भ्रामक सेल के जाल में न फंसे

By Parul Bhatnagar | 19 June 2017
भ्रामक सेल के जाल में न फंसे

जब डिस्काउंट इतना धांसू हो तो कोई भी इंप्रैस हुए बिना कैसे रह पाएगा, तभी तो अखबार में आए पंपलैट से सेल की बात पढ़ कर सुचिता खुद को रोक नहीं पाई और तुरंत अपनी फ्रैंड्स को फोन मिला कर इस बंपर सेल का फायदा उठाने का प्लान बना डाला.

सुचिता की यह बात सुन कर उस की सभी फ्रैंड्स फूली नहीं समाईं, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि इस के कारण वे कम बजट में ज्यादा चीजें जो खरीद पाएंगी. इस बात को ले कर वे इतनी ऐक्साइटिड थीं कि दिन में 12 बजे से पहले ही सेल वाली जगह पहुंच गईं. इतनी हड़बड़ाहट थी कि उन्होंने बिना सोचेसमझे ढेरों चीजें खरीद लीं और यह भी नहीं सोचा कि इस की उन्हें जरूरत है भी या नहीं.

खरीदारी कर जब घर आ कर देखा तो अधिकांश कपड़े डिफैक्टिड थे और कई चीजें ऐक्सपायरी हो चुकी थीं, जिसे देखना वे भूल गई थीं, लेकिन अब पछतावे के सिवा उन के पास कुछ नहीं था, क्योंकि ऐक्सचैंज का कोई औप्शन नहीं था.

सभी सुचिता को कोस रही थीं, लेकिन कहते हैं न कि अब पछताए होत क्या जब चिडि़या चुग गई खेत. ऐसे में उन्होंने सबक लिया कि आगे से कभी सस्ते के चक्कर में डिस्काउंट देने वाली ऐसी भ्रामक सेल के जाल में नहीं फंसेंगी.

आप के साथ भी ऐसा कुछ न हो, इसलिए चाहे टीवी पर डिस्काउंट के नाम पर आप को फंसाने की कितनी भी कोशिश की जाए, आप उस में न फंसें.

क्यों है डिस्काउंट का लालच भ्रामक

खराब चीजें मिलती हैं

अकसर सेल में वही चीजें बेची जाती हैं जो बिक नहीं रही होतीं, ऐसी चीजें या तो औफ फैशन होती हैं या फिर उन में कोई न कोई डिफैक्ट होता है, लेकिन इस बात से आप अनजान रहते हैं.

ऐसा ही सोहिका के साथ हुआ. वह एक शू शौप में बाहर सेल का बैनर देख कर बड़ी खुशीखुशी अंदर घुसी.

अंदर जा कर देखा तो एक से बढ़ कर एक सैंडिल, चप्पलें थीं जिन्हें देख कर वह खुद को रोक न पाई और एकसाथ 3 जोड़ी चप्पलें खरीद लीं, लेकिन जब उन्हें यूज किया तो पता चला कि वह बहुत स्लिप हो रही थी जिसे 2 बार भी बड़ी मुश्किल से पहना गया, ऐसे में खुद पर गुस्सा उतारने के सिवा उस के पास कोई रास्ता नहीं था, लेकिन एक बार को तो वह सेल के नाम पर लुट ही गई थी.

डिस्काउंट के नाम पर फूल बनाने की कोशिश

डिस्काउंट के नाम पर फंसा कर आप को अकसर फूल बनाया जाता है, क्योंकि तब आप यह भूल जाते हैं कि कोई भी दुकानदार अपना नुकसान कर के आप को कोई चीज नहीं बेचेगा. अकसर होता यह है कि पहले से ही चीजों के प्राइज बढ़ा दिए जाते हैं, लेकिन आप को लगता है कि एक के साथ एक फ्री मिल रहा है तो इस का मतलब हमें काफी फायदा हो रहा है.

अगर आप त्योहारों के समय लगने वाली सेल पर गौर करें तो आप को पता चल जाएगा कि चीजों के जो रेट फैस्टिवल सेल में लगे होते हैं वे पहले की तुलना में डबल होते हैं, जिस का नुकसान सिर्फ और सिर्फ ग्राहक को होता है. इसलिए समझदार बन कर शौपिंग करें न कि फूल बन कर आ जाएं.

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