नहीं, मैं अपनी क्षितिजा को यों घुटघुट कर मरते नहीं देख सकता. मैं इसे इस अवसाद से बाहर निकाल कर ही रहूंगा और इस के लिए चाहे मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े मैं पीछे नहीं हटूंगा, और फिर मन ही मन 
 
नमन ने फैसला कर लिया कि अब उसे क्या करना है. नमन और क्षितिजा कालेज के समय से ही एकदूसरे से प्यार करते थे. उन की शादी से उन के परिवार वालों को भी कोई आपत्ति नहीं थी पर वे दोनों चाहते थे कि जौब लगने के बाद ही शादी के बंधन में बंधे. नौकरी लगते ही वादे के अनुसार दोनों ने शादी 
करने का फैसला ले लिया. कुछ दिन बाद ही दोनों की सगाई होनी थी और ये सब हो गया.
दिनप्रतिदिन क्षितिजा को और अवसाद में जाते देख उस के माता-पिता और नमन बहुत परेशान थे. सब ने अनेक प्रकार से उसे समझाने की कोशिश की, पर उसे तो जैसे काठ मार गया था. न तो वह किसी से ठीक से बात करती थी और न ही ठीक से कुछ खातीपीती थी. दिनबदिन शरीर और कमजोर होता जा रहा था. अंदर ही अंदर टूट रही थी. उस मंजर को याद कर 
 
कभी-कभी आधी रात में ही उठ जाती और फिर उसे संभालना काफी मुश्किल हो जाता था.
 
आज फिर वही भयानक दृश्य क्षितिजा को दहला गया और वह घबरा 
कर उठ बैठी. उस की आंखों से टपटप आंसू बहने लगे. उस की हथेलियों को अपने दोनों हाथों के बीच दबा कर नमन कहने लगा. ‘‘क्षितिजा, मेरी तरफ देखो, अकेली तुम ही एक लड़की नहीं हो इस दुनिया में जो इस दुख से गुजर रही हो. ऐसी कितनी लड़कियां होंगी जो इस दुख से गुजरी होंगी और गुजर 
 
रही होंगी, तो क्या सब ने हिम्मत हार दी होगी? जीना छोड़ दिया सब ने? अरे, गलती किसी और ने की है. फिर तुम क्यों खुद को सजा दे रही हो बोलो? 
 
देखो अपनी मां की तरफ, क्या हालत हो गई है उन की और देखो मेरी आंखों में, क्या लगता है कि अब इन आंखों में तुम्हारी तसवीर नहीं है?
‘‘क्षितिजा, 
 
तुम यह बिलकुल मत समझना कि किसी के छूने भर से तुम्हारा कौमार्य भंग हो गया या तुम अपवित्र हो गई या फिर पहले की तरह नहीं रही. फालतू की 
 
बातों को कभी अपने ऊपर हावी मत होने देना तुम. आज भी मेरे लिए तुम उतनी ही मासूम और पवित्र हो जितनी पहले थी और देखना, उस पापी को उस 
 
के किए की सजा एक दिन जरूर मिलेगी,’’ कह कर नमन ने क्षितिजा को अपने सीने से लगा लिया.
नमन किसी तरह उसे उस खौफ से बाहर निकालना 
 
चाह रहा था. लेकिन जो डर क्षितिजा के ऊपर हावी हो गया था वह निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था. यह सोच कर ही वह सहम जाती कि अगर उस के 
 
बौस ने कहीं उस का वह न्यूड वीडियो वायरल कर दिया तो? कहीं उसी वीडियों को ले कर वह उसे ब्लैकमेल करने लगा तो वह क्या करेगी? उस
के मन की 
 
ये सारी बातें नमन अच्छी तरह समझ रहा था.
क्षितिजा के दिलोदिमाग से हमेशा के लिए वह खौफ निकल जाए और वह नमन से शादी कर अपनी जिंदगी 
 
उस के साथ खुशी से बिता सके, इस के लिए नमन ने अपने मन में ही एक फैसला लिया. पहले तो उस ने अपनी पहले वाली जौब छोड़ क्षितिजा की ही 
 
कंपनी में नौकरी जौइन कर ली और फिर उस के बौस नरेश का भरोसा जीता. अब नरेश अपनी कंपनी के लिए जो भी फैसला लेता उस में नमन की राय 
 
जरूर शामिल होती थी.
 
