किस्मत बदलवा लो किस्मत

By Birendra Bariyar Jyoti | 13 November 2017
किस्मत बदलवा लो किस्मत

चश्मे के अंदर से झांकती घाघ नजरों से हमारा हाथ देख पहले तो वे मुसकराए फिर भौंहें सिकोड़ीं, तब कहा, ‘‘आप का हाथ तो टैक्निकल  हैंड है. क्या करते हैं आप?’’

‘‘जी, मैं... मैं...’’ मेरी बात को बीच में ही काट कर ज्योतिषी महोदय बोल पड़े, ‘‘आप का हाथ तो बता रहा है जजमान कि आप इंजीनियर या वैज्ञानिक हैं.’’

‘‘जी पंडितजी, मैं तो किरानी हूं,’’ मुझे यह कहते हुए काफी शर्म आई. कि मेरे हाथ में इंजीनियर बनना लिखा है और यह हाथ किरानीगीरी कर रहा है.

अपनी बात गलत होती देख पंडितजी ने फिर चश्मे के अंदर से मेरे हाथों को घूरा. उलटपलट कर देखा. अपनी ज्योतिष विद्या को गलत साबित होता देख कहने लगे, ‘‘यह मैं नहीं बोल रहा हूं श्रीमान, आप के हाथों की रेखाएं कह रही हैं. आप के हाथ के हिसाब से तो आप को इंजीनियर ही होना चाहिए था. पूरी तरह टैक्निकल हैंड है आप का तो.’’

हम ने पूछा, ‘‘लेकिन पंडितजी, हाथ में लिखा आखिर गलत कैसे हो गया?’’

‘‘अच्छा यह बताइए कि कभी इंजीनियरिंग में दाखिले की तैयारी की थी क्या?’’

‘‘नहीं, पंडितजी, मैं तो शुरू से आर्ट्स का स्टूडैंट रहा. कभी इंजीनियर बनने की सोची ही नहीं. इस की स्पैलिंग भी याद नहीं की.’’

पंडितजी लैंस के जरिए फिर मेरा हाथ देखने लगे और थोड़ी देर बाद कहा, ‘‘अरे, घबराते क्यों हो?  किरानी का काम करना भी तो एक टैक्निक है. वही तो मैं सोच रहा था कि गलती कहां हो रही है,’’ पंडितजी अपनी विद्या को सही साबित करने का हथकंडा अपनाने में लग गए. साफ है कि उन्हें दक्षिणा जो लेनी थी. हम ने मन ही मन सोचा, ‘जब हर काम एक टैक्निक है तो हर हाथ भी टैक्निकल है, तो फिर पंडितजी ने मेरे हाथ को टैक्निकल हैंड क्यों बताया?’ दरअसल, यह ज्योतिषियों की आजमाई हुई सफल टैक्निक है. हर हाथ दिखाने वालों को वे कुछ रटेरटाए वाक्य सुना देते हैं जो कमोबेश हर आदमी पर फिट हो जाते हैं. हाथ दिखा कर अपना भविष्य जानने वाले भी आंखें फाड़े पंडितजी की ज्योतिष विद्या के कायल हो जाते हैं या कहिए कि उन के जाल में फंस जाते हैं.

हर ज्योतिषी अपने क्लाइंट से कहेगा, ‘आप टैंशन बहुत लेते हैं, टैंशन मत लिया कीजिए.’ यह बात तो दुनिया के हर आदमी पर फिट बैठ सकती है. किसी को जरूरत से ज्यादा पैसा होने का टैंशन है तो किसी को दो वक्त की रोटी नहीं जुटने का टैंशन है. और टैंशन कोई खेल तो है नहीं कि आदमी सोचविचार कर ले बैठता है. अरे, आदमी के आसपास, घर, दफ्तर के हालात तनावपूर्ण होते हैं तो वह टैंशन में रहेगा ही.

