शहरी दौड़ भाग से दूर पहाड़ों की शांत वादियों में घूमने का मजा ही कुछ और है. हिमालय की पहाडि़यों पर स्थित कुल्लू, मनाली, रोहतांग व लेह महत्त्वपूर्ण स्थान हैं. पहाड़ी विरासत लिए यहां के पहाड़ भारतीय संस्कृति में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं. यहां का मौसम गरमी में हलका ठंडा रहता है इसलिए गरमी की छुट्टियों में शहरी लोग गरमी से बचाव के लिए भी यहां का रुख करते हैं. प्रकृति की अद्भुत छटा बिखेरते ये इलाके आप को बारबार यहां आने को आमंत्रित करते हैं.

आप यदि हिमालय की ओर का रुख कर रहे हैं तो किसी एक शहर को घूमने के बजाय एक कौरिडोर को कवर कीजिए जैसे कुल्लू, मनाली रोहतांग व लेह. जिन के एक ही रूट पर होने के कारण आप को यहां पहुंचने में आसानी भी होगी और आप को घूमने के लिए कई दर्शनीय स्थल भी मिल जाएंगे.

कितनी दूरी पर कौन सी जगह

  • कुल्लू से मनाली की दूरी लगभग 42 किलोमीटर.
  • मनाली से रोहतांग की दूरी लगभग 51 किलोमीटर.
  • रोहतांग से लेह की दूरी लगभग 421 किलोमीटर.

पहला पड़ाव कुल्लू

कुल्लू व्यास नदी के किनारे बसा एक बहुत ही खूबसूरत पर्यटन स्थल है. यह समुद्रतल से 1,230 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहां हमेशा ही पर्यटकों का हुजूम उमड़ा रहता है. कलकल करती नदियां, सेब के बागान और ऊंचेऊंचे पहाड़ देख किस का मन इस जगह पर बारबार आने को नहीं करेगा.

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देखने लायक स्थान

ऐंडवैंचर स्पोर्ट्स का मजा : व्यास नदी में रोमांच से भरपूर वाटर राफ्टिंग का मजा लेने के साथसाथ आप ट्रैकिंग का भी मजा ले कर खुद के ऐंडवैंचर शौक को पूरा कर सकते हैं.

ग्रेट हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान : ग्रेट हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान को जवाहरलाल नेहरू ग्रेट हिमालयी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भी जाना जाता है. 765 वर्ग किलोमीटर में फैलने के साथ ही यह अपनी जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है. इस पार्क को 1999 में राष्ट्रीय पार्क घोषित किया गया था.

पंडोह डैम : कुल्लू गए और आप ने पंडोह डैम नहीं देखा तो क्या देखा. यहां आ कर आप को पानी से घिरी पहाडि़यां देख कर कुछ देर ठहरने को दिल करेगा. इस जगह आ कर आप जी भर कर फोटोग्राफी कर सकते हैं.

दूसरा पड़ाव मनाली

बर्फ से ढके पहाड़, पहाड़ों से बहते झरने और देवदार के घने जंगल, ये खूबसूरती लोगों को बारबार अपनी ओर खींचती है. यहां पहुंचने के लिए आप को कुल्लू से 42 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा.

हिडिंबा मंदिर : यह डुंबरी वन में स्थित है जो चारों तरफ से देवदार के पेड़ों से घिरा है.

सोलंग वैली : यह घाटी मनाली से मात्र 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां पर समर और विंटर ऐक्टिविटीज जैसे पैराग्लाइडिंग, पैराशूट, हौर्स राइडिंग, स्कीइंग आदि को पर्यटक खूब एंजौय करते हैं.

राहाला वाटरफौल : यह मनाली से 16 किलोमीटर दूर स्थित है. इस वाटरफौल के चारों ओर फैले देवदार के पेड़ मन को अलग ही सुकून देते हैं.

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नेहरू कुंड : इस कुंड पर हमेशा ही पर्यटकों की भीड़ उमड़ी रहती है, क्योंकि प्रकृतिप्रेमी इस जगह को देखे बिना नहीं रह पाते.

वन विहार : यह स्थल पर्यटकों के साथसाथ यहां के स्थानीय लोगों के बीच भी काफी मशहूर है. यहां आप बोटिंग का लुत्फ उठा कर आनंद का अनुभव कर सकते हैं.

मणिकरण : मणिकरण, जिस की समुद्रतल से ऊंचाई लगभग 1,750 मीटर है, बेहद खूबसूरत है. यह स्थान गरम पानी के कुंड और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जानी जाती है. कहा जाता है कि यहां एक तरफ नदी में बहता ठंडा पानी है तो वहीं किनारे पर गरम पानी का कुंड है.

नागर किला : अगर आप पेंटिंग के शौकीन हैं तो इस किले में जाना न भूलें, क्योंकि यहां आप को रशियन आर्टिस्ट निकोलस रोरिक की अद्भुत व आकर्षक पेंटिंग्स देखने को मिलेंगी.

