Cosmetic injections : निशा ने 35 साल की उम्र में बोटौक्स की सहायता से अपना जौ लाइन को ठीक करवाया, क्योंकि उसका चेहरे से जॉ लाइन गायब था. उसे सजना – संवरना पसंद है, लेकिन जौ लाइन ठीक न होने की वजह से वह अच्छा फ़ील नहीं कर रही थी. दोस्त की सलाह पर उन्होंने ये कदम उठाया, लेकिन सेंसेटिव स्किन होने की वजह से उन्हे एलर्जी हो गई, जिसे कई महीने की इलाज के बाद निशा ठीक हो पाई.
ये सही है कि बोटौक्स (Botox) का उपचार पूरी तरह से व्यक्तिगत है और ‘एक जैसा’ (one-size-fits-all) फॉर्मूला सभी पर काम नहीं करता. सही परिणाम मांसपेशियों की ताकत, त्वचा की स्थिति, चेहरे की संरचना और व्यक्ति के लक्ष्यों पर निर्भर करते हैं, जिसके लिए एक विशेषज्ञ द्वारा अनुकूलित (customized) योजना की आवश्यकता होती है. गलत प्रोसेस सुंदर दिखने के अलावा चेहरे को भद्दा बना देती है.
असल में आज के समय में युवा और फ्रेश दिखने की चाहत बोटौक्स का प्रयोग तेजी से कर रहे है, जबकि व्यक्ति की त्वचा, मांसपेशियों की संरचना, उम्र, जीवनशैली और तकनीक जैसे कई कारकों में छिपा होता है.
क्या है बोटौक्स
इस बारें में दिल्ली की पीएसआरआई अस्पताल की डर्मेटोलौजिस्ट डॉ. भाउक धीर कहते है कि बोटौक्स, जिसे चिकित्सकीय रूप से बोटुलिनम टॉक्सिन कहा जाता है, चेहरे की उन मांसपेशियों को अस्थायी रूप से रिलैक्स करता है, जो झुर्रियों का कारण बनती हैं, लेकिन आज के यूथ इसे अपने मन मुताबिक चेहरा पाने के लिए प्रयोग करने लगे है, जो कई बार उनके लिए प्राण घातक भी बन जाता है. मेरे पास ऐसे कई व्यक्ति आते है, जिन्होंने बिना सोचे समझे बोटॉक्स का प्रयोग कर लिया है और बाद में उसे ठीक करना कठिन हो जाता है.
हर व्यक्ति की चेहरे की मांसपेशियों की ताकत, त्वचा की मोटाई और कोलेजन का स्तर अलग होता है, जिन लोगों की मांसपेशियां अधिक मजबूत होती हैं, उनमें डोज और तकनीक अलग रखनी पड़ती है, जबकि पतली त्वचा वाले व्यक्तियों में प्रभाव जल्दी दिखाई दे सकता है. यही कारण है कि एक जैसा परिणाम सभी में नहीं दिखता.
ग्लैमर वर्ल्ड में खूब प्रचलन
बौलीवुड में कई अभिनेत्रियों ने जवां दिखने के लिए बोटौक्स या फिलर्स का सहारा लिया, जिससे कभी-कभी उनका चेहरा बदला हुआ और अस्वाभाविक भी नजर आया. रिपोर्ट्स की माने, तो इसमें अनुष्का शर्मा, मौनी रॉय, आयशा टाकिया और रिमी सेन जैसी अभिनेत्रियाँ हैं, जिनमें से कुछ के लुक्स काफी विवादों में रहे.
असल में इस प्रोसीजर को उन्हे करवाने की आवश्यकता होती है, जो ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े है, जो उनकी खूबसूरती को एन्हैन्स करती है, जिसमें 90 के दशक के कलाकार नीलम कोठारी सोनी ने कुछ समय पहले ‘बोटॉक्स’ कराते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो डाला था. सदाबहार हीरोइन रेखा, हेमा मालिनी, अनिल कपूर, इन सबकी उम्र 65 पार हो चुकी है, लेकिन आज भी ये स्टार चेहरे से युवा दिखते हैं. 50 पार की माधुरी दीक्षित को देखकर भी लगता है कि उनकी उम्र थम-सी गई है. हौलीवुड अभिनेत्री किम कर्दाशियां ने भी अपनी खूबसूरती का यही राज फैंस के साथ शेयर किया.
