स्पार्कल मेहंदी

इस मेहंदी स्टाइल में ग्लिटर, स्पार्कल, कलर भरे जाते हैं. दुलहन सगाई वाले दिन अपनी ड्रैस से मैचिंग स्पार्कल्स भी लगा सकती है. यदि शादी और सगाई में 1 या 2 दिन का फर्क है, तो दुलहन के लिए यह मेहंदी लगवाना सब से बढि़या है. यह पानी से धोने पर साफ हो जाती है.

राजस्थानी मेहंदी

राजस्थानी मेहंदी की खासीयत यह है कि इस में पतलीपतली पत्तियों को डिजाइन में उकेरा जाता है. इस की पत्तियों में जाली वाली डिजाइन बनाई जाती है. पत्तियों से पूरी हथेली को संजोते हैं.

चूड़ीकट स्टाइल

ज्वैलरी पहनना महिलाओं की सब से बड़ी चाहत होती है. वे कुहनियों तक चूडि़यां पहनती हैं. लेकिन आजकल कामकाजी महिलाओं की संख्या बहुत है. उन्हें ज्यादा चूडि़यां पहन कर काम करने में परेशानी होती है. अत: उन के लिए इस स्टाइल की मेहंदी बहुत सही रहती है. मेहंदी का यह न्यू ट्रैंड दुलहनों को बहुत पसंद आ रहा है.

शेड मेहंदी

शेड मेहंदी की डिजाइन बेहद आकर्षक लगती है. इस में ठप्पे की मेहंदी जैसी झलक दिखाई देती है. पहले लकड़ी के ठप्पे बाजार में उपलब्ध होते थे. उन को गीली मेहंदी में डुबो कर हथेलियों पर रखते थे. थोड़ी देर में डिजाइन उभर आती थी. लेकिन आजकल उसी स्टाइल को कोन में मेहंदी भर कर फूलपत्ती को अंदर से शेड बना कर भर दिया जाता है. यह न्यू ट्रैंड मेहंदी बहुत डार्क कलर की रचती है.

ब्राइडल मेहंदी

पुराने ट्रैंड की ब्राइडल मेहंदी में ज्यादातर मोर की डिजाइन बना कर लगाई जाती थी या पिया का नाम लिखवा कर लड़कियां खुश हो जाती थीं. लेकिन आजकल न्यू ट्रैंड में स्पैशल मेहंदी लगाई जाती है, जिस में वरमाला डालते हुए दूल्हादुलहन हथेलियों पर बनाए जाते हैं. डोली में बैठ कर ससुराल जाती दुलहन, तबला और शहनाई को भी हाथों पर उकेरा जाता है. एक हाथ पर घोड़ी पर बैठ कर बरात ले जाता दूल्हा भी बनाते हैं. हथेली पर फेरे करवाते हुए दूल्हादुलहन भी रचाए जाते हैं. ब्राइडल के पैरों पर नाचते हुए मोरमोरनी का जोड़ा भी बनाते हैं, जो बेहद आकर्षक लगता है.

सकर्ल मेहंदी

सर्कल मेहंदी बारीक कोन से लगाई जाती है. इस में बारीक गोल डिजाइन बनाई जाती है और इसे बहुत ध्यान से लगाया जाता है वरना गोलाई ठीक नहीं आती.

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