नमन की बातें और उस का व्यवहार नरेश को इतना अच्छा लगने लगा कि उसे 
वह अपना सच्चा दोस्त नजर आने लगा. अपनी 
 
जिंदगी से जुड़ी हर बात वह उसे बताने लगा और नमन को अपने घर भी ले जाता. उस के साथ और उस की बातों से इतना तो समझ में आ गया नमन को 
 
कि नरेश एक नंबर का ऐयाश किस्म का इंसान है और क्षितिजा से पहले भी उस ने कई लड़कियों का इसी प्रकार शोषण किया है.
लेकिन सब इस डर से चुप 
 
रह गईं कि कहीं वह उन का आपत्तिजनक वीडियो वायरल न का दे. उस की गंदी हरकतों को जानने के बाद उस की पत्नी उसे छोड़ कर जा चुकी थी. 
 
लेकिन इस
बात का उसे कोई मलाल नहीं था, बल्कि वह
तो खुश था कि अब उसे कोई रोकनेटोकने वाला नहीं है.
अपनी योजना के अनुसार जब नमन ने बताया 
 
कि आज उस का जन्म दिन है और इसलिए वह नरेश को एक छोटी सी पार्टी देना चाहता है और उस ने विदेशी शराब और लड़की का भी इंतजाम किया है 
 
तो सुन कर नरेश के मुंह में पानी आ गया. नमन बोला, पर एक  शर्त है सर और वह यह कि पार्टी आप के घर पर ही होगी, क्योंकि…’’
नमन की पूरी 
 
बात सुने बिना ही नरेश ने उस बात के लिए हामी भर दी.
‘‘अब शराब ही पिलाते रहोगे या लड़की के भी दर्शन करवाओगे नमन?’’
नरेश ने बेसब्री से 
 
पूछा.
‘‘हां सर, वह बस आती ही होगी. आप और लीजिए न,’’ कह कर नमन ने फिर नरेश का गिलास शराब से भर दिया.
नशा तो चढ़ ही चुका था 
 
नरेश के सिर. अत: कहने लगा, ‘‘अब जन्मदिन तुम्हारा है और विदेशी शराब और शबाब की पार्टी तुम मुझे दे रह हो? अरे, उपहार तो मुझे तुम्हें देना 
 
चाहिए नमन?’’
नरेश को नमन ने घूर कर देखा और फिर मन ही मन बोला कि ‘सारे उपहार तो आज मैं उसे दूंगा. मेरी क्षितिजा को तूने छूने की कोशिश 
 
की थी न? अब मैं बताऊंगा तुझे कि किसी लड़की का फायदा उठाना किसे कहते हैं. पर बोला, ‘‘हां सर, सही कर रहे हैं आप. वैसे उपहार तो लूंगा ही मैं 
 
आप से,’’ कह कर नमन ने फिर उस का गिलास शराब से भर दिया, ‘‘वैसे सर, उस लड़की का नाम क्या था? हां क्षितिजा, क्या किया था आप ने उस 
 
के साथ?’’
क्षितिजा का नाम सुनते ही नरेश ने अचकचा कर नमन को देखा. बोला, ‘‘तु… तुम्हें कैसे पता उस लड़की के बारे में और मैं ने क्या…’’
 
‘अरे सर, अभी तो आप ने बताया कि उस लड़की के साथ आप ने यहीं इसी घर में क्याक्या किया था,’’ नमन ने अंधेरे में पहला तीर छोड़ा. समझ गया 
 
नमन कि अब नरेश पर नशा चढ़ चुका है और अब वह जो चाहे उस के साथ कर सकता है… जो चाहे उस के मुंह से उगलवा सकता है.
‘‘अच्छा, शराब से 
 
भरे गिलास को एक बार में ही गटकते हुए बोला, ‘बड़ी नमकीन थी, पर साली थी बहुत तेज…हाथ ही नहीं लगाने देती थी अपने शरीर को कभी. लेकिन मैं 
 