बोटौक्स के प्रकार
बोटौक्स (Botox) वास्तव में एक ब्रांड का नाम है, लेकिन इसे अधिकतर बोटुलिनम टॉक्सिन (Botulinum Toxin) इंजेक्शन के लिए इस्तेमाल किया जाता है. मुख्य रूप से इसके 4 से 5 प्रकार के ब्रांड्स सबसे अधिक प्रसिद्ध और FDA द्वारा स्वीकृत हैं.
बोटौक्स (Botox)
सबसे पुराना और लोकप्रिय ब्रांड है. इसका उपयोग झुर्रियों, माइग्रेन और अत्यधिक पसीने के इलाज में होता है.
डिस्पोर्ट (Dysport)
यह मांसपेशियों में तेजी से फैलता है, इसलिए इसे माथे जैसे बड़े क्षेत्रों के लिए बेहतर माना जाता है.
जियोमिन (Xeomin)
इसे “नेकेड टॉक्सिन” कहा जाता है, क्योंकि इसमें अतिरिक्त प्रोटीन नहीं होते. इससे शरीर में इसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का खतरा कम रहता है.
जुवेउ (Jeuveau)
इसे ‘NewTox’ भी कहते हैं. यह विशेष रूप से केवल सौंदर्य (Cosmetic) संबंधी समस्याओं जैसे भौहों के बीच की रेखाओं के लिए बनाया गया है.
मायोब्लॉक (Myobloc) यह ‘टाइप B’ टॉक्सिन है और उन लोगों के लिए उपयोग किया जाता है, जिन पर टाइप A वाले अन्य ब्रांड असर नहीं करते.
प्रोसेस के तरीके
मार्केट में बोटुलिनम टौक्सिन टाइप A के कई ब्रांड उपलब्ध हैं, जैसे कि Botox, Dysport, Xeomin आदि. ये सभी मूल रूप से एक ही टॉक्सिन पर आधारित होते हैं, लेकिन उनकी यूनिट स्ट्रेंथ, डिफ्यूजन क्षमता और प्रभाव की अवधि में हल्का अंतर हो सकता है. कुछ मामलों में टाइप B बोटुलिनम टॉक्सिन का भी उपयोग किया जाता है, खासकर उन मरीजों में जिनमें टाइप A के प्रति रेजिस्टेंस विकसित हो गया हो. इसलिए डॉक्टर मरीज की जरूरत और चेहरे की संरचना के अनुसार सही ब्रांड और डोज़ का चयन करते हैं.
यहां यह समझना जरूरी है कि बोटौक्स एक इनवेसिव प्रक्रिया है. हालांकि इसमें सर्जरी नहीं होती, लेकिन यह एक मेडिकल प्रोसीजर है, जिसमें सुई के माध्यम से दवा त्वचा के अंदर डाली जाती है. इसलिए इसे केवल प्रशिक्षित और अनुभवी त्वचा विशेषज्ञ द्वारा ही कराया जाना चाहिए. गलत तकनीक या गलत डोज़ चेहरे के भावों को असामान्य बना सकती है.
कब करवाना है घातक
डौक्टर आगे कहते है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में बोटॉक्स करवाना सुरक्षित नहीं माना जाता, जो निम्न है,
- गर्भवती या स्तनपान कराने वाली स्त्रियों को यह ट्रीटमेंट नहीं करवाना चाहिए.
- जिन लोगों को न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर जैसे मायस्थीनिया ग्रेविस या लैम्बर्ट-ईटन सिंड्रोम हो, उन्हें भी इससे बचना चाहिए.
- यदि किसी को बोटुलिनम टॉक्सिन से एलर्जी है या इंजेक्शन साइट पर सक्रिय संक्रमण है, तो प्रक्रिया टालनी चाहिए. जो लोग गंभीर ब्लीडिंग डिसऔर्डर से ग्रस्त हैं या अनियंत्रित डायबिटीज से पीड़ित हैं, उन्हें पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक होता है.
