इन स्मार्ट तरीकों को अपनाकर आप भी बचा सकती हैं पैसे

By Grihshobha team | 13 September 2017

दिन पर दिन महंगाई इस कदर बढ़ रही है कि थमने का नाम नहीं ले रही है, और ऐसे में घर संभालना मुश्क‍िल होता जा रहा है. घर का किराया, बच्चों की फीस, पेट्रोल, ईएमआई और इसी तरह के दूसरे बिल का भुगतान करने के बाद महीने के अंत में बचत के नाम पर कुछ भी नहीं रह जाता.

ऐसे में सेविंग की बात सोचना भी मुश्किल जान पड़ता है लेकिन अगर आप स्मार्ट शौपिंग करना जानती हैं तो यकीन मानिए कुछ बचत आप कर ही लेंगी. यूं तो हर किसी की खरीदारी का अपना तरीका होता है लेकिन ये कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप अपनी बचत को बढ़ा सकती हैं.

बाजार जाने से पहले सामानों की लिस्ट बना ले

लिस्ट बनाकर खरीदारी करना एक बेहतर विकल्प है. बिना लिस्ट बनाए खरीदारी पर जाने से हम अक्सर ऐसी चीजें खरीद लाते हैं जिनकी हमें जरूरत भी नहीं होती है. और कई बार हम एक्स्ट्रा सामान खरीद लेते है जिनकी शाद हमें कोई जरुरत नही होती या फिर खरीदने के बाद हम उस सामान के लिये अफसोस करते है कि ये नही लेना चाहिये था.

पहले ही बजट तय कर लें

आजकल क्रेडिट कार्ड का जमाना है. क्रेडिट कार्ड से शौपिंग करने के दौरान हमें खर्चे का अंदाजा नहीं रहता. ऐसे में अच्छा रहेगा कि हम घर से ही खर्च का एक मोटा-मोटा अनुमान बनाकर जाएं और कैश से शौपिंग करें. इससे हम अपने होने वाले खर्चे का सही सही अंदाजा लगा पायेंगे.

स्मार्ट बनें

आजकल मेगा स्टोर प्रचलन में हैं जहां तरह तरह के औफर चलते रहते हैं. मसलन, एक के साथ एक फ्री या फिर छूट. कोई भी सामान लेने से पहले अगर ऐसे औफर दिख जाएं तो उन्हीं का चयन करना चाहिए. जरुरी नहीं की हर सेल में खराब ही समान मिलता हो, कई बार अच्छे सामान भी होते हैं तो हमें इन चीजों पर खास ध्यान रखना चाहिये ताकि पैसे की सेविंग हो सके

दिखावे से बचें

दिखावा करने से बचना चाहिए. ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि ब्रांडेड चीजें  ही सबसे अच्छी होती है और अगर आपने वही चीज लोकल मार्केट से ले ली तो आपकी बेइज्जती हो जाएगी. कई बार ऐसा होता है कि हम मेगा स्टोर से महंगा सामान खरीद लाते हैं, जबकि वही सामान आधी कीमत पर लोकल मार्केट में उपलब्ध होता है. और हम दिखावे के चक्कर अपने पैसो को फालतू खर्च कर देते हैं.

नकल ना करें

कई बार ऐसा होता है कि हमें दूसरों के घरों की कुछ चीजें काफी पसंद आ जाती हैं और हम उन्हें अपने घर का हिस्सा बनाने का फैसला कर लेते हैं. ये कई बार गलत भी हो सकता है. जरूरी नहीं है कि जो सामान दूसरे के घर में अच्छा लग रहा हो, वो आपके घर की भी शोभा बढाए. देखा-देखी किसी मामले में सही नहीं और शौपिंग भी उससे जुदा नहीं है.

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