गृहशोभा विशेष

आजकल युवा सोशल मीडिया और औनलाइन ट्रेंड में ज्यादा रुझान रखते हैं. साथ ही वो अपने हर जरूरी काम के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. खाना और्डर करने से लेकर औनलाइन बैंकिंग व निवेश के लिए भी वे मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते हैं. ईएमआई की उपलब्धता और आसान फाइनेंसिंग के चलते खरीदारी के दौरान कीमत उनके लिए उतना महत्व नहीं रखती है. मोबाइल ऐप्स के चलते वे अपने खर्च और बजट पर ध्यान नहीं दे पाते हैं.

अपने खर्चों को ट्रैक करें और बिल भुगतान समझदारी से करें

बजट सेट करें

अगर आप सभी काम ऐप्स से ही करती हैं तो आप अपने खर्चों को भी ऐप के जरिए ट्रैक कर सकती हैं. इस तरह की ऐप्स में न सिर्फ खर्चे बताए और मैनेज किये जाते हैं बल्कि ये आपको क्रेडिट कार्ड और अन्य यूटिलिटीज के लिए रिमाइंडर भी भेजती हैं. बजट सेट करने से आप जरूरत से ज्यादा खर्च करने से बचेंगी.

हर महीने अपनी सैलरी का 10 फीसद करें सेव

कोशिश करें की हर महीने अपनी सैलरी का 10 फीसद हिस्सा सेव करें. इस बचत की आप इक्विटी फंड या डेट फंड में एसआईपी करा सकती हैं या फिर अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार फिक्स्ड डिपौजिट भी कर सकती हैं.

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विभिन्न निवेश विकल्पों के बारे में जानकारी हासिल करें

बचपन से ही घरों में यही बताया जाता है कि फिक्स्ड डिपौजिट ही निवेश करने का एक मात्र विकल्प है. जबकि इसके अलावा भी विकल्प मौजूद हैं जैसे इक्वविटी, डेट म्युचुअल फंड्स, स्टौक मार्केट, गोल्ड, रियल एस्टेट आदि. किसी भी निवेश विकल्प का चयन करने से पहले अपने जोखिम लेने की क्षमता पर जरूर गौर करें.

स्वास्थ्य बीमा कवर खरीदें

किसी दुर्घटना या मेडिकल इमर्जेंसी जैसी स्थिति में अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है. इस तरह की स्थिति हमारी वित्तीय सेहत को प्रभावित करती है. छोटी उम्र में बीमारी के होने की संभावना कम होती है. साथ ही प्रीमियम भी कम होता है, इसलिए पांच लाख रुपये या 10 लाख रुपये तक का बीमा खरीद लें.

अपनी टैक्स प्लानिंग शुरू कर कर दें

फरवरी या मार्च का इंतजार न करें बल्कि वित्त वर्ष के शुरू होते ही अप्रैल से टैक्स प्लानिंग कर लें. अगर आप पीपीएफ या टैक्स सेविंग म्युचुअल फंड्स में निवेश करना चाहती हैं तो हर महीने करें. म्युचुअल फंड्स के लिए सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) शुरू कर लें ताकि हर महीने निवेश कर सकें.

इमर्जेंसी फंड का निर्माण करें

नौकरी न होना, दुर्घटना, कोई बीमारी आदि के कारण वित्तीय स्थिति पर प्रभाव पड़ता है. ऐसा हेल्थ इंश्योरेंस के साथ भी होता. एक बार जब आपको अपना मासिक खर्च के बारे में पता जाए तो एक इमर्जेंसी फंड बना लें. इसका इस्तेमाल उन स्थिति में किया जा सकता है जहां पर आपको एक साथ बड़ी राशि की जरूरत होती है. ऐसे में इसका आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा.

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