आज के दौर में तकनीक ने हमें ऐसेऐसे तरीकों से रूबरू कराया है जिन से हम हमेशा जवां और खूबसूरत नजर आ सकते हैं. ऐंटीएजिंग प्रोसीजर के जरीए न सिर्फ त्वचा पर पड़ने वाले बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम किया जा सकता है, बल्कि इस से एजिंग से त्वचा पर होने वाले असर की मुख्य वजह पर भी टारगेट किया जाता है ताकि दोबार एजिंग का प्रभाव न दिखे.

10 कौस्मैटिक प्रोसीजर आप की हमेशा जवां दिखने की चाहत को पूरा कर सकते हैं:

कैमिकल पील से हटाएं डैड सैल्स

चेहरे के ढलने व त्वचा की चमक के लगातार कम होने की एक वजह डैड होते स्किन सैल्स भी हैं. ऐसे में कुछ खास किस्म के ट्रीटमैंट जैसे कि माइक्रोडर्माबे्रसन और कैमिकल पील्स के जरीए चेहरे के डैड सैल्स को हटाया जा सकता है. इस के अलावा डायमंड पौलिशिंग के जरीए भी डैड सैल्स, स्कार्स और टैनिंग को दूर किया जा सकता है.

चेहरे के लिए मैसोबोटोक्स

यह चेहरे के फेशियल का एक अलग तरीका है, जिस में चेहरे पर माइक्रोबोटोक्स इंजैक्ट कराए जाते हैं. इस में बोटोक्स के कम डोज फेस के अलगअलग हिस्सों में लगाए जाते हैं. इस से फेस की स्किन चमकदार और  झुर्रियांरहित नजर आती है.

लेजर थेरैपी

अगर चेहरे के पोर्स फैल जाएं, तो ये आप के लुक को खराब कर देते हैं. ऐसे में लेजर थेरैपी के जरीए फेस के पोर्स को टाइट करा सकती हैं.

बोटोक्स ट्रीटमैंट

बढ़ती उम्र के चलते माथे पर पड़ी लकीरें और झुर्रियां थकान, तनाव और उम्रदराज होने के संकेत देती नजर आती हैं. इन्हें बोटोक्स के जरीए आसानी से दूर किया जा सकता है. बोटुलिनम टौक्सिटी जिसे आमतौर पर बोटोक्स के नाम से जाना जाता है, एक ऐसा नौनसर्जिकल प्रोसीजर है, जिस में बोटोक्स को इंजैक्ट कर के मसल्स को रिलैक्स मोड पर लाया जाता है. इस प्रक्रिया द्वारा चेहरे की झुर्रियों और लकीरों को खत्म किया जाता है. जैसे ही मसल्स में बोटोक्स को इंजैक्ट किया जाता है, यह एक खास मसल को अन्य मसल्स के साथ कौंटैक्ट करने को रोक देता है. जिस मसल पर बोटोक्स का असर होता है वह रिलैक्स हो जाती है. इसे चेहरे के अलगअलग हिस्सों पर इंजैक्ट करा कर फेस को बिलकुल फ्रैश लुक दिया जाता है. बोटोक्स का इस्तेमाल ब्रो लिफ्ट के लिए भी किया जाता है. इस में कुछ ही मिनटों के अंदर आईब्रोज को हाईलाइट कर के आकर्षक शेप में बदला जा सकता है. इस से चेहरा बिलकुल नए लुक में नजर आता है.

ओजोन थेरैपी

बालों की ग्रोथ और रिपेयर के लिए शरीर के किसी भी हिस्से में औक्सीजन के प्रवाह को ओजोन थेरैपी के नाम से जाना जाता है. औक्सीजन के ये फ्री रैडिकल्स शरीर में मौजूद हानिकारक तत्त्वों को शरीर से बाहर करने में सहायक होते हैं. ऐसे ही तत्त्व सिर की सतह पर भी होते हैं, जो ओजोन थेरैपी के जरीए सतह से बाहर निकल जाते हैं. इस थेरैपी के असर से बालों का गिरना पूरी तरह बंद हो जाता है और नए बाल उगने शुरू हो जाते हैं.

रैस्टिलेन ट्रीटमैंट

दिल्ली की डर्मैटोलौजिस्ट डा. इंदू बालानी, बताती हैं कि बेजान त्वचा और आंखों के नीचे काले घेरों की समस्या को ह्यालुरोनिक ऐसिड से भरपूर रैस्टिलेन जैसे डर्मल फिलर्स के इस्तेमाल से दूर किया जा सकता है. यह त्वचा को मौइश्चराइज करता है और इस का असर 1 साल तक रहता है.

डायमंड पौलिशिंग

डा. चिरंजीव छाबड़ा, डर्मैटोलौजिस्ट (स्किन अलाइव क्लीनिक, दिल्ली) कहते हैं कि इस तकनीक में डायमंड को टिप्स पर फिक्स कर के इसे इलैक्ट्रौनिकली चेहरे पर मूव कराया जाता है. यह तकनीक चेहरे से डैड सैल्स, स्कार्स, टैनिंग के अलावा स्किन के ग्लो और कौंप्लैक्शन से जुड़ी कई कमियों को भी दूर करती है. डायमंड एमडीबी तकनीक के क्षेत्र में नया विकास है, जिस का पूरे विश्व में चेहरे की रंगत निखारने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

स्किन सर्कुलेशन थेरैपी

इस थेरैपी से चेहरे की त्वचा का ब्लडसर्कुलेशन इंप्रूव किया जाता है. इस से चेहरे का कौंप्लैक्शन और ग्लो बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पुरानी थेरैपी से छुटकारा मिल जाता है. यह ऐक्ने, स्कार्स, डार्कसर्कल्स, स्किन में पैचीनैस आदि को दूर करने में भी इस्तेमाल की जाती है.

स्टेम सैल थेरैपी

इस ट्रीटमैंट में विटामिंस, अमीनोऐसिड्स व पेप्टाइड्स के मिक्स्चर को दूसरे ऐक्टिव इनग्रैडिएंट के साथ मिला कर सिर की सतह के स्टेम सैल्स को ऐक्टिव करते हैं. इस से बालों की ग्रोथ तेज हो जाती है. यह ट्रीटमैंट वीकली इंटरवल में कई सैशनों में पूरा होता है. जल्दी रिकवरी के लिए हेयर लेजर एलईडी थेरैपी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

कूलस्कल्पटिंग

यह अतिरिक्त चरबी या मोटापा दूर करने की सब से कारगर तकनीक है, जो शरीर को मनचाहा आकार देती है. इस में शरीर की चरबी अथवा मोटापे के अनुसार सिटिंग्स होती हैं. तो नए साल में खूबसूरत दिखने के ये आधुनिक उपाय आजमाएं और पाएं बेदाग सुंदरता.