गृहशोभा विशेष

अगर गाय आप का खेत चरने लगे तो खेत को नष्ट करोगे या गाय को मार भगाओगे? बलात्कार के मामले में धर्मप्रचारकों का कहना है कि बलात्कारी तो गायों की तरह पूजनीय हैं, जिन्हें न पकड़ा जा सकता है और न ही मारा. उन्होंने चर लिया तो गलती किसान की है कि उस ने खेत बोया या बिना पहरेदारी के छोड़ दिया. बलात्कारियों को सब से बड़ा बल धर्म के उन पैरोकारों से मिलता है, जो समयसमय पर कहते रहते हैं कि बलात्कारों के लिए औरतें जिम्मेदार हैं, क्योंकि वे भड़काऊ पोशाकें पहनती हैं.

आजकल बलात्कार होते हुए बहुत से भारतीय वीडियो सोशल मीडिया में घूम रहे हैं और उन में आमतौर पर जबरन जोरआजमाइश उन लड़कियों से होती दिखती है, जो गांवों की हैं, खेतों में से गुजर रही हैं और बदन पर पूरे कपड़े पहने हुए हैं. इसी तरह भगवा दुपट्टा पहने उन लड़कों के भी वीडियो सोशल मीडिया में खूब चल रहे हैं, जो नैतिकता थोपने के बहाने जोड़ों पर हमला कर रहे हैं. इन में भी लड़कियों की पोशाकें भड़काऊ नहीं हैं. दोनों तरह के वीडियोज में एक समानता यह है कि कानून हाथ में लेने वाले एक तरह का सा व्यवहार कर रहे हैं. 2-4 लड़के मिल कर प्रेम करते जोड़े की कभी ऐंटीवैलेंटाइन डे के नाम पर तो कभी लव जिहाद के नाम पर पिटाई कर रहे हैं. ये वही हैं जो बलात्कार जैसे कांड करते हैं.

धर्म और संस्कृति की रक्षा के नाम पर एक अघोषित सेना खड़ी कर ली गई है, जो कहीं भी किसी को भी शिकार बना लेती है. वे सदियों से पेशेवर डकैती करतेकरते सैनिक बने लड़ाकों की तरह हैं. पहले के राजा डकैतों को अपनी सेना में शामिल कर उन्हें लूट और दुश्मन की औरतों को भोगने की इजाजत देते थे. अब अघोषित सेना तैयार हो रही है जो गौरक्षा, संस्कृति रक्षा व धर्म रक्षा के नाम पर उत्पात मचाती है और गुंडे तत्त्व इसी में शामिल हैं. इन्हें बोनस में मारपीट का हक मिलता है और बलात्कार करें तो पुलिस मामला दर्ज नहीं करती. बलात्कार औरतों की प्रगति को रोकने का सब से बड़ा हथियार बना हुआ है. उन्हें घरों में बंद करना है, तो उन में बलात्कार का हौआ बैठा दो. उन्हें बता दो कि बलात्कार के दौरान शारीरिक कष्ट तो होगा ही, बाद में समाज दोषी भी उन्हें ही मानता रहेगा.

संस्कृति, धर्म, रीतिरिवाजों का रातदिन गुणगान करने वाले धर्म के रक्षक, जिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं सब से ज्यादा मुखर हैं, क्यों नहीं बलात्कार की पीडि़ता को वह सामाजिक स्तर दिलाने को बोलते, जो पत्थर की मूर्तियों और सिर्फ भैंसों की तरह दूध देने वाली गायों को दिलाने के लिए रातदिन बोलते नहीं थकते? वे भी उसी पुरातनपंथी सोच को मूक समर्थन दे रहे हैं कि बलात्कार की दोषी तो लड़कियां ही हैं.

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