भी कहां कम था. पा ही लिया उस के शरीर को… अरे, तूने भी नमन किस की याद दिला दी यार. फिर उस का शरीर पाने को मन मचल उठा. वैसे एक बात 
 
समझ नहीं आती कि औरतें मर्दों से इतना बिदकती क्यों हैं? अरे, वे भोगने की वस्तु ही तो हैं और अगर हम उन के शरीर को नहीं भोगेंगे तो भला और 
 
कौन…’’ कह कर वह मुंह फाड़ कर हंसने लगा.
नमन खून का घूंट पी कर रह गया. नशे में ही वह बोल गया कि उस ने आज तक किसी भी लड़की का 
 
वीडियो नहीं बनाया… उन्हें डराने की खातिर झूठ बोला ताकि वे अपना मुंह बंद रखें.
‘ओह तो यह बात है. इस का मतलब इस ने क्षितिजा का भी कोई 
 
वीडियो नहीं बनाया होगा? मन ही मन सोच नमन खुश हो उठा.
नरेश अब तक इतना पी चुका था कि बैठने के काबिल भी नहीं रहा, फिर भी नमन उसे 
 
पिलाए जा रहा था  और वह नशे में बस ‘लड़की को बुलाओ न नमन, लड़की को बुलाओ,’ की रट लगाए था. फिर उस के मुंह से वह भी निकलना बंद हो 
 
गया. थोड़ी देर में वह वहीं जमीन पर लुढ़क गया और गिलास उस के हाथ से छूट गया.
‘लगता है साला मर गया,’ उस की नाक के सामने अपनी उंगली 
 
लगाते हुए नमन ने सोचा फिर सारे सुबूत मिटा कर वहां से चलता बना.
 
अगले दिन नरेश, टीवी और अखबारों की खबर बन गया कि फंला कंपनी का 
बौस 
 
अपने ही घर में मृत पाया गया और उस की मौत ज्यादा शराब पीने की वजह से हुई है. पुलिस की तहकीकात, मैडिकल रिपोर्ट और उस की पत्नी की गवाही 
 
से यही साबित हुआ कि ज्यादा शराब पीना ही नरेश की मौत का कारण बना. क्षितिजा के साथ उस के मातापिता भी यह खबर सुन कर बहुत खुश हुए. 
 
लेकिन नमन सामने
से क्षितिजा के चेहरे की खुशी को देखना
चाहता था.
‘‘क्षितिजा अब तो तुम खुश हो न?’’ प्यार से उसे अपनी बांहों में भरते हुए नमन 
 
ने पूछा तो उस ने हौले से मुसकराते हुए हां में जवाब दिया.
नमन उत्साह से भर कर फिर कहने लगा, ‘‘क्षितिजा, एक और बात बताऊं तुम्हें? उस ने 
 
तुम्हारा कोई वीडियो नहीं बनाया था, बल्कि उस ने किसी भी लड़की का कोई वीडियो नहीं बनाया था. उस ने तो सिर्फ तुम्हें डराने के लिए ऐसा बोला था 
 
ताकि तुम किसी के भी सामने अपना मुंह न खोल सको.’’
‘‘पर तुम्हें ये सब कैसे पता नमन?’’ आश्चर्यचकित हो कर जब उस की आंखों में आंखें 
 
डाल कर क्षितिजा ने पूछा तो वह सकपका गया? फिर उसे चूमते हुए बोला कि उसे किसी तरह पता चल गया.
मगर क्षितिजा को समझते देर नहीं लगी कि 
 
नरेश की मौत के पीछे कौन है और क्यों? ‘उस की मौत जैसे भी हुई हो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, पर जो भी हुआ बहुत अच्छा हुआ, क्योंकि उस कमीने 
 
को यही सजा मिलनी चाहिए थी, वरना न जाने वह और कितनी मासूम लड़कियों की जिंदगियां तबाह कर डालता,’ सोच कर क्षितिजा नमन की ओर देख 
 
मुसकराई तो नमन भी सुकून की एक लंबी सांस भरते हुए प्यार से क्षितिजा को निहारने लगा.                  
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