भीषण गरमी के बाद जब मौनसून की पहली फुहार मुंबई और उस के आसपास के क्षेत्रों पर पड़ती है, तो पेड़पौधों, जीवजंतुओं से ले कर मनुष्यों तक सभी खुश हो उठते हैं. मौनसून में मुंबई और उस के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग वीकैंड में कुछ जगहों पर जाना बहुत पसंद करते हैं.

इस बारे में महाराष्ट्र टूरिज्म डैवलपमैंट कौरपोरेशन के संयुक्त प्रबंध निदेशक, सतीश सोनी कहते हैं कि महाराष्ट्र हमेशा टूरिज्म को बढ़ावा देता है. मौनसून में लोनावाला, माथेरान, भंडारदारा, मालशेज घाट आदि पर्यटन स्थल लोगों को सर्वाधिक पसंद हैं.

मौनसून में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की वजह महाराष्ट्र की जलवायु है, जो यहां घूमने आने वालों को अच्छा अनुभव कराती है. थोसेघर फाल्स, अंबोली घाट वाटर फाल्स, भांबावली वज्री वाटरफाल आदि बहुत प्रसिद्ध हैं. इन के अलावा कुछ और आकर्षक स्थल जैसे कुंडालिका वाटर राफ्टिंग, लौहगढ़ की ट्रैकिंग आदि भी मौनसून में आकर्षण का केंद्र बनते हैं. इन के साथसाथ इस समय समुद्र तट घूमने का भी अपना अलग ही मजा होता है.

मालशेज घाट

सहयाद्री रेंज पर स्थित यह हिल स्टेशन मौनसून में हरीभरी वादियों और झरनों के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन जाता है. यह माउंटेन पास अपनी खूबसूरती के लिए खासा मशहूर है. मालशेज घाट पुणे से 130 किलोमीटर दूर थाणे और अहमदनगर के बौर्डर पर स्थित है. यहां कई रिजोर्ट्स भी हैं.

लोनावाला और खंडाला

ये मुंबई से काफी नजदीक हैं. यहां लैंड और वाटर का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है. मौनसून में यह स्थान अपनी प्राकृतिक छटा को सब से अधिक बिखेरता है. यहां एअरपोर्ट नहीं है, इसलिए मुंबई या पुणे से रोड या ट्रेन से जाना पड़ता है. मुंबई से 83 किलोमीटर की यह दूरी तय करने के लिए ट्रेन और लग्जरी बसों की सुविधा उपलब्ध है.

भूसी डैम, राजमाची व्यूपौइंट और सैलिब्रिटी वैक्स म्यूजियम आदि खंडाला के घूमने योग्य स्थल हैं. यहां रहने के लिए महाराष्ट्र टूरिज्म के होटल के अलावा कई हौलिडे रिजोर्ट्स और होटल्स भी हैं.

मुलशी डैम

मूला नदी पर बने इस बांध तक मुंबई से केवल 3 घंटे की यात्रा कर पहुंचा जा सकता है. यह डैम पूरे महाराष्ट्र के लिए विद्युत उत्पादन का प्रमुख साधन है. मौनसून में डैम पूरी तरह भर जाता है. फलस्वरूप पानी के तेज बहाव से यहां इतना कुहरा होता है कि यहां चलते हुए व्यक्ति को बादल में चलने का एहसास होता है. यह नया पर्यटन स्थल है. इस के आसपास रहने की कई सुविधाएं उपलब्ध हैं.

कलसुबाई पीक

सहयाद्री रेंज की सब से ऊंची चोटी (5,400 फुट) पर स्थित कलसुबाई पीक को महाराष्ट्र का ऐवरेस्ट कहा जाता है. यहां स्थित कलसुबाई हरीशचंद्र गढ़ वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी काफी प्रसिद्ध है. पूरे साल यहां ट्रैकर्स आते हैं, पर मौनसून में इस की सुंदरता सब से अधिक है. मुंबई से यह 152.8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां रहने के लिए होटल्स और रिजोर्ट्स उपलब्ध हैं. इन में होटल परिचय, होटल राज पैलेस, यश रिजोर्ट, आदित्य लौज ऐंड विस्टा रूम्स आदि हैं.