तीसरा पड़ाव रोहतांग

रोहतांग दर्रा 3,979 मीटर की ऊंचाई पर स्थित होने के साथ मनाली से 51 किलोमीटर दूर है. यहां तरहतरह की ऐंडवैंचरस ऐक्टिविटीज जैसे स्कीइंग, माउंटेन बाइकिंग, ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों को अंजाम दे कर पर्यटक काफी खुश होते हैं. यहां आ कर प्रकृतिप्रेमी ग्लेशियर्स और लाहौल घाटी से निकलने वाली चंद्रा नदी के खूबसूरत नजारों को देखना नहीं भूलते. यहां पहुंचने वाला रास्ता भी बेहद खूबसूरत है.

अंतिम पड़ाव लेह

लेह जम्मूकश्मीर के लद्दाख जिले का प्रमुख नगर है. यह समुद्रतल से 11,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. लेह चारों तरफ से खूबसूरत पहाडि़यों से घिरा है.

लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि यहां पहुंचने के बाद घूमने न निकलें बल्कि एक दिन पूरा रैस्ट करें ताकि आप वहां के वातावरण के हिसाब से खुद को ढाल कर इस ट्रिप को अच्छे से एंजौय कर पाएं.

पेंगौंग झील : यह झील समुद्रतल से 14,270 फुट की ऊंचाई पर स्थित है और यह लेह से कुछ ही दूरी पर है. यह बहुत ही खूबसूरत पारदर्शी झील है. आप को बता दें कि लद्दाख से आसमान कुछ ज्यादा ही नीला दिखाई देता है, इसलिए झील में उस का प्रतिबिंब साफ दिखाई देता है. पेंगौंग में सुंदरसुंदर छोटे से ले कर रौयल साइज के टैंट आसानी से उपलब्ध हैं.

शांति स्तूप : यह जगह समुद्रतल से 11,841 फुट की ऊंचाई पर है. इस की संरचना सफेद गुंबद की भांति है और इस की नक्काशी बेहद खूबसूरत है. यहां रात का नजारा कुछ और ही रहता है.

लेह पैलेस : यह पैलेस पूरी तरह मिट्टी का बना है. इसे 17वीं शताब्दी में राजा सेंगेज नामग्याल ने बनवाया था. इस पैलेस के ऊपर से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा देखने का रोमांच कुछ और ही रहता है.

मैग्नेटिक हिल : अकसर यहां आ कर पर्यटक महसूस करते हैं कि उन की गाड़ी ऊपर उठ रही है. आप भी इस जगह जा कर ऐसा फील करें, ताकि हमेशा याद रहे.

नुबरा वैली : नुबरा वैली हरियाली से भरी हुई है. यहां यदि आप गरमी में जा रहे हैं तो पूरी घाटी आप को पिंक और पीले फूलों से ढकी मिलेगी.

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चादर ट्रैक : यहां बहती जांस्कर नदी में बर्फ की ढकी चादर पर यात्रा करवाई जाती है जिसे चादर ट्रैक कहते हैं. इसे पर्यटक खूब एंजौय करते हैं.

हेमिस हाई एल्टिट्यूड वाइल्डलाइफ सैंचुरी : दुनिया में सब से ऊंची होने के साथ यह सैंचुरी साउथ एशिया का सब से बड़ा पार्क है. यहां पर स्नो तेंदुओं का वास है.

ऐंडवैंचरस ऐक्टिविटीज : यहां आ कर आप बाइकिंग, ट्रैकिंग जैसे रोमांचक विकल्पों का लुत्फ उठा सकते हैं. इस के लिए आप यहां आने  से कुछ दिन पहले से मौर्निंग व इवनिंग वौक करना जरूर शुरू करें ताकि आप की बौडी उस के लिए तैयार हो सके. यहां बहुत सारी मोनैस्टरीज भी हैं जहां आप जरूर जाएं.

फोतुला दर्रा : अगर आप लेह घूम चुके हैं और आसपास कोई और रोमांचक जगह देखना चाहते हैं तो श्रीनगरलेह राजमार्ग पर सब से ऊंचे दर्रे फोतुला का आनंद उठा सकते हैं.

कैसे पहुंचे

  • अगर आप हवाई जहाज से कुल्लूमनाली जाना चाहते हैं तो आप को भुंतर हवाईअड्डे पर उतरना पड़ेगा. आप चंडीगढ़ हवाईअड्डे पर उतर कर भी यहां पहुंच सकते हैं.
  • यदि आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो आप को जोगिंदर नगर रेलवे स्टेशन उतरना पड़ेगा, जो कूल्लू के काफी नजदीक है.
  • आप हिमाचल प्रदेश टूरिज्म की बसों द्वारा भी खूबसूरत पहाडि़यों का नजारा देख कर वहां पहुंच सकते हैं. कुल्लू पहुंचने के बाद आप वहां प्राइवेट गाड़ी कर के इन सभी स्थलों की सैर कर सकते हैं.
  • आप इन सभी जगहों के स्थानीय बाजार व स्ट्रीट फूड को भी एंजौय करें और अपने ट्रिप को यादगार बनाएं.

VIDEO : कलरफुल डॉटेड नेल आर्ट

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