हर किसी पर फिट होने वाला एक और जुमला है, जिसे भविष्य बांचने वाले काफी उपयोग में लाते हैं, ‘आप जो चाहते हैं वह आप को मिल नहीं रहा है.’ यह बात भी हर आदमी पर फिट बैठती होती है. हर आदमी जितना चाहता है उतना उसे कभी नहीं मिलता, क्योंकि समय के साथसाथ पाने की लालसा भी बढ़ती जाती है. चाहे टाटा हो, बिड़ला हो या अंबानी हो, भिखारी हो या किरानी किसी की भी इच्छाएं कभी पूरी हुई हैं क्या?

ज्योतिषियों द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले कुछ और जुमले हैं, जैसे ‘आप को बहुत जल्द गुस्सा आता है’, ‘आप के औफिस में कुछ खटपट चल रही है’, ‘भाई से हमेशा तनातनी रहती है’, ‘घर खरीदना चाह रहे हैं आप’ आदि. इस तरह की गोलमोल बातें भी हर किसी पर फिट बैठ सकती हैं. तोता ज्योतिषी हो या कंप्यूटर ज्योतिषी, हर कोई यह जुमला बोल कर धंधा चला रहा है.

अपनी बातों को सही साबित करने के लिए ज्योतिषी पलटी मारने में माहिर होते हैं. अपनी कही बातों को सही ठहराने के लिए उन के पास कई तर्क या कहिए कुतर्क होते हैं. एक वाकेआ है. हमारे एक मित्र पुलिस अफसर हैं. उन्होंने एक रोज हम से कहा, ‘‘भाई, कमाईधमाई कुछ ठीक नहीं हो रही है, कोई पंडितवंडित है जो हाथ देख कर ग्रहदशा सुधार दे.’’ मैं उन्हें एक ज्योतिषी के पास ले गया. पंडितजी ने पुलिस अफसर के हाथ और कुंडली में कम उन के ओहदे में ज्यादा रुचि दिखाई. पहले तो मीठीमीठी बातें कीं फिर हाथ देख कर बोले, ‘‘1 महीने के अंदर आप के सारे कष्ट दूर होने वाले हैं. बस, एक रुद्राक्ष की माला पहन लें और 5 रत्ती का नीलम धारण कर लें.’  मित्र ने पंडितजी को मोटी दक्षिणा दी और बाजार से रुद्राक्ष और नीलम खरीद लाए. करीब 10 हजार रुपए का चूना लग गया पर फिर भी बेचारे अफसर की पोस्टिंग मलाईदार जगह पर नहीं हो पाई.

दोबारा पंडितजी की शरण में पहुंचे. पंडितजी सारी बातें सुन कर मुसकराए और कहा, ‘‘घबराते क्यों हैं श्रीमान? ग्रहों की दशा तो बदल गई है. अरे, ग्रहों के ट्रांसफरपोस्ंिटग में कुछ समय तो लगेगा ही न. आप लोगों में नहीं होता है क्या? तबादला होने के बाद नई जगह जौइन करने में डेढ़दो माह तो लग ही जाते हैं. यही हाल ग्रहों का भी है. हो सकता है कि कोई ग्रह नई जगह जाने को तैयार नहीं हो रहा हो? ’’

पंडित के इस कुतर्क से अफसर मित्र अवाक् रह गए. मानो ग्रहनक्षत्र न हुआ कोई सरकारी अफसर हो गया, जिसे इधरउधर होने में महीना दो महीना लग जाता है. वहीं कुंडली बनाते समय या भविष्य बांचते समय ये पंडित एकएक सेकंड का हिसाबकिताब मांगते हैं. किसी बच्चे के जन्म के समय में सेकंडों का ध्यान रखने पर जोर देते हैं. एक मित्र का प्रोमोशन नहीं हो रहा था. वह भी अपना जीवन चमकाने एक बाबा के यहां जा पहुंचा. कुंडली देख बाबा बोल पड़े, ‘‘आप को तो राजयोग है.’’ मित्र ने कहा, ‘‘कहां बाबा? एक प्रोमोशन तक नहीं हो रहा है. हम से जूनियर का प्रोमोशन हो गया.  मेरा ही मामला लटका हुआ है.’’

बाबा की पंडिताई जाग उठी, ‘‘वह सब तो दिख रहा है बच्चा,  तुम्हारे भाग्य और इनकम का स्वामी शुक्र है. वह काफी कमजोर है. उसे ताकत देने की जरूरत है.’’

