टीवी ऐक्ट्रैस मानसी जोशी राय फिल्म और टीवी जगत का एक जाना मानानाम है. वे कई सालों से अभिनय से जुड़ी हुई हैं. मराठी फिल्मों के अलावा वे कई सीरियल ‘कुसुम’, ‘घरवाली ऊपरवाली’, ‘साया’, ‘क्योंकि सास माबहू होती है’, ‘नच बलिए 1,’ ‘ढाई किलो प्रेम’, ‘फिल्मों में स्टूडेंट्स औफ द ईयर 2,’ ‘जस्ट मैरिड’ वगैरह में अभिनय कर चुकी हैं.
मानसी जोशी का अभिनय से ही नहीं बल्कि अभिनय से जुड़े लोगों से गहरा नाता है। अभिनेता रोहित राय उन के पति हैं। गुजराती थिएटर के जानेमाने अभिनेता अरविंद जोशी उन के पिता हैं। उन की चाची सरिता जोशी मशहूर ऐक्ट्रैस हैं। ऐक्टर शरमन जोशी की भाभी उन की बहन हैं.
मानसी जोशी राय खुद कई सालों से अभिनय से जुड़ी रही हैं. ‘लक्ष्मी निवास’ में मानसी जोशी राय लक्ष्मी के किरदार में नजर आ रही हैं. लक्ष्मी एक ऐसी महिला है जो बिना ज्यादा कहे, प्यार, सब्र और धैर्य के साथ अपने पूरे परिवार को संभाल कर रखती है। वह मिडिल क्लास परिवार की वह मजबूती है, जो दिखती भले कम है, लेकिन हर दिन महसूस होती है.
यह किरदार सादगी, परंपरा और अंदरूनी मजबूती से जुड़ा है, जहां खामोशी, त्याग और बिना शर्त प्यार ही सब से बड़ी ताकत है. इस बातचीत में मानसी ने बताया कि सादगी से भरे इस किरदार को निभाना उन के लिए कितना खास है और कैसे लक्ष्मी के जरीए वे खामोशी, त्याग और बिना शर्त प्यार की ताकत को सामने लाती हैं.
पेश हैं, लक्ष्मी निवास की लक्ष्मी यानि मानसी जोशी राय से खास बातचीत :
‘लक्ष्मी निवास’ की कहानी के बारे में आप को ऐसा क्या खास नजर आया जो आप ने यह सीरियल करना मंजूर कर लिया?
‘लक्ष्मी निवास’ लक्ष्मी और श्रीनिवास की कहानी है, जो एक मिडिल क्लास दंपति हैं और पिछले 35 साल से किराए के घर में रह रहे हैं. अब जब रिटायरमैंट करीब है, तो वे अपने उस सपने को पूरा करना चाहते हैं, जो हर आम परिवार का होता है यानी अपना खुद का घर. यह कहानी हर भारतीय परिवार से जुड़ती है, जहां पैसों की परेशानियां, परिवार की जिम्मेदारियां और आपसी प्यार साथ चलते हैं. इस के साथ ही यह पतिपत्नी के उस रिश्ते को भी बहुत खूबसूरती से दिखाती है, जो जिंदगी के हर मोड़ पर एकदूसरे के साथ खड़ा रहता है.
मुझे कहानी में अपनापन प्यार और इमोशंस नजर आया, जिस ने मुझे यह किरदार निभाने के लिए प्रेरित किया .
यह शो मिडिल क्लास सपनों पर फोकस करता है. आज के समय में आप को यह कहानी क्यों जरूरी लगी?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम कई बार भूल जाते हैं कि अपना घर होना या अपने परिवार को खुश देखना ही बहुत से लोगों के लिए सब से बड़ी कामयाबी होती है. ‘लक्ष्मी निवास’ मिडिल क्लास भारत के दिल को दिखाता है, जहां भले ही सब कुछ ज्यादा न हो, लेकिन संतोष, ईमानदारी और साथ होने का एहसास भरपूर होता है. यह कहानी असली लोगों, उन की रोजमर्रा की जद्दोजेहद और उन के जज्बातों को सामने लाती है और जी टीवी, जो हमेशा ‘आप का अपना जी’ रहा है, उस के लिए ऐसी कहानियां उस की पहचान का हिस्सा हैं.
