गृहशोभा विशेष

किसी पराए शहर में नौकरी की तलाश में आए लोग कुछ सालों बाद उसी शहर में अपने घर का सपना देखने लगते हैं. ऐसे में अगर आपके होम लोन की किश्त को साझा करने का विकल्प मिल जाए तो यह सपना जल्दी पूरा हो सकता है. आपको बता दें कि बैंक घर खरीदने, बनवाने और फिर से बनवाने के लिए परिवार में कमाने वाले दो लोगों को एक साथ ज्वाइंट होमलोन का विकल्प देता है.

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बैंक लोन उपलब्ध करने से पहले दोनों व्यक्तियों की आय को ध्यान रखते हुए लोन राशि तय करता है. इसकी मदद से इंडिविजुअल की तुलना में ज्यादा लोन मिलने की संभावना होती है. इसके साथ ही ईएमआई बोझ भी दो लोगों में बंट जाता है. यह आपके टैक्स सेविंग के लिए भी मददगार साबित होता है.

किन रिश्तों में ज्वाइंट होमलोन मिलता है

अगर एक परिवार में दो लोग कमाने वाले हैं तो बैंक दोनों के दस्तावेजों के आधार पर ज्वाइंट होम लोन देता है. इसके तहत पति-पत्नी, पिता पुत्र, पिता-पुत्री, मां-बेटा और मां-बेटी जैसे रिश्तों को ज्वाइंट होमलोन दिया जाता है. लेकिन अधिकांश मामलों में सामाजिक संरचना के मद्देनजर बैंक भाई-बहन को एक साथ लोन नहीं देता.

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ज्वाइंट होमलोन के जरिए बचाएं टैक्स

शहर में अधिकतर परिवारों में पति-पत्नी दोनों नौकरीपेशा होते हैं. ऐसे में टैक्स सेविंग भी दोनों अलग अलग करते हैं. लेकिन अगर दोनों ज्वाइंट होम लोन के लिए अप्लाई करें तो टैक्स सेविंग का फायदा मिल सकता है. इनकम टैक्स एक्ट 24(बी) के तहत होम लोन के ब्याज पर दो लाख तक छूट क्लेम किया जा सकता है, जबकि इनकम टैक्स एक्ट 80सी के तहत प्रिंसिपल अमाउंट पर 1.5 लाख तक का क्लेम किया जा सकता है.

किन बातों का रखें ख्याल

बैंक लोन देने से पहले आवेदक का सिबिल स्कोर जांचता है. ज्वाइंट होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले बैंक दोनों आवेदकों का सिबिल स्कोर देखता है. सिबिल स्कोर अच्छा न होने की स्थिति में लोन मिलने में परेशानी हो सकती है. साथ ही टैक्स छूट पाने के लिए जरूरी है कि दोनों आवेदक ईएमआई का एक साथ भुगतान करें. आपको बता दें कि यदि एक व्यक्ति ईएमआई का भुगतान करता है तो दूसरा आयकर में छूट का दावा नहीं कर सकता है.

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