विज्ञापन से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता सिद्धार्थ निगम ने टीवी और फिल्म दोनों में काम किया है. वे एक नेशनल लेवल के जिम्नास्ट हैं यही वजह है कि उन्हें किसी भी प्रकार के एक्शन करने में कोई समस्या नहीं होती. ‘धूम 3’ उनकी एक सफल फिल्म रही, जिसमें उन्होंने आमिर खान के बचपन की भूमिका निभाई थी. इसके बाद टीवी धारावाहिक चकवर्ती अशोका सम्राट काफी चर्चित थी, जिसमें उनके काम को काफी सराहना मिली और वो एक कलाकार के रूप में खुद का नाम स्थापित करने में सफल हुए.

बचपन से अलग काम करने की इच्छा रखने वाले सिद्धार्थ इलाहाबाद के हैं. उन्होंने बचपन से जिम्नास्टिक सीखा है. कम उम्र में पिता के गुजर जाने के बाद भी उनकी मां ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए सारी सुविधाएं दी. अपनी सफलता का श्रेय वे अपनी मां को देते हैं. जो हमेशा उनके साथ रहती हैं. अभी सिद्धार्थ सब टीवी की धारावाहिक ‘अलादीन – नाम तो सुना होगा’ में अलादीन की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. उनसे मिलकर बात करना रोचक था पेश है अंश.

इस शो का आकर्षण क्या है?

ये शो मेरे सभी शो से अलग मजेदार, विचित्र, दयालु और दूसरों की सहायता करने वाला बिल्कुल मेरे जैसा है. इस चरित्र से मुझे सीख मिली है कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है. इसे शूट करने में बहुत मजा आ रहा है.

इसके लिए कितनी तैयारियां करनी पड़ी?

इस शो में मेरी भूमिका को क्रिएट करना पड़ा. इसमें चेहरे को बदलना, संवाद को कहने का तरीका आदि को नया बनाया गया. अलादीन की कई फिल्में बनी है, लेकिन मैंने इसे अलग रूप देने की कोशिश की है. ये अलादीन दिल चुराने वाला होगा.

आप इस चरित्र से अपने आपको कैसे रिलेट करते हैं?

मुझमें और इस चरित्र में अधिक फर्क नहीं है. इस चरित्र को एडवेंचर करना अच्छा लगता है, जो मुझे भी पसंद है. ये अपने आपमें विश्वास रखता है वैसा मैं भी हूं. इसके अलावा ये चरित्र मां को बहुत सम्मान देता है और मेरे लिए भी मेरी मां ही सबकुछ हैं. फर्क ये है कि अलादीन फ्लर्ट करता है, पर मैं नहीं करता.

इलाहाबाद से निकलकर यहां तक पहुंचने में कितना संघर्ष था?

मैं पिछले 5 साल से मुंबई में हूं और आज जो कुछ भी बना हूं, वो मां की वजह से हूं. आज मेरी जो ग्रोथ हुई है वह भी मां की वजह से ही मिली है, क्योंकि मैं जहां था, वहां मेरी कला की कोई कद्र नहीं थी. जब मेरे पिता की मृत्यु हुई थी तो मैं केवल 5 साल का था और मेरा भाई 9 साल का था. सिंगल मदर होकर उन्होंने हमें पाला मुंबई आईं और आगे बढ़ने का मौका दिया.

मुंबई आने के बाद आप एडजस्ट कैसे हुए?

इंडस्ट्री बहुत अनप्रेडिक्टेबल है, कभी भी यहां कुछ भी हो सकता है. यहां आप किसी से कुछ कह नहीं सकते. आपकी मेहनत, लगन और प्रतिभा ही आपको आगे लाती है. मुझे याद आता है कि आज तक जितने भी कलाकार स्टार बने हैं, उनमें बहुत कुछ खूबियां है और वे असल जिंदगी में भी वैसे ही हैं, जैसा वे पर्दे पर दिखते हैं. इस कला को मुझे भी बनाकर रखना है, ताकि मैं एक साधारण इंसान की तरह जी सकूं. मैं जिससे भी मिला मुझे कुछ न कुछ सीखने को मिला. आमिर खान के साथ फिल्म ‘धूम 3’ के समय जब मिला था, तो उन्होंने समझाया था कि एक्टिंग को रियल बनाने के लिए आपको वैसा ही बनना पड़ता है, तब अभिनय सामने निकलकर आती है.