‘लक्ष्मी निवास’ को बाकी पारिवारिक धारावाहिकों से अलग क्या बनाता है? ज्यादातर फैमिली ड्रामा या तो बहुत टकराव दिखाते हैं या फिर सिर्फ चमकदमक पर टिके होते हैं. ‘लक्ष्मी निवास’ इन सब से अलग है क्योंकि यह असल जिंदगी के बहुत करीब है. यह उन छोटेछोटे पलों और जज्बातों को दिखाता है, जो एक बड़ा सपना पूरा करने की कोशिश में हर दिन सामने आते हैं, जैसे अपना घर खरीदना. लक्ष्मी और श्रीनिवास का रिश्ता इस कहानी को और भी अपनापन देता है और याद दिलाता है कि साथ निभाना और सपने साझा करना कभी पुराना नहीं होता. यह शो सिखाता है कि सपनों में वक्त लग सकता है, लेकिन सब्र और परिवार का साथ हो, तो वे पूरे जरूर होते हैं.
क्या दर्शक ‘लक्ष्मी निवास’ सीरियल की कहानी से दिल से जुड़ पाएंगे?
दर्शकों को एक ऐसी कहानी देखने को मिलेगी जो बिलकुल घर जैसी लगेगी, अपनी सी, दिल को छूने वाली और भावनाओं से भरी हुई. ‘लक्ष्मी निवास’ सिर्फ एक घर के सपने की बात नहीं करता, बल्कि परिवार के रिश्तों, आपसी समझ और हार न मानने वाले जज्बे को सामने लाता है. यह शो लोगों को मुसकराने पर मजबूर करेगा, सोचने पर भी और हो सकता है एक एपिसोड के बाद मातापिता को फोन करने का मन भी कर जाए. यह एक सुकून देने वाला अनुभव महसूस होगा.
क्या यह सीरियल नई पीढ़ी या हर पीढ़ी से जुड़ पाएगा?
हा बिलकुल क्योंकि यह हम सब की कहानी है. चाहे वे मातापिता हों जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए मेहनत की हो, या वे बच्चे जिन्होंने उन कुरबानियों को करीब से देखा हो. इस शो में हरकोई खुद को पहचान लेगा. अपना कुछ बनाने का गर्व, साथ बैठ कर खाने की गरमाहट और वह प्यार जो वक्त के साथ और गहरा होता जाता है। यह सब हर उम्र के जज्बात हैं.
‘लक्ष्मी निवास’ याद दिलाता है कि दुनिया कितनी भी बदल जाए, घर और रिश्तों की अहमियत हमेशा बनी रहती है.
पर्सनली लक्ष्मी को परिवार की भावनात्मक ताकत के रूप में दिखाया गया है। आप उन से कैसे जुड़ीं?
लक्ष्मी की सादगी ही उस की सब से बड़ी ताकत है. वह अपने प्यार, अपने हाथ के खाने और अपने भरोसे से पूरे परिवार को एकसाथ बांधे रखती है. मुझे यह बात बहुत अच्छी लगी कि वह समझदारी और जज्बातों के बीच संतुलन बनाए रखती है. वह अपने पति की खामोश मेहनत को भी समझती है और बच्चों की नई सोच को भी. एक कलाकार के तौर पर मुझे उस की नरमी और मजबूती का यह मेल बहुत खास लगा.
आप खुद काफी मौडर्न और खुल कर बोलने वाली हैं। लक्ष्मी जैसे किरदार में ढलना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
सच कहूं तो लक्ष्मी और मैं काफी अलग हैं. मैं स्वभाव से अपनी बात साफ कहती हूं, जबकि लक्ष्मी शांत है, कम बोलती है और परिवार में गहराई से जुड़ी हुई है. यही फर्क सब से बड़ी चुनौती था. मुझे अपनी ऐनर्जी को थोड़ा थामना पड़ा, कम बोल कर ज्यादा महसूस करना पड़ा और छोटे इशारों में भाव ढूंढ़ने पड़े. लेकिन यही चीज मुझे इस किरदार के करीब ले आई. वह बिना शोर किए भी असर छोड़ जाती है. इस से मुझे यह सीख मिली कि ताकत हमेशा ऊंची आवाज में नहीं होती.
टीवी पर लक्ष्मी को देखने वाली महिलाओं के लिए उस की कहानी क्या संदेश देती है?
लक्ष्मी यह याद दिलाती है कि ताकत दिखावे में नहीं होती, सब्र, प्यार और लगातार आगे बढ़ते रहना भी ताकत ही है. वह किसी से लड़ नहीं रही, लेकिन हर दिन अपने फैसलों और सकारात्मक सोच से अपने आसपास की दुनिया को बेहतर बना रही है. मिडिल क्लास महिलाओं के लिए लक्ष्मी की कहानी बहुत अपनी सी लगेगी क्योंकि उस में उन की मेहनत, उन की अनकही हिम्मत और परिवार को जोड़े रखने का वह शांत गर्व साफ नजर आता है जो हर मिडिल क्लास फैमिली में आप को उस मां के रूप में देखने को मिलेगी जैसी लक्ष्मी है .
