औन्ली मेल नो मिलाप

– लक्षण :  इस रोग से ग्रस्त रोगी को न तो मेल पसंद होता है और न ही फीमेल. उन्हें सिर्फ ईमेल पसंद होता है. बातबात पर ईमेल करते हैं, चाहे उस की आवश्यकता हो या न हो.

– कारण :  इस रोग के रोगी मेलमिलाप में बहुत यकीन रखते हैं उन की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है, ईमेल करना. इन का मानना है कि ईमेल नहीं होता फेल.

– बचाव :  अभी तक आई रिपोर्टों के अनुसार, ये रोग उतना गंभीर नहीं होता है जितना यह महसूस होता है. इस कारण अभी तक इस के लिए कोई वैक्सीन या दवा ईजाद नहीं हुई है. जरा सी सावधानी से ही इस रोग से बचा जा सकता है.

सैल्फीमेनिया

– लक्षण :  इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति किसी भी स्थान पर अजीबअजीब मुखमुद्राओं और भावभंगिमाओं में पाया जा सकता है. कभी बाल खोल कर, कभी सन ग्लासैस चढ़ा कर, कभी किसी टीले या पेड़ पर चढ़ कर, कभी दरवाजे पर लटक कर तो कभी खिड़की से झांक कर रोगी को सैल्फी लेते हुए पाया जा सकता है.

कारण :  इस रोग से ग्रस्त रोगी

को स्वयं को भिन्नभिन्न मुद्राओं व भावभंगिमाओं में देखना और दिखाना बहुत पसंद आता है. इस पर जमाने को दिखाना है की कहावत चरितार्थ होती है.

– बचाव :  इस रोग से बचाव के लिए अभी शोध चल रहा है, निकट भविष्य में वैक्सीन और दवाएं बनने की संभावनाएं हैं.

गेम में गुम

– लक्षण :   इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति कभी भी खाली नहीं दिखाई पड़ते हैं. हर वक्त इन की उंगलियां मोबाइल पर नाचती दिखती हैं. गेम जीतने पर इन के चेहरे पर किला फतह करने जैसे भाव साफ दिखाई देते हैं. इन्हें ‘आज मैं आगे, जमाना है पीछे…’ वाले भाव से हर वक्त लबरेज देखा जा सकता है.

– कारण :  इन के पास समय बहुतायत में होता है और करने के लिए बहुतकुछ नहीं होता है. इस कारण ‘डू नथिंग बट लुक बिजी’ नामक ग्रंथि से ये ग्रस्त हो जाते हैं. यही वजह है कि यह रोग इन्हें आसानी से अपनी चपेट में ले लेता है.

– बचाव :  इस रोग से बचाव के लिए जो वैक्सीन बनाई गई है, उस का नाम है बिजी ओ सिन. इस वैक्सीन के प्रभाव से यह रोग धीरेधीरे कम हो कर समाप्त हो जाता है.

एसएमएस का ओआरएस

– लक्षण :  घर में, औफिस में, रास्ते में, बस में, पार्टी में या एकांत में मोबाइल पर उंगलियां चलाते हुए

देख सकते हैं इस रोग से ग्रस्त व्यक्तियों को. इन का स्लोगन है ‘उंगली पर है सारा जमाना.’

– कारण :  अपनी छोटीछोटी चीजों के लिए फोन पर बातें करना इन्हें पसंद नहीं होता और मैसेज के सहारे वे अपना हालेदिल बयान करते हैं.

– बचाव :  ‘टौकोसिन’ नामक वैक्सीन इस रोग के लिए  असरकारी व प्रभावकारी साबित हो सकती है.

चैटिंग चैंप

– लक्षण :  इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति का किसी भी कार्य में मन नहीं लगता. वह बाहरी दुनिया व समाज से कटाकटा रहता है. इस के लिए चैटिंग बिना ‘जग सूनासूना लागे…’ वाली स्थिति रहती है.

– कारण :  इस रोग के रोगी थोड़े शर्मीले होते हैं जो बोल कर नहीं, बल्कि अपने मनोभावों को चैटिंग के जरिए ही बयान कर सकते हैं, जो धीरेधीरे लत बन जाती है और यह लत कब आदत बन कर इस महारोग में तबदील हो जाती है, इस का पता ही नहीं लग पाता है.

– बचाव :  इस रोग से बचाव के लिए भी ‘टौकोसिन’ नामक वैक्सीन असरकारी साबित हो सकती है.

हमारे कई शोधकर्ता अभी भी इस दिशा में नएनए शोध कर रहे हैं जिन का खुलासा निकट भविष्य में होने की पूरीपूरी संभावनाएं हैं. जय इंटरनैट, जय इंटरनैट…