अभी तक आपने कितना ग्रो किया है? गलतियों से क्या सीख ली?

मैंने हर शो के साथ-साथ ग्रो किया है. सबसे अच्छी बात यह है कि मेरे पास मां है, जो गलतियां करने से रोक देती हैं. मैं अपनी मां की बहुत इज्जत करता हूं और सभी यूथ से भी कहना चाहता हूं कि अपने माता-पिता की हमेशा सुनें, इससे आप कोई भी गलती करने से बच जाते हैं.

इंडस्ट्री में आने के बाद आपकी धारणा इंडस्ट्री को लेकर कितनी बदली है?

ये ग्लैमर की इंडस्ट्री है, लोग कहते हैं कि यहां आने के बाद व्यक्ति अपने आप को भी भूल जाता है और गलत काम करने लगता है, जबकि ऐसा नहीं है. ये व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह कैसा है. मैंने 5 साल बिता लिए है और अच्छा काम कर रहा हूं. मैं अपने काम पर अधिक ध्यान देता हूं और गलत चीजों को इग्नोर करता हूं. मैंने देखा कि अभिनय आसान नहीं है. 12 घंटे काम करने पड़ते हैं. नींद आ जाय तो भी कैमरे के आगे आंखे बड़ी करनी पड़ती है. उदास हूं तो भी हंसना पड़ता है. बहुत कठिन जौब है जिसे आप असल जिंदगी में कभी भी नहीं कर सकते. यहां आकर मैंने मेहनत और धैर्य धरना सीखा है. मैं एक जिम्नास्ट हूं और एक्टर से पहले अपने आपको स्पोर्ट्स मैन समझता हूं.

एक्टिंग के साथ-साथ पढ़ाई और जिम्नास्टिक को कैसे मैनेज करते हैं?

एक्टिंग के साथ-साथ सब करता हूं और समय भी मिल जाता है. मैं रिलैक्स कभी नहीं करता. मेरे हिसाब से जिस दिन मैं काम करना बंद कर दूंगा, बौडी भी काम करना बंद कर देगी और मैं बीमार हो जाऊंगा. जिम्नास्टिक से मैं रिलैक्स करता हूं. मैं अभी बी एम् एम् की पढ़ाई कर रहा हूं और कौलेज के छात्र मुझे बहुत हेल्प करते हैं.

आप कितने फूडी हैं और मां के हाथ का बना हुआ क्या पसंद है?

मुझे घर का खाना बहुत पसंद है, मां के हाथ का बना हुआ आलू की खीर बहुत अच्छी लगती है.

क्या कोई ड्रीम प्रोजेक्ट है?

मैं एक रियल एक्टर बनना चाहता हूं, जो हर तरह की एक्टिंग कर सकें.

क्या कोई सोशल वर्क करना चाहते हैं?

मुझे लोगों की मदद करना बहुत अच्छा लगता है. मैं जब भी बाहर कही जाता हूं और छोटे-छोटे बच्चों को भीख मांगते या काम करते हुए देखता हूं तो मुझे बुरा लगता है. इसका जिम्मेदार मैं सरकार, परिवार और समाज को मानता हूं. उन बच्चों के माता-पिता इतने गरीब हैं कि कुछ पैसों के लिए उन्हें भीख मांगने भेज देते हैं. मैं इस क्षेत्र में कुछ करने की इच्छा रखता हूं.

यूथ को क्या मेसेज देना चाहते हैं?

अपने परिवार का कभी असम्मान न करें, उनकी सुने.