Awareness: रिंकी कालेज जाने के लिए जल्दीजल्दी तैयार हो रही थी. तभी फोन पर मैसेज का नोटिफिकेशन आया. उस ने देखा, किस का मैसेज है, देखते ही सिर पकड़ लिया, किचन में जा कर देखा, उस की मम्मी मधु एक हाथ से कलछी चला रही थीं, दूसरे हाथ में फोन था. रिंकी ने कहा, ‘‘मम्मी, अभी यह गुडमौर्निंग का मैसेज फैमिली गु्रप में भेजना इतना जरूरी था? आप का हाथ भी जल सकता है. ऐसी क्या आफत आती है. अभी बाकी रिश्तेदारों की भी गुडमौर्निंग शुरू हो जाएगी.
यह जो रोज गुडमौर्निंग की सुनामी आती है न, मैं तो थक गई हूं. मैं गु्रप छोड़ दूंगी.’’ ‘‘न, न, गु्रप मत छोड़ना. तेरी चाची, ताई सोचेंगी कि तुझे किसी से मतलब नहीं. एक तो तुम बच्चे लोग गु्रप पर कोई रिस्पौंस नहीं देते, बुरा लगता है.’’ ‘‘तो आप लोग कभी सोचना कि हम क्यों रिस्पौंस नहीं देते. पूरा दिन मैसेज ही तो फौरवर्ड करते हो आप लोग,’’ रिंकी बड़बड़ाती हुई चली गई. आज का युग डिजिटल युग है, स्मार्टफोन और इंटरनैट के साथ व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग प्लेटफौर्म ने सूचनाओं का आदानप्रदान तेज, सस्ता और व्यापक बना दिया है लेकिन इसी सुविधा ने एक और संकट को जन्म दिया है- फौरवर्ड मैसेज का अंधाधुंध प्रसार.