मित्र ने उम्मीद भरी नजरों से बाबा को देखा, ‘‘कोई उपाय बताइए, बाबा?’’

बाबा ने कहा, ‘‘हीरा धारण कर लो तो तुम्हारी किस्मत ही पलट जाएगी.’’

‘‘इतना रुपया कहां से लाएं?’’ मित्र ने अपनी मजबूरी बताई. बाबा अड़े रहे, ‘‘किस्मत पलटने के लिए हीरा पहनना जरूरी है.’’

बेचारा मित्र अपनी किस्मत को ठोकता हुआ घर पहुंचा. मित्रों से सलाह ली. जौहरी के पास जा कर हीरे की कीमत पूछी. पता चला कि 80 हजार लगेंगे. मित्र का मन हुआ कि कुछ फिक्स्ड डिपौजिट है, उसे तुड़वा कर हीरा ले लिया जाए. हम ने उस से कहा कि जो भी थोड़ाबहुत रुपया जमा कर रखा है उसे भी खर्च कर दोगे तो क्या खाक किस्मत पलटेगी? भला हो उस मित्र का जो पंडित के बहकावे में फंसने से बच गया और ऐन वक्त पर बल्ला खींच लिया.

वैसे ज्योतिष विद्या के अधकचरे ज्ञान के फायदे भी खूब हैं. किसी का भी हाथ देख कर कुछ उलटासीधा बता कर अपनी पंडिताई का झंडा आसानी से गाड़ लिया जाता है. बौस ऐसे मुलाजिम के आगे हाथ फैलाए रहता है, ‘‘अरे यार नरेश, सुना है हाथ देखते हो? जरा मेरा भी हाथ देख कर आगापीछा बताओ.’’ नरेशजी भी अकड़ कर कहेंगे, ‘‘जी सर, थोड़ाबहुत जानता हूं. काम से फुरसत मिले तब न.’’

बौस उसे घर आने का न्यौता देता है और फिर उस के बाद बौस की किस्मत चमके या न चमके, नरेश की किस्मत तो वाकई चमक उठती है. बौस का करीबी होने के बेइंतहा फायदे हैं, भई. हर मुलाजिम बौस की चमचई छोड़ उस के आगेपीछे घूमने लगता है. कोई पैरवी हो, तबादला रुकवाना हो, वेतन बढ़वाना हो, ऐसे कामों के लिए नरेश जैसे लोगों की पूछ काफी बढ़ जाती है.

दानदक्षिणा, पत्थरों से किस्मत बदलने का दावा करने वाले पंडितों का एकसूत्री मकसद होता है, क्लाइंटों की जेबें हलकी करना. कभीकभी क्लाइंटों के फेर में ज्योतिषी भी फंस जाते हैं. ये वे क्लाइंट होते हैं जो किस्मत तो बदलवाना चाहते हैं पर उस के एवज में फूटी कौड़ी भी खर्च करना नहीं चाहते. किस्मत का मारा एक आदमी पंडित के पास पहुंचा. सब देखसुन कर पंडित ने कहा, ‘‘बेटा, नीलम धारण कर लो, किस्मत पर लगे ताले खुल जाएंगे.’’

‘‘इतने पैसे कहां हैं, पंडितजी? इतना ही धन रहता तो आप के पास आते ही क्यों?’’ क्लाइंट ने कहा.

‘‘तो लाजवर्द पहन लो, 200-300 रुपए में आ जाएगा.’’

‘‘इतना भी नहीं है, बाबा. कोई और उपाय बताइए?’’

‘‘जा, एक जड़ी देता हूं. 50-60 रुपए में काम हो जाएगा.’’

‘‘50-60 रुपए भी नहीं हैं, बाबा.’’

‘‘इतना भी नहीं है तो जा बेटा, शनि या राहु तेरा क्या बिगाड़ लेगा. जब तेरे पास कुछ है ही नहीं तो खोएगा क्या?’’

पंडितजी अपनी बंसी में चारा लगा कर दरवाजे की ओर देखने लगते हैं, किसी नई मछली को फंसाने की उम्मीद से. मन ही मन हांक लगाते हैं, ‘किस्मत बदलवा लो, किस्मत.’

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