जौब चाहे छोटी हो या बड़ी, चुनौतियों का सामना तो करना ही पड़ता है, क्योंकि हर औफिस का काम का तरीका अलग होता है, जिस को समझने व उस के साथ सामंजस्य बैठाने में नए कर्मचारी को काफी मेहनत व समझदारी से काम लेना पड़ता है. जरा सी चूक नौकरी के लिए खतरा बन जाती है, साथ ही कर्मचारी को आर्थिक परेशानियों में भी डाल देती है.

जौब हर व्यक्ति के लिए ऐसे अनुभव की तरह है, जिसे वह हमेशा याद रखता है. एक फ्रैशर का फर्स्ट जौब में चुनौतियों से सामना होना आम बात है, क्योंकि औफिस कल्चर से वह पहली बार मुखातिब होता  है. काम के दौरान अकसर विपरीत परिस्थितियों से गुजरना पड़ताहै. आप यदि परेशानी से बचना चाहते हैं और औफिस में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं, तो आप को कुछ सुझावों पर अमल करना होगा :

समय के पाबंद बनें

समय पर औफिस पहुंचें. जौब  में तरक्की पाने के लिए समय का पाबंद होना बहुत जरूरी है. औफिस समय से 10 मिनट पहले पहुंचें. इस से आप हड़बड़ी से बच सकेंगे और अपनी मेज, कंप्यूटर व जरूरी फाइलें ठीक से देख कर अपना काम सुचारु ढंग से कर सकेंगे. आप का समय पर औफिस पहुंचना आप की तरक्की के द्वार खोलेगा.

सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं

सकारात्मक सोच के साथ जौब की शुरुआत करें. यह आप को ऊर्जावान के साथसाथ प्रगतिशील भी बनाती है. याद रखें, कोई भी कार्य संपन्न करने के लिए व्यक्ति को सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए. सकारात्मक सोच हमेशा व्यक्ति को उत्साहित करती है और टीमभावना को बढ़ावा भी देती है.

मालिनी श्रीवास्तव एक पब्लिकेशन हाउस में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं. मालिनी को उन की व्यवहारकुशलता व सकारात्मक सोच ने समय से पहले पदोन्नति दिलाई. वे किसी भी कठिन से कठिन काम को अपनी सकारात्मक सोच से आसानी से कर लेती हैं.

सुव्यवस्थित रहें

यदि आप निरंतर तरक्की का मार्ग प्रशस्त करना चाहते हैं तो इस के लिए आप को अपना काम सुव्यवस्थित तरीके से करना होगा. अपने काम को प्राथमिकता दें. बौस से प्रतिदिन मिलने का प्रयास करें तथा नएनए विषयों पर विचारविमर्श करें. काम की सूची अवश्य बनाएं. प्रमुख कार्यों को पहले करें. सूचीबद्ध तरीके से काम करना आसान होता है.

निरीक्षण करें

हर औफिस व कंपनी की अपनी एक खास कार्यप्रणाली होती है. आप पहले जहां काम करते थे, वहां की और वर्तमान औफिस की कार्यशैली में काफी अंतर दिखेगा. इसलिए वर्तमान औफिस के क्रियाकलापों और नियमकायदों का गहराई से निरीक्षण करें. औफिस मीटिंग्स पर खास ध्यान दें. उन में कार्यक्षमता व कार्यकुशलता बढ़ाने के सुझाव अवश्य दें.

बौस मीटिंग में क्या कह रहा है, उस पर ध्यान दें. सहकर्मियों के साथ वार्त्तालाप कैसा होना चाहिए, इस पर मनन करें. कंपनी की उन्नति के साथसाथ अपनी उन्नति के कार्यकलापों में भी विशेष रुचि दिखाएं.

हिचकिचाएं नहीं

औफिस में कुछ ऐसे काम भी करने पड़ते हैं, जिन की आप को पूरी तरह से जानकारी नहीं होती. इस स्थिति में अपने सहकर्मियों व सहयोगियों से जानकारी लें. जानकारी लेने में हिचकिचाएं नहीं. याद रखें, सहकर्मियों से छोटीछोटी जानकारियां लेना जिज्ञासा को जगाता है व काम में निपुणता लाता है .

अच्छा आचरण रखें

आप का आचरण आप की कमियों व अच्छाइयों को उजागर करता है. आप की चालढाल और बौडी लैंग्वेज से आप के स्वभाव का पता चल जाता है. धीरगंभीर चाल और चेहरे पर मुसकराहट आप को नए माहौल में ढालने में मददगार हो सकती है. आप की बौडी लैंग्वेज व आचरण ऐसा होना चाहिए कि सहकर्मी आप के साथ असहज महसूस न करें.

उदास और थके चेहरे का दूसरे व्यक्ति पर गलत प्र्रभाव पड़ता है. आप के चेहरे पर हर पल उत्साह और ऊर्जा झलकनी चाहिए. खुद को हमेशा ऐक्टिव रखें. अच्छा आचरण जहां आप को व्यवहारकुशल बनाता है, वहीं आप की तरक्की में काम भी आता है.

आत्मविश्वास

कोई भी कार्य संपन्न करने के लिए आत्मविश्वासी होना जरूरी है. यदि आप में आत्मविश्वास नहीं है तो फिर आप किसी भी काम को आसानी से नहीं कर सकते. इसलिए खुद में आत्मविश्वास जगाएं. ‘हां, मुझ में है दम’ इसी विश्वास के साथ अपने काम की शुरुआत करें.

माहौल समझें

औफिस में आजकल काफी राजनीति होती है. एकदूसरे से लड़ाईझगड़ा चलता रहता है. ऐसे माहौल में आप अपने काम पर खास ध्यान देने के साथसाथ अपने अगलबगल भी पैनी निगाह रखें. कौन आप का विश्वासपात्र है और कौन नहीं, इस पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि कुछ कलीग्स आप के साथ राजनीति कर सकते हैं. आप ऐसे लोगों से बच कर रहें, जो काम करने के बजाय अपने व्यर्थ के काम करते हों. ऐसे में अपने को नौर्मल रखें, बहस में पड़ने के बजाय काम से मतलब रखें.

उपर्युक्त सुझावों को ध्यान में रखने  पर आप की जौब अच्छी तो चलेगी ही, साथ ही आप तरक्की की सीढि़यां भी चढ़ते जाएंगे.