रखें ध्यान
बोटॉक्स करवाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है,
- प्रक्रिया से 3 से 5 दिन पहले शराब, विटामिन E सप्लीमेंट, ओमेगा-3 या अन्य ब्लड-थिनिंग दवाओं से परहेज करना बेहतर होता है, ताकि सूजन और ब्रूज़िंग का खतरा कम हो सके. साथ ही, ट्रीटमेंट से पहले चेहरे की सही क्लीनिंग और मसल एनालिसिस बेहद महत्वपूर्ण होता है.
- सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि क्लिनिक प्रमाणित हो और डॉक्टर योग्य एवं अनुभवी हो. सस्ते ऑफर्स या गैर-मेडिकल सेटअप में यह प्रक्रिया करवाना जोखिम भरा हो सकता है. अपनी मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी, प्रेग्नेंसी या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की जानकारी डौक्टर को अवश्य दें. यदि आप ब्लड थिनर दवाएं ले रहे हैं, तो इसकी जानकारी भी पहले से साझा करें.
- बोटौक्स करवाने से प्रयोग में लाई जाने वाली ब्रांड की एक्सपायरी डेट, सही तरीके से स्टोर किया गया है या नहीं देखना अत्यंत आवश्यक है. साथ ही यह समझना जरूरी है कि आपकी अपेक्षाएं क्या हैं और वे कितनी वास्तविक है.
- बोटौक्स का उपयोग केवल कॉस्मेटिक उद्देश्यों तक सीमित नहीं है. इसका उपयोग अत्यधिक पसीना (हाइपरहाइड्रोसिस), माइग्रेन, दांत पीसने की समस्या (ब्रुक्सिज्म), जॉ लाइन स्लिमिंग और कुछ मसल स्पैज्म जैसी मेडिकल स्थितियों में भी किया जाता है. इसलिए अनुभवी डॉक्टर की देख – रेख में किया जाना चाहिए.
साइड इफेक्ट
आमतौर पर हल्की सूजन, लालिमा, इंजेक्शन साइट पर दर्द या हल्का सिरदर्द हो सकता है, जो कुछ घंटों या दिनों में ठीक हो जाता है.
दुर्लभ मामलों में पलकों का हल्का झुकना, चेहरे की असमानता या मांसपेशियों में अत्यधिक कमजोरी भी देखी जा सकती है. ये समस्याएं अक्सर अस्थायी होती हैं और कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाती हैं. बहुत ही दुर्लभ परिस्थितियों में टॉक्सिन का प्रभाव आसपास की मांसपेशियों तक फैल सकता है, जिससे निगलने, बोलने या सांस लेने में कठिनाई हो सकती है. हालांकि यह स्थिति अत्यंत असामान्य है, फिर भी ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है.
साइड इफेक्ट्स को ठीक करने के लिए डौक्टर की सलाह का लेना जरूरी है. प्रक्रिया के बाद कम से कम 4 से 6 घंटे तक लेटने से बचें, इंजेक्शन वाली जगह को रगड़ें नहीं और 24 घंटे तक भारी व्यायाम से दूर रहें. यदि असामान्य लक्षण जैसे निगलने में कठिनाई, बोलने में परेशानी या सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें.
बोटौक्स कोई “वन-साइज़-फिट्स-औल” ट्रीटमेंट नहीं है. हर चेहरे की बनावट, उम्र और त्वचा की स्थिति अलग होती है, इसलिए उसके रिजल्ट भी अलग हो सकते हैं. जरूरत न पड़े, तो इससे आम जनजीवन को दूर रहना ही काफी अच्छा होता है, इसलिए सही जानकारी, योग्य विशेषज्ञ का चयन और यथार्थवादी अपेक्षाएं ही सुरक्षित और संतोषजनक रिजल्ट आपको दे सकती हैं, लेकिन ध्यान रहें, जिसका इफेक्ट होता है, उसका साइड इफेक्ट भी हमेशा होता है.