भंडारदरा

भंडारदरा महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले में स्थित है. मुंबई से 185 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस स्थल के प्राकृतिक झरने, पर्वत शिखर, हरियाली, शांति और प्राचीन माहौल पर्यटकों का मन मोह लेता है. प्रवरा नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र आर्थर झील और रंधा झरने के लिए प्रसिद्ध है. यह क्षेत्र मौनसून में खास आकर्षण का केंद्र बन जाता है. मुंबई में भंडारदरा पहुंचने का सब से उचित माध्यम सड़क हैं.

अंबोली घाट

महाराष्ट्र का यह हिल स्टेशन 690 मीटर की ऊंचाई पर है. सहयाद्री हिल्स पर स्थापित यह स्थान विश्व का एकमात्र ‘इको हौट स्पोट्स’ के रूप में जाना जाता है. यहां की ‘फ्लोरा और फना’ की वैराइटी काफी अच्छी है. यहां पर पर्यटक मौनसून में ही घूमने आते हैं. मुंबई से 491 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस पर्यटन स्थल तक कार, टे्रन और बस द्वारा जाया जा सकता है.

यहां रहने के लिए अच्छे रिजोर्ट्स और होटल भी उपलब्ध हैं, जिन में वृंदावन रिजोर्ट, होटल सैली, साइलैंट वैली रिजोर्ट, महाराष्ट्र टूरिज्म आदि के होटल्स प्रमुख हैं. नानगरता झरना, केवलेश पौइंट, अंबोली झरना, शिरगांवकर पौइंट, माधवगढ़ फोर्ट आदि यहां देखने योग्य स्थल हैं.

करनाला

चारों तरफ हरीहरी वादियों और प्राकृतिक झरने से सुशोभित यह क्षेत्र मुंबई से केवल 80 किलोमीटर दूर स्थित है. मौनसून में यहां ट्रैकिंग आकर्षण का खास केंद्र होता है. यहां स्थित करनाला फोर्ट में देखने लायक कई दृश्य हैं.

कोलाड

मुंबई गोवा हाईवे से निकट स्थित कोलाड एक छोटा सा पर्यटन स्थल है, जो चारों तरफ से छोटीछोटी पहाडि़यों से घिरा है. कुंडालिका नदी पर स्थित यह स्थान मुंबई से 117 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां स्थित बांध से पानी छोड़ने के बाद कोलाड राफ्टर्स, मुंबई हाइकर्स, महाराष्ट्र टूरिज्म डैवलपमैंट कौरपोरेशन आदि राफ्टिंग का इंतजाम करते हैं.

थोसेगर फाल्स

मुंबई से नजदीक यह पर्यटन स्थल झरनों की खूबसूरती और फ्लौवर वैली के लिए प्रसिद्ध है. यहां के झरने 20 मीटर से ले कर 500 मीटर की ऊंचाई पर हैं. मौनसून में ये झरने शांत वातावरण में पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं. यहां पहुंचने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट या अपने वाहन का सहारा लेना पड़ता है. कास झील, फूलों से लदे कास पठार यहां देखने योग्य हैं.

लोहगढ़ फोर्ट

लोहगढ़ का किला मुंबई का सब से नजदीकी आकर्षक पर्यटन स्थल है. इस का इतिहास पुराना है. सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट यादव, बहमनी, निजाम, मुगल और मराठा आदि ने समयसमय पर यहां कब्जा किया. 3,390 फुट की ऊंचाई पर बना यह किला मौनसून में अपनी प्राकृतिक छटा बिखेरता है. यहां जाने वाले सभी रास्तों पर अलगअलग तरह की वनस्पति देखते ही बनती है. यह किला पुणे और मुंबई एअरपोर्ट से नजदीक है. यहां नजदीकी रेलवे स्टेशन मालावली है. लोनावाला और पुणे जाने वाली सभी ट्रेनों से यहां पहुंचा जा सकता है. मौनसून में ट्रैकिंग यहां खास है. इस के अलावा भाजा केव्स, कारला केव्स आदि भी देखने योग्य हैं. यहां ठहरने के लिए पुणे और आसपास कई होटल्स और रिजोर्ट्स हैं.